आजादी के 75 वर्ष बाद भी पितनी नदी पर नहीं बना पुल
भागवत दीवान
कोरबा (गंगा प्रकाश)। भले ही देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है, मगर इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि कमाऊ पूत कोरबा जिला का आदिवासी बाहुल्य ग्राम आज भी विकास से कोसों दूर है। बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए उफनती नदी को पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है। इसे प्रशासन की घोर लापरवाही ही कह सकते हैं कि इतनी नदी में आज तक एक पुल नहीं बन पाया। सडक़ निर्माण का काम भी अधूरा छोड़ दिया गया है।
जिला के विकासखंड पाली अन्तर्गत आदिवासी बाहुल्य ग्राम धौराभाठा और रामपुर के जनजाति छात्र छात्राओं को प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु में उफनती हुई पितनी नदी में अपनी जान को जोखिम में डालकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उतरदा तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय भदरापारा एवं उतरदा जाना पड़ता है । गांव में शासन प्रशासन द्वारा आधा अधूरा रोड बनाया गया। जिसमें पुल बनाना भूल ही गए। इन छात्र-छात्राओं के लिए आजादी का अमृत महोत्सव अभी कोसों दूर महसूस हो रहा है। कई छात्र-छात्राएं इन समस्याओं के कारण अपने नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते। जिससे वह अन्य छात्र छात्राओं से पिछड़ जाते हैं। संस्था के प्राचार्य जी पी लहरे ने बताया कि नदी में पानी अधिक होने पर इन छात्र छात्राओं को जान जोखिम में डालकर स्कूल नहीं आने की सलाह दी जाती है। छात्रा आकांक्षा सिदार कक्षा 12वीं ने बताया कि बरसात में हमें बहुत परेशानी होती है। चुंकि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उतरदा हमारे गांव से तीन किलो मीटर में है इसलिए प्राय: छात्रा छात्राएं यहां पढऩे जाते हैं। छात्रा अंजु जगत ने बताया कि नदी पार करते हमारे स्कूल के क्लर्क शीलू ध्रुव जिनका गांव धौरा भाठा है वेे हमारे साथ रहते हैं।
इसी तरह ग्राम झांझ के आश्रित मोहल्ला गाड़ाघाट धनवार पारा के बहुमूल्य आदिवासी बच्चों को भी पितनी नदी पार कर स्कूल जाना पड रहा है। इसके लिए क्षेत्र के सरपंच चंद्रिका प्रसाद उइके व वार्ड 11 के पंच परदेशी राम धनवार ने मुख्यमंत्री के नाम से लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया था कि जल्द ही नदी में पुलिया निर्माण कराया जाए जो कि आज तक नहीं बन पाया है ।बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी पार कर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं ।
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