उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित बाबा केदारनाथ को लेकर आज भी एक रहस्य बना हुआ है. कहते हैं जब केदारनाथ धाम के पट बंद होते हैं तब एक दीपक वहां जलाया जाता है, छह माह मंदिर और उसके आसपास कोई नहीं रहता है लेकिन आश्चर्य की बा‍त कि 6 माह तक दीपक भी जलता रहता है. कपाट खुलने पर वैसा ही दृश्य नजर आता है जैसा बंद करने पर था.

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद से विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता ये 09 श्रद्धालु जोश खरोस के साथ बाबा केदारनाथ की यात्रा पर निकले आख़िर वर्षों से देखे सपने को सकार करते दिख रहे है ये युवा, इनमें कुछ श्रद्धालु पिछले वर्ष भी बाबा केदार नाथ के दर्शन कर आये थे वही कुछ कोरोना काल के समय नहीं जा पाये थे वे सब कब ये कोरोना का मनहूस साया ख़त्म होगा और कब हम बाबा के दर्शन कर पाएँगे आख़िरकार वो समय आ ही गया जब गरियाबंद के ये 09 युवा अपना सपना पूरा करने उतराखंड के लिए कुच कर गए, इस जत्था में नगर से परस देवांगन, प्रकाश निर्मलकर , मोहित राम ठाकुर, बालचंद साहू , डॉ राजीव निर्मलकर, दिलीप यादव ,योगेश्वर निषाद ,शुभम वर्मा ,पवन चौरसिया शामिल है इन सभी को जिला सामाजिक समरसता प्रमुख  केशर कुमार निर्मलकर ने मंगल तिलक लगाकर विदा किया था इन सबने बड़े तैयारी के साथ केदारनाथ की यात्रा प्रारंभ की और सकुशल दर्शन करने के बाद उन्होंने यात्रा वृतांत सुनाया ,

25 अप्रैल 2023 को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर कपाट खुलते ही केदारनाथ में बना रिकॉर्ड, जानिए इस बार केदारपुरी में भक्तों के लिए क्या है खास

श्री केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल 2023 को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर कपाट खुलते ही इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु दर्शनों को पहुंचे। कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रात:चार बजे से शुरू हो गयी थी दक्षिण द्वार पर केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ के पुजारी केदार लिंग वेदपाठियों ने कपाट खुलने की रस्मों को विधि-विधान से निभाया।

केदारनाथ के कपाट खुलते ही पहले ही दिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूट गया है। पहले ही दिन केदारनाथ में हज़ारो श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे पहले 2019 में 9 हजार भक्तों ने दर्शन किए थे। केदारपुरी में भक्तों की आस्था पहले से ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा के दर्शन के साथ ही ध्यान गुफा, शंकराचार्य की समाधि स्थल भी काफी लोकप्रिय होती जा रही है।

विश्व हिंदू परिषद के पूर्व ज़िलाध्यक्ष ने परस देवांगन ने बतलाया

केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल 2023 को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर खुले। मंगलवार से चारधाम यात्रा अगले 6 महीने तक चलेगी। सुखद नजारा था हर तरफ भोले के जयकारे जयघोष सुनाई पड़ रही थी कही पांव रखने भी जगह न​जर नहीं आई , भक्तों के जय भोले से पूरी केदारपूरी गूंज उठी है। हम सब ने सोन पराग से रात्री 1:30 को यात्रा की शुरुआत की और प्रातः 5:00 बजे पहुँचे हम सब बाबा के दर्शन कर महाआरती में शामिल हुए विश्व शांति के साथ साथ समाज में एकता समरसता की कामना को लेकर आज से देवभूमि उत्तराखंड की चार धाम की यात्रा में निकले है ये जत्था यमनोत्री ,गंगोत्री के साथ साथ केदार नाथ व भगवान बद्री विशाल का दर्शन कर सभी की कल्याण समाज में एकता समरसता की मंगल कामना किए । जिस तरह की उम्मीद लगाई जा रही थी, उसी अनुरूप भक्तों की संख्या धामों में पहुंच रही है।25अप्रेल से गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया।  बाबा केदारनाथ के दर्शन को देखने को मिली। जहां पहले ही दिन हज़ारो  श्रद्धालुओ ने  दर्शन किया ,केदारनाथ धाम में फिलहाल 12 हजार की एक दिन में लिमिट करने की बात की जा रही है, हालांकि धाम में 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की ही व्यवस्था एक दिन में हो सकती है। हज़ारो की संख्या में लग़तार भक्त पहुँच रहे है जिसके चलते बद्री-केदार मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाएं में जुट गए। जिससे आने वाले समय में धाम में यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

उल्लेखनीय है कि, देश के प्रमुख धामों में से बद्रीनाथ धाम के साथ ही केदारनाथ का नाम भी जुड़ा हुआ है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ ही एकमात्र जागृत महादेव माना जाता है।हिमालय की चोटियों के बीच स्थित भोलेनाथ के इस पावन धाम का सनातन संस्कृति में बहुत महत्व है, और यह मंदिर जागृत महादेव भी कहलाता है। केदारनाथ समुद्र तल से 3,553 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर पहुंचने का रास्ता भी काफी दुर्गम है।

केदारनाथ की धार्मिक मान्यता

केदारनाथ मन्दिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। जो कि बारह ज्योतिर्लिंग और पंच केदार में से भी एक है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों के पौत्र महाराजा जन्मेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे केदार में जा बसे। पांडव भी उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले।भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया।

अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं।

सरकार की ओर से सभी यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य संबंधी पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. यात्री यात्रा प्रारंभ करने या यात्रा के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर तत्काल नजदीकी हेल्थ सेंटर पर जाकर चिकित्सक से परामर्श भी ले सकते हैं. राज्य सरकार बेहतर और सुविधा युक्त यात्रा के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है. यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित रूप से उच्च स्तर से मॉनिटरिंग की जा रही है.


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