गरियाबंद/राजिम (गंगा प्रकाश)। इन दिनों फिंगेश्वर सहित छुरा ब्लाक के लगभग बहुत से गांवो में शासन के पीडीएस योजना के तहत राशनकार्डधारियों को मिलने वाले चावल वा चना का गोरखधंधा बड़ी तेजी से फल फूल रहा है। शासकीय राशन वितरण केंद्र से चावल खरीदकर कार्ड धारियों द्वारा गांव की दुकानों या कोचियों के पास  ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है। इस चावल को राइस मिलो तक खपाने के लिए ब्लाक में सैकड़ो  से जायदा कोचिया सक्रिय हैं। जो गांव गांव के किराना दुकानों या सीधे कार्ड धारियों से खरीदे कर  चावल को राइस मिलो तक खपा रहे हैं। इस बात की खाद्य विभाग को जानकारी होने के बावजूद इस कार्य में संलिप्त लोगो के ऊपर कोई कार्रवाई नही होने से मिलीभगत होने का अंदेशा हो रहा है। अंचल में शासकीय राशन वितरण केंद्र से राशन वितरण होता हैं।कुछ जरूरत मंद कार्ड के बड़े परिवार को यह चावल कम पड़ता है।और एसे परिवार अपने घरों में चावल का पूरा उपयोग करते हैं,।पर कुछ एसे भी कार्ड धारी है जो शासकीय राशन दुकान के चावल को खाने में नही उपयोग करते  वे लोग उस चावल को किराना दुकानों या गांव गांव घूम रहे कोचिया के पास बेचकर गेंहू या पतला चावल या फिर किराना समान खरीद लेते हैं। शनिवार को सूत्रों से जानकारी मिली कि ग्राम लोहरसी में राशनकार्ड हितग्राहियों के खरीदे गए चावल को एक दुकान से राजिम के एक मिल में खपाने के उद्देश्य से लोहार्सिंग का एक बिचौलिए द्वारा अपने पिकअप वाहन में लादकर ले जाया जा रहा था। पिक अप में सवार चावल मालिक को पूछा गया तो पहले तो उसने घर का चावल बता कर टाल मटोल करता रहा । फिर गाड़ी ड्राइवर और हमालो ने बताया यह चावल किराना दुकान से लोड कर बेचने राजिम जा रहे है।  इस पीडीएस के चावल को ग्राम लोहरसी के एक किराना दुकान से खरीदकर रूद्र राइस मिल ले जाया जा रहा था । लगातार चल रहे इस गोरखधंधे का विभाग को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नही किया जाता। बता दे की चावल के इस काला कारोबार में एक बस सरकार को छोड़ कर बाकी सब को फायदा हो है।क्यों की जिस राइस मिलों से धान चावल बनकर सरकारी गोदाम में जाता है ,फिर सरकारी गोदाम से गांव गांव बने शासकीय राशन वितरण केद्रो में जाता है। फिर वहा से कार्ड धारि हितग्राहियों को मिलता है।हितग्राहियों से कोचिया और किराना दुकान में जाता है।किराना दुकान से फिर राइस मिलों तक पहुंच जाता है।इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है।फिर यही चावल नया बरदाना में पैक होकर सरकारी गोदाम में पहुंचता है।यह प्रक्रिया सालो से ऐसा ही चल रहा है।केवल सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है।राइस मिलर और कोचिया माला माल हो रहे है।क्यों की बिना कुछ किए सस्ती कीमत में इन्हे चावल मिल जाता है। यही वजह है कि राजिम नवापारा समेत अब गांव गांव में राइस मिलों संख्या में इजाफा होने लगा है।देखना होगा की खबर के बाद संबंधित विभाग ऐसे कोचियो पर क्या कार्यवाही करता है।या कही राशन के इस खेला में विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी संलिप्त तो नही ?


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