छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का स्कूली खेल की तरह आयोजन

छुरा(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ सरकार द्वारा अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाने के उद्देश्य व ग्रामीण प्रतिभाओं को राज्य एवं राष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल प्रतियोगिता प्रारंभ किया गया है जिसमें परंपरागत16 प्रकार की खेलों को समाहित किया गया है छह चरणों की इस खेल प्रतियोगिता के लिए तिथि निर्धारित कर दी गई है इसके लिए आयोजक नोडल का भी निर्धारण किया गया है यह खेल प्रतियोगिता में ग्रामीण स्तर तक के खेल अच्छी तरह संपन्न होता है किंतु अगले चरणों में उच्च अधिकारियों की संलिप्तता से खेल आयोजन की स्थिति अलग हो जाती है उनके द्वारा खेल पर ध्यान केंद्रित न करते हुए उसकी भव्यता पर खर्चे पर ध्यान केंद्रित कर दिया जाता है जिससे खेल प्रतिभाएं नगण्य हो जाती है पांच-छह दिनों के लिए निर्धारित खेल दिवस को एक दिन में समाप्त कर इतिश्री कर दिया जाता है जिससे खिलाड़ियों का मनोबल टूट जाता है और सरकार के प्रति नकारात्मक भाव आता है तथा सरकार की छवि धूमिल होती जाती है विदित हो कि गांव का एक प्रतिभावान खिलाड़ी चार पांच खेलों में अपने गांव के सम्मान के लिए भागीदारी निभाता है जोन स्तर पर भी वह उन खेलों को खेल पाता है किंतु विकासखंड, जिला, संभाग स्तर पर अधिकारियों द्वारा 16 प्रकार की खेलों को एक दिन में खेल निपटाने के चक्कर में और अलग-अलग खेलो को एक साथ एक ही समय पर कराने से वह प्रतिभावान खिलाड़ी टूट जाता है और एक ही खेल में समाप्त हो जाता है जिससे न ही सरकार के उद्देश्य की पूर्ति होती है और न ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को स्कूली खेल की तरह एक चिनन में आयोजन कर उनके उद्देश्य को अधिकारियों द्वारा समाप्त किया जा रहा है ग्राम डांगनबाय के खिलाड़ी समाजसेवी शीतल ध्रुव ने कहा कि वे स्वयं चार पांच खेलों में हिस्सा ले रहे हैं किंतु जिला स्तर पर एक ही दिन का तिथि तय होने से वे एक ही खेल को खेल पायेंगे जब सरकार द्वारा पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया जा रहा है तो अधिकारी मनमानी कर सरकार की छवि क्यो खराब कर रहे है तीन चार दिन तक आयोजन हो और छत्तीसगढ़ के परंपरागत खेल को उत्सव की तरह तीन चार दिनों तक खेलें। ग्राम पंचायत हरदी के सरपंच संतुराम ने कहा कि वे भी एक खिलाड़ी हैं उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर खेल आयोजन के लिए कोई फंड नहीं होता फिर भी तीन-चार दिनों तक खेल होता है किंतु जिला स्तर संभाग स्तर पर पर्याप्त फंड होने पर भी अधिकारियों द्वारा एक दिन में खेल समाप्त करना खिलाड़ियों के प्रति अन्याय हैं चयनित खिलाड़ियों को लाने ले जाने का भार भी पंचायत पर होता है जिसके लिए फंड नहीं दिया जाता जिला एवं संभाग स्तर के खेलों के आयोजन तिथि की सूचना भी सही समय पर नहींं मिल पाती है तथा महिलाओं के साथ जाने के लिए महिला पीटईआई अथवा खेल की जानकार शिक्षिका भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है।खिलाड़ी मंथीर ने कहा कि एक दिन में खेल पूर्ण कराने के कारण खिलाड़ियों को खाने का समय नहीं दिया जाता एक ओर खेल चालू रहता है दूसरी ओर भोजन भी प्रारंभ कर दिया जाता है जिसके कारण खेल छूट जाता है या भोजन छोड़ना पड़ता है इस पर जनप्रतिनिधियों, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए।


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