मामला उजागर होने पर SDM ने अपने ही आदेश को निरस्त कर आनन फानन में पुनः किया आदिवासी का नाम दर्ज…

 

जशपुर (गंगा प्रकाश)। जिले केपत्थलगांव तहसील कार्यालय हमेशा विवादों को लेकर सुर्खियों में रहा है अभी हाल ही में एक ताजा मामला सामने आया है पत्थलगांव नगर पंचायत अंतर्गत वार्ड क्रमांक 07 में स्थित भूमि खसरा नंबर 333/1 जो कि 1956 में तेजराम व बोधराम पिता नोहरसाय जाति पनिका के द्वारा जोहन मिंज व लुईस खेस जाति उरांव के नाम पंजीयन कर बिक्री कर दी थी जिसका नामांतरण 20.09.1957 को लुईस खेस के नाम से हो चुका था व जोहन मिंज का नाम न चढ़ने पर जोहन मिंज के द्वारा तत्कालीन तहसीलदार,SDM व व्यवहार न्यायालय में प्रकरण चलाकर अपना नाम दर्ज करने की मांग की थी लेकिन सभी न्यायालय से उसका नाम न जोड़कर लुईस खेस का ही नाम रहने का आदेश जारी हुआ।

 

वर्तमान में उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 पर लुईस खेस के वारिसान साजी लियोनार्ड का नाम दर्ज होते आ रहा था साजी लियोनार्ड जाति उरांव के द्वारा उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 को सुरेश यादव जाति पिछड़ा को विक्रय करने हेतु जनवरी 2024 में कलेक्टर महोदय जिला जशपुर के न्यायालय मे आवेदन प्रस्तुत कर विक्रय अनुमति चाही गई जिसके बाद कलेक्टर महोदय ने उक्त प्रकरण SDM पत्थलगांव को जांच प्रतिवेदन हेतु भेजा और SDM पत्थलगांव ने तहसीलदार पत्थलगांव को पत्र जारी कर प्रतिवेदन देने को कहा।उक्त प्रकरण में प्रतिवेदन जाने से पहले इस मामले में नया मोड़ आता है और उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 के 1956 के विक्रेता तेजराम व बोधराम का वंशज बनकर गंभीर दास पिता तेजराम जाति पनिका निवासी घरघोड़ा के द्वारा जबकि उसका नाम उक्त भूमि पर उनके वंशावली में नही चढ़ा है उसके बावजूद अप्रैल 2024 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर 20.09.1957 को हुए नामान्तरण को निरस्त करने का अपील आवेदन समय सीमा खत्म हो जाने पर धारा 05 के तहत प्रस्तुत किया और भू माफियाओं की सांठगांठ से 67 वर्ष पश्चात हुई अपील जब  भू राजस्व संहिता जो कि 1959 में लागू की गई वह लागू भी नही हुई थी उसे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने स्वीकार कर लिया और अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाते हुए सिर्फ उभय पक्ष गंभीर दास पिता तेजराम जाति पनिका व साजी लियोनार्ड पिता अजीत खेस जाति उरांव से शपथ पत्र के साथ  सिर्फ आपसी सहमति का आवेदन लेते हुए दिनाँक 20.09.1957 को हुए नामांतरण आदेश को दिनाँक 28.06.2024 को खारिज कर दिया।जबकि उक्त भूमि की विक्रय अनुमति का मामला अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव के वरिष्ठ अधिकारी व न्यायालय कलेक्टर महोदय जिला जशपुर के समक्ष अब तक लंबित था और उसकी जांच स्वयं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने तहसीलदार पत्थलगांव को दी हुई थी।

 

मामला यही नही रुकता है अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव के 20.09.1957 के नामान्तरण आदेश को दिनाँक 28.06.2024 को खारिज करने के बाद भू माफियाओं की सक्रियता व राजस्व अधिकारी कर्मचारी पटवारी की मिलीभगत से जबकि उक्त भूमि का सिर्फ नामांतरण निरस्त हुआ लेकिन विक्रय पंजीयन अब तक सक्षम व्यवहार न्यायालय से निरस्त नही हुआ और आदिवासी भूमि खसरा नंबर 333/1 की रजिस्ट्री रहते हुए तत्कालीन पटवारी ह.न. 06 पत्थलगांव के द्वारा दिनाँक 02.07.2024 को 1956 के विक्रेता तेजराम व बोधराम पिता नोहरसाय जाति पनिका का नाम उक्त भूमि पर दर्ज कर उक्त आदिवासी भूमि को सामान्य कर दिया।दिनाँक 02.07.2024 को तेजराम व बोधराम का नाम चढ़ते ही पुनः भू माफियाओं की सक्रियता व अधिकारी कर्मचारी की सांठगांठ से दिनाँक 03.07.2024 को गंभीरदास द्वारा तहसीलदार पत्थलगांव के समक्ष उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 पर गंभीरदास,कचराबाई व छबीलदास का नाम दर्ज किए जाने हेतु फौती नामांतरण का आवेदन प्रस्तुत किया जिस पर तहसील न्यायालय की भुइयां शाखा से दिनाँक 03.07.2024 को ही दावा आपत्ति का इश्तेहार प्रकाशन कर दिनाँक 25.07.2024 की तिथि तय की गई जिस इश्तेहार में पहला हस्ताक्षर सुरेश यादव का दर्ज है एक बार पुनः दावा आपत्ति की समयसीमा पूरी हुए बिना तत्कालीन पटवारी ह.न. 06 पत्थलगांव के द्वारा दिनाँक 08.07.2024 को ही उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 पर गंभीरदास, कचराबाई व छबीलदास जाति पनिका का नाम दर्ज कर दिया गया जबकि दावा आपत्त्ति की समय सीमा 25.07.2024 तय की गई थी और उसके बाद 2 दिन बीतने पर दिनाँक 10.07.2024 को पत्थलगांव में विक्रय पंजीयन का कार्य होने के बावजूद जिस सुरेश यादव को उक्त भूमि विक्रय के लिए साजी लियोनार्ड जाति उरांव ने कलेक्टर महोदय के समक्ष आदिवासी भूमि को सामान्य व्यक्ति को विक्रय अनुमति का आवेदन प्रस्तुत किया था उसी सुरेश यादव ने गंभीरदास, कचराबाई व छबीलदास को जशपुर ले जाकर उक्त भूमि का विक्रय पंजीयन अपने नाम से निष्पादित कर लिया।व उसका नामान्तरण भी पत्थलगांव तहसील न्यायालय द्वारा कर दिया गया।और कूटरचना कर अधिकारी कर्मचारी की मिलीभगत से आदिवासी भूमि को जालसाजी कर सामान्य कर दिया गया।

 

इसके पश्चात जिस साजी लियोनार्ड ने कलेक्टर महोदय जिला जशपुर के समक्ष उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 को आदिवासी से सामान्य व्यक्ति को विक्रय करने की विक्रय अनुमति चाही थी उस साजी लियोनार्ड ने दिनाँक 25.07.2024 को तहसीलदार पत्थलगांव के समक्ष उपस्थित होकर मय शपथ पत्र आवेदन देकर यह कहा कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव के प्रकरण क्रमांक 202406031100002/37/अ-6(अपील)/2023-24 में पारित आदेश दिनाँक 28.06.2024 के आदेश के तहत उक्त भूमि पर मेरे दादा के नाम हुए नामांतरण आदेश के निरस्त हो जाने से मेरा नाम राजस्व अभिलेखो से विलोपित हो गया है तो वह इस प्रकरण को आगे चलाना नही चाहता है उक्त तथ्य को तहसीलदार पत्थलगांव ने अपने प्रतिवेदन मे अंकित करते हुए अपना जांच प्रतिवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव को भेज दिया व 29.07.2024 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने उक्त विक्रय अनुमति आवेदन का प्रतिवेदन कलेक्टर महोदय जिला जशपुर को प्रेषित किया व 21.08.2024 को कलेक्टर महोदय ने जांच प्रतिवेदन के उक्त तथ्यों को अपने आदेश मे दर्शाते हुए साजी लियोनार्ड का उक्त विक्रय अनुमति आवेदन खारिज कर दिया।कलेक्टर महोदय के समक्ष उक्त बाद भूमि खसरा नंबर 333/1 का मामला 21.08.2024 तक लंबित था इसके बावजूद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने अपने वरिष्ठ न्यायालय में लंबित मामले के समानांतर प्रकरण को अपने न्यायालय में दर्ज कर आदेश पारित किया जो न्यायोचित नही है।

 

अब इस मामले में फिर से एक नया मोड़ आता है और जैसे ही उक्त भूमि खसरा नंबर 333/1 जो कि लगभग 67 सालों से राजस्व अभिलेखों में आदिवासी भूमि दर्ज होते आ रही थी उक्त भूमि को कूटरचना कर सामान्य विक्रय पंजीयन की चर्चा का बाजार गर्म होता है तो पुनः अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव द्वारा आनन फानन में उक्त प्रकरण को नस्ती करने के पश्चात अपने न्यायालय में दर्ज कर दिनाँक 19.11.2024 को कलेक्टर महोदय जिला जशपुर के समक्ष अपने 20.09.1957 के नामान्तरण आदेश को निरस्त करने आदेश दिनाँक 28.06.2024 को स्वयं निरस्त करने पुनर्विलोकन हेतु प्रकरण प्रेषित किया गया। जिस पर कलेक्टर महोदय द्वारा दिनाँक 21.11.2024 को पुनर्विलोकन की अनुमति देते हुए उभय पक्ष को सुनवाई के समुचित अवसर प्रदान करते हुए गुण दोष के आधार पर निराकरण करने हेतु प्रकरण पुनः अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव को वापस भेजा जिस पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने दिनाँक 25.11.2024 को प्रकरण अपने न्यायालय में दर्ज कर मात्र 02 दिन का समय देते हुए दिनाँक 27.11.2024 को उभय पक्ष को नोटिस तामील कर आहूत करने का निर्देश दिया जिस पर ग्राम कोटवार ने उभय पक्ष बाहर जाने के कारण तामील होना बताया और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पत्थलगांव ने कलेक्टर महोदय के आदेश उभय पक्ष को समुचित अवसर ना देते हुए अपने ही किये आदेश दिनाँक 28.06.2024 को निरस्त करते हुए उक्त भूमि को 28.06.2024 से पूर्व की स्थिति में करते हुए अभिलेख दुरुस्ती का आदेश जारी किया। जिस पर वर्तमान पटवारी ह.न. 06 पत्थलगांव ने पुनः उक्त भूमि पर साजी लियोनार्ड पिता अजीत खेस जाति उरांव के नाम से दर्ज किया।

 

अब यह देखना होगा कि उक्त पूरे मामले में कूटरचना कर आदिवासी भूमि को सामान्य कर विक्रय किये जाने के मामले में संबंधित अधिकारी कर्मचारी व भू माफियाओं पर किस प्रकार की कार्यवाही होती है।

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