धमतरी(गंगा प्रकाश):-विकास के लिए रेत,गिट्टी आदि निर्माण सामग्री का होना निहायत जरूरी है। लेकिन इसके लिए नियमों को ताक पर रखकर अवैध तरीके से खनन करना किसी भी नजरिये से सही नहीं है। धमतरी जिले में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के दावे प्रशासन कर रहा, लेकिन कहीं न कहीं कुछ ऐसी खामियां रह जाती हैं। इस पर रोक लगाने में बाधक बनती हैं। जिले की नदियों व नाली में अवैध खनन लगातार जारी है। खनन माफिया लाभ कमा रहे है जबकि लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। अवैध खनन से केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं हो रहा। एनजीटी ने 10 जून से रेत उत्खनन पर 4 माह के लिए रोक लगा दी है। इस हिसाब से अब नदी से उत्खनन नहीं हो सकता है। निगरानी के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया, लेकिन धमतरी जिला इसका पालन नहीं हो रहा हैऔर माफिया बेधड़क रेत निकाल रहे हैं।कई खदानों में तो रातभर मशीन लगाकर खनन किया जा रहा है, ताकि बारिश के बाद नदियों में पानी आने से पहले अधिक रेत निकाल ली जाए। ये स्थिति ज्यादातर रेत घाटों पर है।
प्रदेश सरकार एक ओर रेत खदानों में अवैध खनन रोकने नियम अनुसार नीलामी के माध्यम से रेत खदानों का आवंटन कर रही है, तो दूसरी ओर दिन रात अवैध रूप से रेत खनन का कार्य हो रहा है।धमतरी क्षेत्र के खनन माफिया द्वारा जिले में प्रवेश कर अपनी राजनीतिक पकड़ का खूब फायदा उठा रहे हैं और गुडागर्दी से अवैध रूप से रेत की खुदाई करने पर उतारू हो गए हैं। इसके चलते शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। लेकिन राजनीतिक रसूख के लोगों की हिस्सेदारी के कारण कोई भी अधिकारी अवैध भंडारण क्षेत्र में जाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। बता दें जब नदी उफान भर होगी, तो रेत के यही अवैध भंडार लोगों को महंगी रेत उपलब्ध कराएंगे।हालांकि धमतरी जिले में रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने जिला प्रशासन व खनिज विभाग ने शायद अपने हथियार डाल चुके हैं… जिसका प्रमाण है कि लगातार जिले की विभिन्न स्वीकृत रेत खदानों के अलावा अवैध व प्रतिबंधात्मक जगहों से लगातार रेत की निकासी जारी है।रेत माफिया उत्खनन में इतने मशगूल हैं कि इन्हें खदानों के वैध अवैध से कोई सरोकार है और न ही श्मशान जैसी जगहों से रेत निकासी से परहेज़ है।ऐसा ही एक मामला सामने आई है कि ग्राम पंचायत मथुराडीह के आश्रित ग्राम तेन्दूकोंहा में रेत की निकासी बदस्तूर जारी है, जो श्मशान घाट का इलाका है… इतना ही नहीं रेत खनन के दौरान एक दफनाया हुआ शव (मानव कंकाल) भी बाहर आ गया… जिससे इलाके में सनसनी फ़ैल गई, साथ ही ग्रामीण भी सकते में आ गए। एक पत्रकार को दूसरे पत्रकार को आया कॉल मामले की खबर बनाने कुछ पत्रकार मौके पर पहुंच फोटो विजुअल बना कर लौटे ही थे कि एक अन्य स्थानीय पत्रकार का फोन इन पत्रकारों में से एक के पास पहुंचा। एक पत्रकार ने दूसरे पत्रकार को कॉल कर कहा तुम खदान कैसे गए तुम्हे पाता नही है क्या वो मेरे भाई का खदान है… इतना ही नहीं उस पत्रकार ने तेज़ स्वर में कहने लगा कि जब भी तुम्हें कोई दिक्कत होती है तो मैं तुम्हारी मदद करता हू… तुमको मालूम है कि खदान संचालक द्वारा मेरी स्वीकृति के बाद ही कुछ पत्रकारों को आर्थिक मदद भी पहुंचाई जाती है।आगे से अब तुम नही जाओगे वहां और सब डिलीट कर देना जो बनाए हो…..अब विडंबना है कि रेत माफियाओं की मदद में मीडिया के लोग ही खड़े होकर अपने ही मीडिया साथियों से बगावत में उतर आए हैं… ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की मीडिया किस ओर जा रही है? जब मीडिया से जुड़े लोग ही अवैध काम करने वालों की मदद को खड़े हो जाएं? वही फ़ोन कर मेरे भाई की खदान है कहने वाले उस पत्रकार के खिलाफ पूर्व में एक सरपंच ने शिकायत भी की थी, जहा पत्रकार द्वारा सरपंच को डरा धमकाकर लाखों रुपए मांग गया था।जिसकी शिकायत होने पर पत्रकार ने सरपंच से माफी मांगी थी।बहरहाल स्थानीय लोग भी अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जिले में अवैध रेत खनन व परिवहन में सख्त कार्यवाही की जायेगी… अब ये जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे अपनी जनता में अपना भरोसा कायम रखती है या फिर।
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