CGNEWS:छुरा तहसील में अवैध ईंट भट्ठों का धंधा जोरों पर: ट्रैक्टरों से ढुलाई, जंगलों की कटाई, और अब प्रशासन हरकत में!

 

गरियाबंद/छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के छुरा तहसील अंतर्गत ग्राम खरखरा, पंडरीपानी, नरतोरा, करकरा, रानीपरतेवा और मेडली अन्य स्थानों पर अवैध ईंट भट्ठों का संचालन धड़ल्ले से जारी है। इन इलाकों में प्रतिदिन ट्रैक्टरों के जरिए ईंटों की ढुलाई हो रही है, लेकिन अब तक इस पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं हुई थी।

इन अवैध ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के लिए जंगलों से भारी मात्रा में लकड़ी काटी जा रही है। जब मीडिया कर्मी ने वन विभाग को सूचना दी तो विभाग ने इसे “राजस्व की लकड़ी” बताते हुए मामला राजस्व विभाग के पाले में डाल दिया। ग्रामीणों ने तहसीलदार को शिकायत दी, लेकिन हफ्तों बीतने के बाद भी कार्रवाई नदारद रही।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया — एसडीएम नेहा भेड़िया ने दिए जांच के निर्देश

इस पूरे मामले पर जब एसडीएम छुरा नेहा भेड़िया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा:

“अब तक मुझे अवैध ईंट भट्ठों के संचालन के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यह जानकारी मुझे आपके माध्यम से प्राप्त हुई है। मैं तहसीलदार को तत्काल जांच करने के निर्देश दूंगी।”

एसडीएम का यह बयान प्रशासन की ओर से पहली प्रतिक्रिया है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब अवैध गतिविधियाँ इतने खुलेआम चल रही थीं तो अब तक कोई स्वत: संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?

मुख्य सड़कों पर ट्रैक्टरों की धड़ल्ले से आवाजाही

छुरा क्षेत्र के ग्रामीण मार्गों से लेकर मुख्य सड़कों तक ट्रैक्टरों में रोज़ाना ईंटों की ढुलाई हो रही है। प्रशासनिक निगरानी की अनदेखी का आलम यह है कि अगर किसी एक दिन इन ट्रैक्टरों की जांच की जाए तो कई अवैध भट्ठों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

राजनीतिक संरक्षण या प्रशासनिक उदासीनता?

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ ईंट भट्ठा संचालकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से विभागीय अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं।

गंगा प्रकाश टीम के द्वारा इस पूरे मामले की कई बार रिपोर्टिंग की गई, जिसके बाद अब जाकर प्रशासन हरकत में आया है।

अब जनता की निगाहें प्रशासन पर:

  • क्या तहसीलदार और राजस्व विभाग सक्रिय होंगे?
  • क्या ईंट भट्ठा संचालकों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
  • क्या जंगलों की अवैध कटाई पर रोक लगेगी?

यह सिर्फ एक खबर नहीं, छुरा की ज़मीन से उठी जनता की आवाज़ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आवाज़ को कितनी गंभीरता से लेता है।

निष्कर्ष:

छुरा तहसील क्षेत्र में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन सिर्फ एक अवैध व्यापार नहीं, बल्कि पर्यावरणीय क्षति, न्यायिक चूक, और प्रशासनिक सुस्ती का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह है कि एसडीएम नेहा भेड़िया के निर्देश के बाद तहसील प्रशासन कितनी तेजी से इस पर कार्यवाही करता है।


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