मुख्यमंत्री के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन, पीड़ित परिवार को 1 करोड़ मुआवजे और नौकरी की मांग

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। जिले के बड़े गोहरा स्थित आदिवासी बालक आश्रम में अध्ययनरत 12 वर्षीय छात्र की मौत का मामला अब गंभीर राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। घटना को लेकर आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है तथा चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 19 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130 पर चक्काजाम किया जाएगा।

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ज्ञापन में समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि छात्र की तबीयत 24 जनवरी को बिगड़ने के बावजूद आश्रम प्रबंधन ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई। बताया गया कि छात्र को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया और न ही उसे प्राथमिक उपचार या आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई। आरोप है कि छात्र की स्थिति लगातार बिगड़ती रही, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां 29 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

आदिवासी समाज का कहना है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का परिणाम है। समाज के नेताओं का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिलता तो संभवतः छात्र की जान बचाई जा सकती थी। इसी कारण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है।

समाज द्वारा प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें मृतक छात्र के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, दोषी अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई तथा प्रदेश भर के सभी आदिवासी छात्रावासों का स्वास्थ्य और प्रशासनिक ऑडिट कराए जाने की मांग शामिल है।

इधर, इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि आदिवासी छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है और यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि ऐसी घटना किसी प्रभावशाली या शहरी परिवार के बच्चे के साथ हुई होती तो अब तक गिरफ्तारी और निलंबन की कार्रवाई हो चुकी होती।

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उधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की घोषणा नहीं होने से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

आदिवासी समाज और विभिन्न संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस मामले को दबाने या टालने की कोशिश की गई तो आंदोलन जिला मुख्यालय से लेकर राज्य स्तर तक फैल सकता है। NH-130 पर प्रस्तावित चक्काजाम की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख यातायात मार्ग है।

अब सबकी नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। देखना होगा कि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाकर जनाक्रोश को शांत करता है या मामला बड़े आंदोलन का रूप लेता है।


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