गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्त कार्यवाही के बाद कर्मचारी ज्यादा उग्र हो गए है। इससे सरकार एवं स्वास्थ्यकर्मियों के बीच घात-प्रतिघात दृष्टि गोचर होने लगा है। शासन के सख्त आदेश के बाद स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी छिन गई। शनिवार को 13 वें दिन भी वे हड़ताल पर डटे रहे और कलेक्टर द्वारा बर्खास्तगी के जारी आदेश ने आग में घी का काम किया। आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी देते हुए कर्मचारी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई स्थान नहीं है रोजी-रोटी छीन ली मगर जिन्दगी नहीं छीन सकते। जब तक जिंदगी है हक की लड़ाई लड़ेंगे। सरकार की इस दमनकारी नीति से झुकेंगे नहीं जिन्हें अपना कीमती वोट देकर चुना था उन्होंने ही हमें घाव दे दिया। स्वास्थ्य विभाग की हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग के काम प्रभावित रहे। हड़ताल के कारण टीकाकरण व्यवस्था लड़खड़ा गई है। वर्तमान में मिशन इन्द्रधनुष टीकाकरण अभियान, शिशु संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग संविदा कर्मचारियों के भरोसे है। सीएचसी व पीएचसी से प्रसव केस को जिला अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल रेफर करने की नौबत आ रही है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि हड़ताली स्वास्थ्य कर्मियों की बर्खास्तगी हिटलरशाही है। इसका संघ कटु शब्दों में निंदा करते हुए राज्य शासन से मांग करता है कि बर्खास्तगी आदेश तत्काल वापस लिया जाए और हमारी मांगो पर मानवीय दृष्टिकोण से निर्णय लिया जावे।
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