गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। ग़रीबों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ अब्दुल रज़्ज़ाक मेमन की आज पाँचवी पुण्यतिथि पर नगर के तिरंगा चौक पर लोगो  ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं कैंडल जला कर उन्हें स्मरण किया,मंगलवार की शाम तिरंगा चौक में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।

डॉ मेमन एक ऐसा शक्स जो किसी तारीफ़ का मोहताज नहीं रहे गरियाबंद ज़िले की पहचान डॉ मेमन से हुआ करती थी,गरियाबंद से बाहर जब कोई अपने शहर का नाम बतलाता था तो लोग कहते थे अच्छा आप उसी गरियाबंद से है ना जहां डॉ मेमन रहते है, डॉ मेमन का ओहदा ऐसा था लोग अपने दुख में तो याद करते थही पर अपने सुख में भी उन्हें याद करने से नहीं भूलते थे और डॉ साहब भी हर उस शक्स के सुख और दुख में एक परिवार की तरह शामिल हुआ करते थे,ना जाने कितने ज़िंदगीय डॉ साहब ने बचाई होगी ना जाने कितने लोगो के मौत के मू से वापस लाया होगा उनकी ना उनकी भरपाई होगी और ना ही उनकी कमी कभी पूरी होगी

ग़रीबो के मसीहा डॉ मेमन

डॉ मेमन हर तपके के लोगो के पसंदीदा रहे अमीर गरीब गाँव शहर सभी के जुबा पर सिर्फ़ डॉ साहब का नाम हुआ करता था ग़रीबो ने अपना देवता स्वरूप इंसान खो दिया डॉ साहब की एक ख़ाशियत थी आपके पास पैसे हो ना हो आपका इलाज ज़रूर होगा आपके पास पैसे हो ना हो आपको दवा ज़रूर मिलेगा ये एक ऐसे वजह थी जिसके कारण ज़रूरतमंद उन्हें अपना भगवान भी कहा करते थे, आधि रात को किसी की तबियत ख़राब हो और डॉ साहब ना पहुँचे ऐसा कभी हुआ नहीं,

19-09-2018 डॉ साहब की आख़िरी विदाई वो मंजर देख जब पूरा शहर रो पड़ा था

बताते चले 19-09-2018 ये वो काला दिन था जब ग़रीबो के मसीहा डॉ मेमन ने अपनी अंतिम सॉस ली थी आज भी उस मंजर को याद कर के लोग आपने आशु रोक नहीं पाते, शायद ही गरियाबंद के इतिहास में वो दिन कभी आएगा जब हज़ारो की भीड़ ने उनके विदाई में डॉ मेमन अमर रहे के नारे लगाये थे पूरे रास्ते पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछाई गई थी क्या नगर क्या चौक चौराहा सब सुने पड़ गये थे बच्चे बूढ़े नौजवा कोई भी शक्स अपने आसुओ पर क़ाबू ना कर पाया था डॉ सहाब की अंतिम विदाई में शामिल होने पूरे ज़िले से जन सैलाब उमड़ पड़ा था

डॉ मेमन वो शख्सियत हैं जिनके विचार आज भी ज़िले के युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं- साबिर भाई

श्रद्धांजलि अर्पित करते वक़्त आज फिर से वही मंजर देखने मिला जब उनके मित्र साबिर भाई अपने डॉ साहब को श्रद्धांजलि देते वक़्त अपने आशुओं पर क़ाबू ना कर पाए सबीर भाई ने कहा डॉ साहब हम सबको हमेसा के लिये अकेला छोड कर चले गये पर उनकी यादे और उनकी कही बारे हमेशा हमारे साथ है उन्होंने अपने पेशे को सही मुक़ाम दिया था सेवा भाव सिर्फ़ सेवा मैंने उन्हें ज़रूरतमंद लोगो के इलाज के के बाद दवा ख़रीदने के लिए पैसे देते हुए भी देखा है,उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनता की सेवा में लगा दिया था डॉ साहब ने सादा जीवन जीना और ज़रूरतमंद ग़रीबो के प्रति सोचना सिखाया।

यह लोग मौजूद रहे

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में शाबिर भाई नरेंद्र देवांगन मनोज वर्मा श्री राम माखीजा रामकुमार वर्मा युगल किशोर पांडे हरीश भाई ठक्कर रमेश मेश्राम दिलेश्वर देवांगन सनी मेमन नंदनी त्रिपाठी पार्षद प्रतिनिधि छगन यादव जूनेद ख़ान पूना यादव गूँचू प्रहलाद यादव


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