जीएसटी सरलीकरण से व्यापार एवं उद्योग जगत को लाभ होगा – अमर पारवानी

रायपुर (गंगा प्रकाश):– कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर पारवानी,प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी,कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव,परमानन्द जैन,महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह ने बताया कि कैट सी.जी.चेप्टर ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को जीएसटी काउंसिल की आगामी 07 अक्टूबर 2023 को होने जा रहे 52वीं बैठक हेतु जीएसटी के सरलीकरण एवं विसंगतियो को दूर करने हेतु सुझाव दिए।कैट के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष  जितेन्द्र दोशी ने वित्तमंत्री सीतारमण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि विगत दिनों कैट सी.जी. चेप्टर एवं व्यापारिक संगठनों की एक मिटिंग हुई थी, जिसमे जीएसटी सरलीकरण एवं विसंगतियो को दूर करने हेतु औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा सुझाव दिए गए थे।  प्राप्त सुझावों का बिन्दुवार विश्लेषण करते हुए पत्र में इन सुझावों को बैठक में रखे जाने हेतु वित्तमंत्री से अनुशंसा किए जाने का आग्रह किया गया है। कैट सी.जी. चैप्टर ने अपने सुझाव दिये जो निम्नानुसार हैः- इनपुट टैक्स क्रेडिट जीएसटीआर – 2B के आधार मान्य होने बाबत । जीएसटी प्रणाली में ब्याज की गणना के प्रावधान को बदलने बाबत । RCM संबधित प्रावधानो से ऐसे व्यापारियों को छुट प्रदान की जानी चाहिए जो भुगतान किये गये त्ब्ड का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने हेतु पात्र हो।  नियम 86 बी-Restriction of ITC to  99%  निरस्त किया जाना चाहिए। जीएसटी पंजीकरण निलंबन/निरस्तीकरण से संबधित नियम 21 के प्रावधानों को वापस लिया जाना चाहिए। ई-इनवॉइसिंग को 1 अगस्त 2023 से रु. 5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यापारियां पर लागु किया गया है। इस प्रावधानों को  वापस लिया जाना चाहिए। ई-वे बिल की वैधता अवधि में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है उसे वापस लेना चाहिए E-Invoicing  की स्थिति में खरीददार को इनपुट अनिवार्य रूप से मिलना चाहिए। छुटे हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने एवं वार्षिक विवरण पत्र में संशोधन किए जाने हेतु अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।One Time Amnesty स्कीम लानी चाहिए। जीएसटी का रजिस्ट्रेशन संरेडर करने के प्रावधानों का सरलीकरण किया जाना चाहिए। माल के परिवहन एवं ई-वे बिल सम्बंधित आ रही विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। मासिक त्रैमासिक एवं वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत करने में आ रही विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।  IGST के भुगतान मे सीजीएसटी इनपुट के पहले SGST इनपुट के उपयोग का विकल्प दिया जाना चाहिए आंशिक रूप से /बिना नकद भुगतान के फॉर्म जीएसटीआर 3बी जमा करने का विकल्प दिया जाना चाहिए। जीएसटी में विभिन्न वस्तुओं पर जीएसटी दर को युक्तियुक्त किया जाना चाहिए।


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