BREKINGS: चाकाबुड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार की गाथा: सचिव और पूर्व सरपंच की मिलीभगत से करोड़ों का सरकारी धन डकारने का खुला खेल, प्रशासन मौन, ग्रामीणों में आक्रोश

 

कोरबा/कटघोरा (गंगा प्रकाश)। चाकाबुड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार की गाथा छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कोरबा जिले के कटघोरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत चाकाबुड़ा में वर्षों से जड़ें जमाए बैठी भ्रष्टाचार की बेल अब पेड़ बन चुकी है। पंचायत सचिव रजनी सूर्यवंशी और पूर्व सरपंच पवन सिंह कमरों के गठजोड़ ने बीते वर्षों में जिस तरह से सरकारी योजनाओं और वित्तीय मदों को लूटा है, वह पंचायती राज व्यवस्था को शर्मसार करने वाला है। चाकाबुड़ा पंचायत अब एक ऐसे उदाहरण के रूप में सामने आ रही है जहां विकास के नाम पर केवल कागज़ों में योजनाएं बनीं, राशि निकाली गई, लेकिन ज़मीनी हकीकत सिफर रही।

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भ्रष्टाचार का सुनियोजित खेल: योजना बनाओ, राशि निकालो, काम गायब

गांव के नवनिर्वाचित सरपंच, उपसरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने 23 अप्रैल 2025 को कलेक्टर को सौंपे गए लिखित शिकायत पत्र में खुलासा किया कि बीते पंचवर्षीय कार्यकाल में पंचायत में बड़े पैमाने पर घोटाले को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट थी — जिसमें विकास कार्यों को सिर्फ सरकारी अभिलेखों में दर्शाया गया और उनका भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन वास्तविकता में कार्य नहीं हुए।

स्ट्रीट लाइट से लेकर शौचालय तक — सबकुछ कागज़ी

शिकायत में बताया गया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से गांव में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के लिए 3.21 लाख रुपए खर्च दिखाए गए, जबकि गांव के खंभों पर केवल गिनती भर की घटिया लाइट लगी हैं जो अक्सर खराब रहती हैं। इसी तरह, प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकान, सामुदायिक भवन, हैंडपंप, नाली और बोर मरम्मत के नाम पर कुल 9.28 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्य हुए ही नहीं।

स्वच्छता के नाम पर 8.90 लाख का बड़ा खेल

सबसे चौंकाने वाला घोटाला स्वच्छता मद में हुआ है। इस मद में गली-सफाई, समतलीकरण, सोख्ता गड्ढा निर्माण और शौचालय निर्माण जैसे कार्यों के नाम पर कुल 8,90,696 रुपए खर्च दिखाए गए हैं।

सोख्ता गड्ढा निर्माण के नाम पर 30 मई 2021 और 7-8 मई 2023 को 2.98 लाख रुपए की निकासी की गई।*शौचालय निर्माण कार्यों में 18 फरवरी 2022, 21 अक्टूबर 2022, 2 मार्च 2023 और 7 दिसंबर 2023 को कुल 4.44 लाख की राशि निकाली गई।*गली और नाली की सफाई एवं मरम्मत के लिए 15 मई 2020, 9 अगस्त 2021, 22 दिसंबर 2021 और 10 फरवरी 2022 को लगभग 1.49 लाख रुपए खर्च किए गए।

 

ग्रामीणों का साफ कहना है कि ये कार्य कभी ज़मीन पर हुए ही नहीं। गली आज भी गंदगी से अटी पड़ी है, नालियां टूटी हैं, और जिन शौचालयों का हवाला देकर राशि निकाली गई, वे केवल कागज़ों में हैं।

 

जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश, अधिकारी बने रक्षक

इस व्यापक घोटाले के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव रजनी सूर्यवंशी जनपद CEO यशपाल सिंह की ‘खासमखास’ हैं। इसके साथ ही, जिले के एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का भी उन पर वरदहस्त है, जिसके कारण बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब प्रशासनिक अमला खुद इस भ्रष्ट व्यवस्था का रक्षक बन बैठता है। जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिलकर ग्रामीणों की आवाज़ को या तो नजरअंदाज कर रहे हैं या उसे दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम: अब आर-पार की लड़ाई होगी

गांव के वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामवासियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरेंगे और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक भ्रष्ट सचिव और पूर्व सरपंच पर कठोर कार्रवाई नहीं होती।

 

क्या सिर्फ शिकायत और जांच से खत्म होगा भ्रष्टाचार?

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि जब पंचायत स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता खत्म हो जाती है, तो विकास की योजनाएं सिर्फ घोटाले का माध्यम बन जाती हैं। चाकाबुड़ा पंचायत में जो हुआ है, वह केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पूरे पंचायती राज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब तक जनप्रतिनिधि और अधिकारी गठजोड़ से ऊपर उठकर काम नहीं करेंगे, तब तक ग्रामीण भारत में विकास सिर्फ एक सपना बना रहेगा।

यह रिपोर्ट प्रशासन, राज्य सरकार और पंचायत विभाग के लिए आईना है। यदि अब भी आंखें नहीं खुलीं, तो यह लूट की संस्कृति भविष्य में और व्यापक रूप धारण कर सकती है। चाकाबुड़ा पंचायत का यह मामला किसी एक सचिव या सरपंच का नहीं, बल्कि उस पूरी प्रणाली का पर्दाफाश है जो जनता के पैसों से अपने महल खड़े करती है।


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