Unique temple in CG बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आस्था और मान्यताओं की दुनिया जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही अनोखी भी। इसी अनोखेपन की एक खास मिसाल है मुकड़ी मावली माता मंदिर, जहां देवी को ‘प्रेम को मिलाने वाली माता’ के रूप में पूजा जाता है। यहां की परंपराएं सामान्य मंदिरों से बिल्कुल अलग हैं, जिस कारण यह मंदिर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह मंदिर दंतेवाड़ा जिला में छिंदनार से बारसूर जाने वाले मुख्य मार्ग से करीब 100 मीटर अंदर स्थित है। मान्यता है कि मुकड़ी मावली माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद कभी खाली नहीं जाती, खासकर प्रेम से जुड़ी मन्नतें।
प्रेमी ही कर सकते हैं प्रवेश, महिलाओं की एंट्री वर्जित
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां केवल प्रेमी युवक ही प्रवेश कर सकते हैं। लड़कियों और महिलाओं का मंदिर में आना पूरी तरह वर्जित है। परंपरा के अनुसार, प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नहीं आते, बल्कि उसकी तस्वीर और अपनी मन्नत का पत्र माता के चरणों में चढ़ाते हैं।
तस्वीर और पत्र को पत्थर के नीचे रखा जाता है, जिसकी सुरक्षा मंदिर के पुजारी करते हैं। कोई भी व्यक्ति उन तस्वीरों या पत्रों को छू नहीं सकता। माना जाता है कि माता स्वयं उन मन्नतों की रक्षा करती हैं।
दूर-दराज से पहुंचते हैं युवा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि देवी की स्थापना कब हुई, इसका स्पष्ट इतिहास किसी को नहीं पता। यह मंदिर पूर्वजों के समय से आस्था का केंद्र रहा है। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी युवा यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में देवी के सामने रखी गई कई तस्वीरें इस विश्वास की गवाही देती हैं।
कई प्रेमियों का दावा है कि माता के दरबार में अर्जी लगाने के बाद उनकी अधूरी प्रेम कहानी को नया मोड़ मिला और वे अपने बिछड़े साथी से मिल पाए।
रहस्य और आस्था का संगम
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं में रहस्य भी शामिल है। ग्रामीणों का मानना है कि मुकड़ी मावली माता प्रेम की पीड़ा को समझती हैं और केवल सच्चे दिल से मांगी गई मुराद ही स्वीकार करती हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले अधिकांश लोग अपनी पहचान गुप्त रखते हैं और बिना किसी शोर-शराबे के पूजा-अर्चना कर लौट जाते हैं।
There is no ads to display, Please add some
