गरियाबंद/छुरा, फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के तकनीकी मार्गदर्शन में 3 से 05 जुलाई तक कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिले के छुरा, फिंगेश्वर एवं गरियाबंद विकासखण्ड के गांवों के महिला समूहों को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के तहत् श्री अन्न (रागी, कोदो, कुटकी) की वैज्ञानिक कृषि एवं प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही मिलेट से बनने वाले उत्पादों की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष (लघु धान्य वर्ष) घोषित किया गया है। जिसके तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई, दिल्ली एवं साथ ही साथ छ.ग. शासन द्वारा भी राज्य में लघु धान्य फसलों के उत्पादन को बढ़ाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। इसी तारतम्य में निदेशक विस्तार सेवाएं, के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केन्द्रों के द्वारा भी लघु धान्य फसलों के वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता युक्त बीजोत्पादन, भण्डारण एवं प्रसंस्करण कर खाद्यान्न के रूप में उपयोग बढ़ाने को लेकर कृषको को प्रशिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद की वैज्ञानिक डॉ.शालु आब्राहम एवं डॉ. इशू साहू द्वारा दिनांक 3 जुलाई को ग्राम खट्टी, विकासखण्ड छुरा के मौली माता महिला स्वसहायता समुह, दिनांक 4 जुलाई को ग्राम कोपरा, विकासखण्ड, फिंगेश्वर के जय महामाया महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं को एवं दिनांक 5 जुलाई को सरस्वती महिला स्वसहायता समुह, गंजईपुर, एकता महिला स्व सहायता समुह, बेन्दकुरा, तुलसी मानस स्वसहायता समूह तंवरबाहारा की महिलाओं को कोदो, कुटकी, रागी की वैज्ञानिक खेती एवं उनसे बनने वाले प्रसंस्करित उत्पादों की जीवंत प्रदर्शन कर प्रशिक्षित किया गया। जिसमें समूह की महिलाओं के सकारात्मक रुझान प्राप्त हुए।

5 जुलाई को कृषि विज्ञान केन्द्र, गरियाबंद प्रांगण में स्व सहायता समूह की प्रशिक्षित महिलाओं के मध्य व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिला पंचायत गरियाबंद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती रीता यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने स्वसहायता समुह की महिलाओं द्वारा बनाये गये व्यंजनों (रागी माल्ट, ज्वार फलाहारी, ज्वार नमकपारा, ज्वार शक्करपारा, रागी शक्करपारा, रागी चकली, कोदो खिचड़ी, रागी लड्उू, ज्वार लड्डू,रागी इडली, कुटकी खीर) का अवकलोकन किया। स्वसहायता समुह की महिलाओं द्वारा बनायें गये व्यंजनों की तारीफ की। साथ ही आगे भी इसे करते रहने एवं अपने भोजन में सम्मिलित करने हेतु प्रेरित किया। सीईओ श्रीमती यादव ने कहा की महिला स्व सहायता समुह की महिलाये सभी क्षेत्रों में अच्छा उत्पाद तैयार तो कर लेती है, लेकिन बाजार की व्यवस्था नहीं करन पाती जिनसे उनके उत्पादों की बिक्री नहीं हो पाती जिस पर ध्यान देते हुए हमें बाजार तक समानों को पहुुंचाने एवं प्रचार पर भी ध्यान देने की जरूरत है। विक्रय काउन्टर भीड़ वाली जगह पर खोलने की प्रथमिकता का ध्यान रखे। साथ ही जिला स्तर पर लघुधान्य फसलों से निर्मित व्यंजनों के लिए स्टॉल उपलब्ध कराने की मंशा जाहिर किया।
न्यूसीड (एन.जी.ओ.) द्वारा एच.डी.एफ.सी. बैंक के वित्तीय सहयोग से सरस्वती महिला समूह, गंजईपुरी की महिलाओं को मिलेट्स के व्यंजन बनाने हेतु आवश्यक बर्तन तथा उत्पादों को बेचने हेतु वेंडिंग स्टॉल प्रदाय किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र, गरियाबंद के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनीष चौरसिया ने कार्यक्रम के उद्देश्य, आवश्यकता एवं प्रारूप पर संक्षिप्त संबोधन दिया एवं कहा की जिले में मिलेट्स उत्पादन की काफी संभावनाये है लोगों को जागरूक होने के साथ ही साथ इसके महत्व, शरीर के लिए उपलब्ध पोषक तत्वों मात्रा को देखते हुए इसे जरूर अपनाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन तुषार मिश्रा (कार्यक्रम सहायक) के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि अधिकारी ललित यादव, न्यूसीड के जिला संयोजक मलय साहू, सहायक रोहित सोनवानी प्रशिक्षण एवं व्यंजन प्रतियोगिता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाये उपस्थित रही।


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