कांग्रेस नीत भूपेश सरकार में छत्तीसगढ़ के 230 किसानों ने की आत्महत्या, इनमें से 97 आदिवासी
रायपुर (गंगा प्रकाश)। देश में धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की राजनीति भी धान के ईद-गिर्द ही घूमती हुई नजर आती हैं। यहीं वजह है कि राज्य बनने के बाद से अब तक जितने भी चुनाव हुए सभी में धान और किसान, प्रदेश की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहे हैं। पिछले चुनावों के आंकड़े भी बताते है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता का रास्ता धान से ही खुलता है। डॉ.रमन सिंह हो या फिर भूपेश बघेल दोनों ने ही किसान और धान के बोनस पर ही सरकार बनाई है।
राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी ने अपने कार्यकाल में धान खरीदी का फैसला प्रमुखता से लिया, लेकिन जब 2003 में प्रदेश में पहला विधानसभा चुनाव हुआ तो भाजपा ने सत्ता पाने के लिए धान पर बोनस देने का वादा किया और कांग्रेस ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ है कि भाजपा ने बहुमत के साथ सरकार बनाई। किसानों को केंद्र के समर्थन मूल्य के अलावा प्रति क्विंटल 270 रुपए का बोनस भी दिया। यहीं से प्रदेश में धान की सियासत शुरू हुई। 2008 में भाजपा ने इसे 300 रुपए बोनस करने का वादा किया। परिणाम यह रहा है कि भाजपा 50 सीटों के बहुमत के साथ फिर से सत्ता में लौट आई। पार्टी ने अपने दोनों कार्यकाल में चुनावी साल में अपना वादा पूरा किया। कैसे धान बना भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह…
– 2013 के घोषणा पत्र में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में 2400 रुपए क्विंटल धान खरीदने का वादा किया था। जबकि 2000 रुपए की घोषणा कांग्रेस ने की थी। लेकिन भाजपा ने धान के दम पर फिर सरकार बना ली।
– 2018 के चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में 2500 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी और कर्जमाफी का वादा किया था। भाजपा ने 24 सौ रुपए की बजाए अधिकतम 1740 रुपए ही दिए। यहीं नहीं चुनावों में भाजपा ने धान की एमएसपी पर कोई घोषणा नहीं की। यही वजह भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बनी।
– 2023 के चुनावों को देखते हुए कांग्रेस वादा कर रही है कि अगर फिर सरकार बनी तो धान की खरीदी 3600 रुपए तक पहुंच सकती है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सामान्य ग्रेड के धान का एमएसपी 2,183 रुपए प्रति क्विंटल है। जबकि किसान न्याय योजना की इनपुट सब्सिडी के साथ 2640 और 2660 रुपए प्रति क्विंटल दिया गया था।
– भाजपा के 15 वर्षों के राज में पूरी सियासत चावल पर ही केंद्रीत रही। 1 रुपए किलों चावल देकर रमन सिंह पूरे प्रदेश में चाउर वाले `बाबा` बन गए। बाबा की छवि को तोड़ने के लिए `कका` यानी सीएम भूपेश बघेल ने धान से धनवान हुए किसान का नया नारा दिया। सीएम बघेल ने धान का समर्थन मूल्य 2,500 रुपये करने का वादा कर पिछला विधानसभा चुनाव जीता थे।
– छत्तीसगढ़ की 80 प्रतिशत आबादी सीधे खेती से जुड़ी है। 2018 में 2500 रुपए समर्थन मूल्य से सत्ता में आई पार्टी 2023 में 2650 रुपए के समर्थन मूल्य तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस सरकार चार साल में 85 हजार करोड़ किसानों को दे चुकी है।
प्रदेश की जीडीपी में 22 प्रतिशत हिस्सा धान का
प्रदेश की लगभग 44 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि में धान ही मुख्य फसल है। यहां की लगभग 80 फीसदी आबादी कृषि से ही जुड़ी हुई है। जीएसडीपी में करीब 22 प्रतिशत से अधिक योगदान है। कांग्रेस सरकार ने इस साल किसानों से प्रति एकड़ 20 क्विंटल के साथ ही कुल 125 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। हर साल किसानों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष2022- 23 राज्य में कुल 2.30 लाख पंजीकृत किसान है। प्रदेश के 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 47 में किसान मतदाता प्रभावी भूमिका में हैैं। पिछले विधानसभा चुनाव में किसानों के प्रभाव वाली ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की 30 से 50 हजार वोटों से जीत हुई थी। लेकिन किसान और आदिवासियों की हितैषी होने का दावा करने वाली भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता ने दावा किया था कि कांग्रेस सरकार में राज्य के 230 किसानों आत्महत्या की है।इनमें से 97 आदिवासी किसान हैं।किसान आत्महत्या के आकड़ों पर राज्य में सियासी बवाल मच गया है।
भाजपा ने प्रदेश में 230 किसानों के मौत का आकड़ा पेश कर सरकार को किसानों का शोषण करने वाला बताया है।धान और किसान छत्तीसगढ़ में हमेशा से राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है।कहते हैं कि धान और किसान के दम पर सरकार बनती है और चले जाती है।किसानों के नाम पर सियासत का ताजा मामला आत्महत्या के मामलों का है। इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है। गोरतलब हो कि 1 जनवरी 2020 से 1 नवंबर 2021 तक राज्यभर में कुल 230 किसानों में आत्महत्या की, जिनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के 97 और अनुसूचि जाति वर्ग के 42 किसान शामिल हैं। बात प्रतिशत की करें 230 में से 60 फीसदी एसटी और एसटी वर्ग के किसानों ने आत्महत्या की है।भाजपा ने सरकार पर किसानों के शोषण का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि यह सरकार किसानों की हितौषी बनती है। किसानों के बेहतरी के लिए कार्य करने की दलील देती है, मगर आकड़े बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में किसानों का इतना शोषण हो रहा है और किसान आत्महत्या कर रहे हैं। वन्ही दूसरी ओर कांग्रेस का दावा है कि उन्हें रमन राज के 15 सालों के किसान आत्महत्या के आकड़े पेश करना चाहिए। बहरहाल धान का कटोरा कहे जाने वाले कृषि प्रधान राज्य छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या के आकड़ों को लेकर राजनीति तो होगी ही।अब ऐसे में किसके आकड़े सही और किसके दावे यह तो वक्त तय करेगा।फिलहाल तो यह हैं कि किसान आत्महत्या के आकड़ों को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ के किसानों के आत्महत्या के मामले में आई है कमी या फिर हुई है बढ़ोतरी
छत्तीसगढ़ में किसानों की क्या स्थिति है, पहले और अब में किसानों के जीवन में कितना बदलाव आया है। राज्य सरकार द्वारा फसल की पैदावार से लेकर उसके लिए मिलने वाला मूल्य किसानों की जीवन में खुशहाली ला पाया है या नहीं?विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कितनी रही सफल?क्या प्रदेश में किसान आत्महत्या के मामलों में कमी आई है या फिर उसमें बढ़ोतरी हुई है? इन सारे सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं छत्तीसगढ़ में किसानों के आत्महत्या के मामले में क्या है आइए पहले एक नजर डालते हैं भाजपा शासनकाल और कांग्रेस सरकार में कितने किसानों ने आत्महत्या की…
कांग्रेस शासनकाल में किसान आत्महत्या के आंकड़े
छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2022 के बीच 431 किसानों ने आत्महत्या की है। किसान आत्महत्या के मामलों में से तीन मामलों में कृषिगत कारणों से आत्महत्या की गई है।वित्तीय वर्ष 2019-2020 में 166 किसानों ने आत्महत्या की है।वित्तीय वर्ष 2020-21 में 186 किसानों ने और चालू वित्त वर्ष में 31 जनवरी 2022 तक 79 किसानों ने आत्महत्या की है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार छत्तीसगढ़ वर्ष 2019 और 2020 में किसानों की आत्महत्या के मामले में देश में छठवें स्थान पर था।
भाजपा शासनकाल में किसान आत्महत्या के आंकड़े
नेशनल क्राइम रिसर्च ब्यूरो के आंकड़ों को देखें तो छत्तीसगढ़ में 2006 से 2010 तक हर साल किसानों की आत्महत्या के औसतन 1555 मामले दर्ज किये गये थे हर दिन राज्य में औसतन 4 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।2009 में तो यह आंकड़ा लगभग 5 पर जा पहुंचा. इसके बाद इन आंकड़ों को छुपाने की कोशिश शुरू की गई हैं।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्टों के अनुसार छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े अधिक रहे हैं।भाजपा शासनकाल में साल 2006 से 2010 के बीच हर साल किसान आत्महत्या के औसतन 1555 मामले दर्ज हुए हैं। यानी, हर दिन औसतन चार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की,उस दौरान जब लगातार बढ़ते किसान आत्महत्या के मामलों को लेकर विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार को घेरना शुरू किया तो आने वाले सालों में किसान आत्महत्या का मामला अचानक अन्य पर पहुंच गया। साल 2011 में एनसीआरबी की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या का मामला शून्य था।साल 2012 में केवल चार किसानों ने आत्महत्या की।वहीं, 2013 में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा फिर से शून्य पर जा पहुंचा,किसानों की खुदकुशी का सिलसिला पिछली सरकार के शासनकाल की तरह कांग्रेस सरकार में भी जारी रहा,हालांकि, सिर्फ़ आंकड़ों के आधार पर देखने पर ये पहले की तुलना में कम दिखता है।यहां तक कि राज्य सरकार के कृषि विभाग के आंकड़ों और एनसीआरबी, जिसे राज्य सरकार ही आंकड़े उपलब्ध कराती है, आंकड़ों में भी भारी अंतर है।कांग्रेस की मानें तो भाजपा द्वारा किसान को 2013 के चुनाव घोषणा पत्र में धान का समर्थन मूल्य 2100 रू और 300 रू. बोनस प्रति क्विंटल देने का वादा जुमला साबित भाजपा की वादाखिलाफी के कारण कर्ज से लदकर प्रतिदिन औसत तीन किसान आत्महत्या करने मजबूर है. 365×3=1095 किसान, 15 साल में 15000 किसानों ने आत्महत्या किया।आज छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या का दौर समाप्त हो गया।भाजपा खुद दावा कर रही चार साल में 431 किसान आत्महत्या किये अर्थात 108 किसान प्रतिवर्ष दस गुना की कमी आई है।कांग्रेस के अनुसार कांग्रेस सरकार में आते ही 2 घंटे के भीतर 1,78,200 किसानों का 9270 हजार करोड़ का कर्जा माफ,किसानों का सिंचाई कर माफ. 2500 में धान खरीदी की जा रही, राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि को मिलाकर वादे से अधिक 2640 और 2660 रू. प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य. 6.5 लाख किसानों को 10400 करोड़ कृषि पंपों के लिये बिजली बिल पर राहत. 15 लाख किसानों के 325 करोड़ का सिंचाई कर माफ. 2017-18 में अधिक किसान 15.77 लाख, अधिक धान 56.89 लाख मी. टन, पंजीकृत रकबा 20 लाख हेक्टेयर. 2022-23 अधिक किसान 25.93 लाख, अधिक धान 98 लाख मी. टन, पंजीकृत रकबा 31.17 लाख हेक्टेयर।
छत्तीसगढ़ में किसानों की स्थिति को लेकर कांग्रेस का कहना है कि “मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरी है। किसान समृद्ध हुए हैं।किसानों को उनकी उपज का सही कीमत मिल रहा है।किसानों को कर्ज मुक्त किया गया है।उन्हें स्थाई पंप कनेक्शन दिया गया है।धान उत्पादक किसानों को 2500 रु.प्रति क्विंटल जो वादा कांग्रेस के द्वारा किया गया था।उसे भूपेश बघेल सरकार ने पूरा किया है. इसके अलावा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से कोदो कुटकी दलहन तिलहन गन्ना और सब्जी लगाने वाले किसानों को भी 10000रु .सब्सिडी दिया जा रहा है। कांग्रेस का कहना हैं कि “पूर्व की रमन सरकार के दौरान किसानों की आत्महत्या की घटनाएं आम हो गई थी।15 साल के भाजपा शासनकाल में लगभग 15000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या क, प्रतिवर्ष लगभग 15 किसान आत्महत्या की घटनाएं होती थी। जिनका मूल कारण था।उनकी उपज का सही मूल्य ना मिलना, समय पर पानी का नहीं मिलना, फसल खरीदी की अच्छी व्यवस्था नहीं होना और रमन सरकार की वादाखिलाफी था,भूपेश सरकार बनने के बाद कृषि कार्य कारण किसी भी किसान ने आत्महत्या नहीं की और आज छत्तीसगढ़ का किसान खुशहाल है।वहीं दुसरी ओर भाजपा का कहना है कि “कांग्रेस सरकार किसानों के हित में कोई काम नहीं कर रही है।आज लगातार किसान ठगे जा रहे हैं। अगर आप एनसीआरबी का रिकॉर्ड देखते हैं तो पिछले 4 वर्षों में सबसे ज्यादा आत्महत्या के प्रकरण आए है। प्रत्येक वर्ष करीब 2000 किसान आत्महत्या कर रहे हैं।कर्ज फसल का खराब होना खराब बीज की वजह से किसान परेशान है और ऐसे कई घटनाक्रम है जिस वजह से आज उन्हें आत्महत्या करनी पड़ रही है। यह हम नहीं बल्कि एनसीआरबी का डाटा कह रहा है।किसानों के उत्थान के लिए यह सरकार कोई काम नहीं कर रही है। यह अपने आप में ढिंढोरा पीटते हैं कि हम 2500रु .में धान खरीदी कर रहे हैं, जबकि 2040रु .और 2060रु .केंद्र के मोदी सरकार किसानों को धान खरीदी के बाद जस्ट उसके खाते में सीधा दे रही है। यह अंतर की राशि भी देंगे बोलते हैं, उसको भी साल भर लगा कर देते है।आज प्रदेश का किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
भूपेश बघेल ने फिर की किसानों के कर्ज माफ की घोषणा भाजपा खोज रही हैं तोड़?
बताते चले कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार लौटने पर किसानों का फिर कर्जा माफ करने का बड़ा दांव चल दिया है। भूपेश का छोड़ा गया ये मिसाइल इतना खतरनाक है कि भाजपा को उसका काट ढूंढ पाना मुश्किल प्रतीत हो रहा होगा। बीजेपी के सामने अब मजबूरी आ गई है कि उसे मुकाबले में अगर टिके रहना है तो जाहिर तौर पर इससे कोई बड़ा गोला दागना पड़ेगा। बता दें, कर्ज माफी से किसानों की जेब में करीब 10 हजार करोड़ रुपए जाएगा। इसे ऐसे समझते हैं। 2018 में सरकार बनने पर 19.75 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया था। इस पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च हुआ था। इस बार 24.87 लाख किसान रजिस्टर्ड हैं। इनमें से मोटे अनुमान के अनुसार करीब 70 फीसदी किसानों ने 10 हजार से लेकर तीन लाख तक का लोन लिया है। से संख्या करीब 17 लाख के करीब जा रही है। अफसरों का कहना है, इस बार चूकि राजीव न्याय योजना के तहत लगातार उनके खाते में पैसा जाता रहा, इसलिए 2018 की तुलना में इस बार कम किसानों ने लोन लिया है। इसीलिए संख्या में करीब दो लाख की कमी आई है। याने इस बार भी कर्ज माफी का एमाउंट करीब 10 हजार करोड़ ही रहेगा। बहरहाल, कर्ज माफी की घोषणा के बाद लोन नहीं लेने वाले किसान अब पछता रहे हैं…काश! हम भी कर्ज ले लिए होते।जाहिर है, सीएम भूपेश बघेल की कर्ज माफी की घोषणा ने भाजपा के हथियार कुंद तो किए ही, चुनाव की दिशा और दशा बदल दिया है। भाजपा अभी तक ईडी, आईटी, भ्रष्टाचार से लेकर हिन्दुत्व कार्ड के जरिये हवा का रुख अपने पक्ष मे ंकरने की कोशिश कर रही थी। बिरनपुर कांड के पीड़ित पिता को साजा से टिकिट दिया गया तो हिन्दुत्व को लेकर मुखर विजय शर्मा को कवर्धा से उतारा गया। मगर छत्तीसगढ़ में अब ये स्थापित हो गया है कि धान और किसान ही इस चुनाव के मुद्दे होंगे और आगे भी इसी पर चुनाव लड़े जाएंगे। 2018 का विधानसभा चुनाव भी इसी इश्यू पड़ा लड़ा गया। तब कांग्रेस ने बोनस के साथ 25 सौ रुपए धान खरीदने का वादा किया और यही टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना और इसका नतीजा हुआ कि बीजेपी 15 सीटों पर सिमट गई। हालांकि, बीजेपी की लोकल बॉडी ने धान पर लचीला रुख अपनाने के लिए दिल्ली के नेताओं से आग्रह किया था। मगर बात बनी नहीं। चूकि इस बार भी धान और किसान चुनाव के केंद्र बिन्दु बनते जा रहे हैं तो लगता है भाजपा भी इस बार मुठ्ठी खोलेगी। पार्टी ने अभी एक वीडियो भी जारी किया है। इसमें बताया गया है कि कांग्रेस का बम फुस्स हो गया…उनका राकेट आने वाला है। देखने की उत्सुकता होगी, बीजेपी का राकेट कांग्रेस के मिसाइल पर क्या असर डालता है।
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