रायपुर (गंगा प्रकाश):- कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर पारवानी,प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव परमानन्द जैन महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह ने बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अपनी बजट पूर्व इच्छा सूची में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से जोरदार आग्रह किया है की जीएसटी कराधान प्रणाली की समीक्षा,खुदरा व्यापार से संबंधित सभी अधिनियमों और नियमों की समीक्षा,घरेलू व्यापार के लिए एक राष्ट्र-एक लाइसेंस नीति,व्यापारियों के लिए प्रभावी पेंशन योजना,उत्तर प्रदेश राज्य में लागू योजना के अनुसार व्यापारियों के लिए बीमा योजना,छोटे व्यवसायों के लिए अलग क्रेडिट रेटिंग मानदंड,बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा व्यापारियों को वित्त की आसान पहुंच,व्यवसायों में आपसी भुगतान तथा आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक का अनादर जैसे विवादों के लिए  फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन और देश मे स्पेशल ट्रेड जोन के निर्माण की मांग शामिल है कैट ने आंतरिक और विदेशी व्यापार दोनों को बढ़ावा देने के लिए देश और दुनिया भर में व्यापार मेलों और भारतीय उत्पादों की प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए भी एक नीति बनाने का भी आग्रह किया है कैट ने वित्त मंत्री को व्यापारिक समुदाय के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने और प्रोत्साहित करने के लिए अलग अलग किस्म के इंसेंटिव की घोषणा करने का भी अनुरोध किया कैट ने ई-कॉमर्स नियमों को लागू करने,ई-कॉमर्स नीति, ई-कॉमर्स नियामक प्राधिकरण के गठन,खुदरा व्यापार के लिए राष्ट्रीय व्यापार नीति और केंद्र और राज्यों दोनों में आंतरिक व्यापार के लिए एक अलग मंत्रालय की भी मांग की है कैट के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर पारवानी और प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने बताया कि कैट ने “बजट इच्छा सूची“ जारी करते हुए कहा कि जीएसटी सबसे जटिल कराधान प्रणाली है और इस प्रणाली को सरल बनाने के लिए इसकी पूर्ण  समीक्षा की आवश्यकता है ताकि जिसे व्यापारियों द्वारा सरलता में अनुपालित किया जा सके तथा  सरकार को अधिक राजस्व की प्राप्ति हो सके देश का खुदरा व्यापार बड़ी संख्या में अधिनियमों और नियमों से भरा हुआ है और उनमें से कई कुछ दशक पुराने हैं और वर्तमान परिदृश्य में अपना महत्व खो चुके हैं और इसलिए ऐसे सभी अधिनियमों और नियमों की समीक्षा की तत्काल आवश्यकता है ऐसे नियम जो प्रासंगिकता खो चुके हैं उन्हें अवश्य निरस्त किया जाना चाहिए पारवानी और दोशी ने आगे कहा कि भारत में व्यापारियों को व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए ढेर सारे लाइसेंस प्राप्त करने पड़ते हैं और इसलिए वन नेशन-वन टैक्स की तर्ज पर,सरकार की एक राष्ट्रीय-एक लाइसेंस नीति होनी चाहिए ताकि व्यापार में आसानी हो। पीएम मोदी द्वारा इसकी काफी वकालत की गई है दोनों व्यापारी नेताओं ने यह भी मांग की कि विशेष आर्थिक क्षेत्र की तरह,सरकार को सरकारी मंजूरी प्राप्त करने के लिए एक खिड़की की सुविधा के साथ गांवों के बाहरी इलाकों में विशेष व्यापार क्षेत्र स्थापित करना चाहिए इस तरह के कदम से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार के बड़े अवसर भी उपलब्ध होंगे उन्होंने यह भी कहा कि चेकों का अनादरण बहुत बढ़ गया है और चेकों की कोई पवित्रता नहीं है वहीं व्यापारियों के बीच अक्सर भुगतान संबंधी विवाद होते हैं जो अदालतों से समाधान के लिए लंबा समय लेते हैं। इसलिए इस तरह के विवादों का त्वरित निवारण सुनिश्चित करने के लिए,फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की बहुत जरूरत है पारवानी और दोशी ने डिजिटल भुगतान के अधिक उपयोग के लिए व्यापारियों को कर भुगतान में छूट के संदर्भ में प्रोत्साहन योजनाओं की भी मांग की।

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