गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। जैन मताम्बलियों द्वारा अक्ती, अक्षय तृतीया का पर्व पूरी भक्ति, श्रद्धा एवं पूजा अर्चना के साथ मनाया जाता है। आज के दिन जैनधर्म के प्रथम तीर्थकर आदिनाथ भगवान को अहार (भोजन) की विधि लगभग 400 दिनों के पश्चात् प्राप्त हुई थी। जिसमें उन्हें अहार के रूप में राजा श्रेयांश के द्वारा इच्छू रस गन्ने का रस प्रथम आहार के रूप में दिया था। इसलिए अक्षय तृतीया को जैन धर्म बहुत पावन दिवस के रूप में गन्ना के रस को ग्रहण कर और लोगों को श्रद्धाभाव से गन्ने का रस पीलाकर किया जाता है। नगर के जैन श्री संघ के कोषाध्यक्ष विमल पगारिया परिवार ने 10 मई अक्षय तृतीया को अपने निवास के सामने पंडाल लगाकर प्रातः 9 बजे से गन्ने का रस तुरंत निकालकर राहगीरों को पूरे श्रद्धा एवं सम्मान के साथ अपने परिजनों के साथ बांटा एवं पिलाया। सकल जैन श्री संघ सहित नागरिकों, व्यापारियों ने पगारिया परिवार के इस स्तुल्य काम की हृदय से अनुमोदना करते हुए उन्हें साधुवाद किया।
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