जागरुक युवा के पहल रंग लाई आज ट्राईसाईकिल से चलते हुए दिव्यांग बालक में खुशियां देखते ही बनती है।

विकासखंड मैनपुर में ऐसे ही सैकड़ों बालक है जो प्रेस आईटी की मोहताज हैं 

मैनपुर(गंगा प्रकाश)। आदिवासी विकासखंड मैनपुर की वनांचल क्षेत्र की दिव्यांगों को खाने-पीने चलने फिरने बैठने उठने बातचीत करने में कितनी परेशानी होती है हम इसे अपने मुंह से बयां नहीं कर सकते उसके बावजूद भी अपने हौसलों को बुलंद रखकर दिव्यांग समाज में रहकर एक से बढ़कर एक कार्य करता है।

जिससे गाँव समाज उन लोगो के जज्बे को सलाम करते है। 

शासन प्रशासन इन लोगों के लिए बहुत सारी योजनाएं संचालित कर रही है लेकिन अंतिम पंक्ति में रहने वाले दिव्यांग भाइयों बहनों को योजनाओं का लाभ समय रहते नहीं मिल पाता जिसके कारण मजबूरी में असहनीय  दुखों से निपटना पड़ता है।

कोई जागरूक की पहल से ऐसे लोगों का काम बन जाने से दिव्यांग भाइयों बहनों को जो खुशी मिलती है उसको बयां करना भी मुश्किल है।

ऐसी ही दुख भरी कहानी हम बताने जा रहे हैं जो विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से 40 किमी दूर सुदूर वनांचल गांव भाँठापानी का है।

देवंशी नेताम पिता धनसाय  नेताम जाति गोड़ उम्र 15 वर्ष जिसे बचपना से ही दोनों पैर भयंकर रूप से कमजोर हो जाने के कारण चलने फिरने में परेशानी होने लगी थी। लेकिन जहां चाह है वहां राह है इस वाक्या को चरितार्थ करते हुए देवंशी नेताम एक बोरे में बैठकर एक हाथ से बोरे को खींचते हुए दूसरे हाथ के भरोसे अपने आसपास बड़ी मुश्किलों से चलता था। बोरे के सहारे ही चलते हुए गांव के ही प्राथमिक शाला में कक्षा चौथी तक के पढ़ाई भी की है। बचपना में ही माता पिता के गुजर जाने के कारण अपनी बहनों के साथ ही घर में दिव्यांग देवंशी रहता है।

दुख भरी जिंदगी को देखकर गांव के ही जागरूक युवा रामदास मरकाम,सरपंच प्रतिनिधि दीनाचंद मरकाम,सचिव पालिश राम नेताम के द्वारा इसकी सूचना पंचायत इस्पेक्टर राजकुमार ध्रुवा को दिया गया। जन हितेषी कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले पंचायत इसेक्टर के द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिव्यांग देवंशी को तत्काल ट्राईसाईकिल घर तक पहुंचा कर दिया गया। 

ट्राईसाईकिल मिलने की खुशी देवंशी को कितना हो रहा होगा बयां करना मुश्किल 

बोरी के सहारे घसीट घसीट कर  चलने वाले दिव्यांग को जब उसके घर में ट्राईसाईकिल पहुंचा कर दिया गया तो उसकी खुशी को बयां करना मुश्किल है।

 देखते ही उसमें बैठने की जिज्ञासा को भाँपकर मोहल्ले वासी उसे ट्राईसाईकिल में बिठा दिया गया बैठकर धीरे-धीरे ही सही लंबी दूरी छलांग लगाने की मंशा रखने वाला देवंशी को चलने फिरने उठने बैठने घूमने में जो तकलीफ होती थी अब उससे निजात मिल गया।

आर्थिक मदद की दिव्यांग को दरकार 

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आर्थिक मदद के लिए हाथ उठाने वाले बहुत सारे सामाजिक संगठन दानवीर हैं जिनके द्वारा इन्हें आर्थिक मदद मिल जाता है तो इनकी परिवारिक हालत भी सुधर जाएगी।

इनके इलाज के लिए भी बड़े हाथ

दिव्यांग देवंशी के पैरों में क्या परेशानी है कैसे ठीक हो सकता है इसके लिए भी शासन प्रशासन को पहल किया जाना चाहिए।


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