गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल के ममता बनर्जी सरकार द्वारा गैर संवैधानिक रूप से ओबीसी वर्ग में जोड़े गए मुस्लिम जातियों को अवैध करार देते हुए वर्ष 2011 के बाद के बने लाखों ओबीसी जाति प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया। जैसे ही कोलकाता हाईकोर्ट का यह निर्णय आया देश की राजनीति उबलने लगी और भाजपा के अधिकांश नेता इसे ममता बनर्जी सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर कोर्ट का प्रहार बताने लगे। राजिम विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक रोहित साहू ने भी इसे ओबीसी वर्ग के लिए न्याय बताते हुए ममता बनर्जी द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय की आलोचना की और कोर्ट के निर्णय को तुष्टिकरण की नीति पर जोरदार प्रहार बताया। कोर्ट ने साफ कहा है कि बंगाल सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा को दरकिनार किया और आरक्षण के लिए अनुशंसित 42 जातियों में से 41 जाति मुस्लिम धर्म के जोड़ दिए जो मूल ओबीसी वर्ग के लिए कुठाराघात है और आरक्षण देने की कवायद सिर्फ एक धर्म विशेष को लाभान्वित करने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी तुष्टिकरण कि नहीं बल्कि संतुष्टिकरण की नीति पर कार्य करती है जिसका ध्येय वाक्य सबका साथ, सबका विकास है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बंगाल में मुसलमानों को 2010 के बाद जारी किए गए ओबीसी आरक्षण और ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करने के हालिया फैसले पर कहा कि ममता बनर्जी की सरकार गैर संवैधानिक तरीके से तुष्टिकरण को आगे बढ़ा रही थी जो कि मुस्लिम एजेंडे को आगे बढ़ाने जैसा था। कोलकाता हाईकोर्ट ने ओबीसी कोटा उपश्रेणी में मुस्लिम आरक्षण को रद्द किया है और 2011 से 2024 तक पश्चिम बंगाल में मुसलमानों को जारी किए गए ओबीसी प्रमाणपत्र भी रद्द कर दिए हैं। पीएम मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा उठाया था कि कैसे ममता बनर्जी, राहुल गांधी और प्ण्छण्क्ण्प्ण् गठबंधन के अन्य नेता संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। संविधान में साफ लिखा है कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा। विधायक रोहित साहू ने बात बात पर संविधान की दुहाई देने वाले देश के विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब बात मुस्लिमों की आती है तब तुष्टिकरण में दुबे देश के विपक्षी दलों को सांप सूंघ जाता है। संविधान के विपरीत कार्य करने के बाद भी देश का विपक्ष उसे अपनी मौन स्वीकृति देता है। देश के संविधान की रक्षक भारतीय जनता पार्टी है जिसके साथ आज पूरा देश खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट के निर्णय को नहीं मानने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज होना चाहिए और अतिशीघ्र इस सरकार को भंग कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करनी चाहिए।
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