चार बार शिकायत और जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी, प्रभारी सीईओ पर संरक्षण देने का आरोप
छुरा (गंगा प्रकाश)। जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत मडेली में पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने पंचायत सचिव अंबिका सोनी पर नियमित रूप से पंचायत कार्यालय में उपस्थित नहीं होने, लंबे समय से एक ही पंचायत में पदस्थ रहने, ग्रामसभा की बैठकों में अनुपस्थित रहने, राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर पंचायत में उपस्थित नहीं होने तथा ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं एवं पंचायत संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में चार बार शिकायत दर्ज कराई गई और जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत से जुड़े राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु पंजीयन, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि पंचायत सचिव अपने मुख्यालय ग्राम मडेली में निवास नहीं करतीं और करीब 15 किलोमीटर दूर अकलवारा में रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यालय में नियमित उपलब्धता नहीं होने से पंचायत की दैनिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
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सरपंच ने वेतन आहरण पर उठाए सवाल
मडेली के सरपंच अशोक ध्रुव ने पंचायत सचिव के वेतन आहरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वेतन पत्रक पर उनके हस्ताक्षर नहीं होने के बावजूद जनपद पंचायत स्तर से वेतन आहरण किया जा रहा है। सरपंच ने सचिव की उपस्थिति, मुख्यालय में निवास, वेतन आहरण की प्रक्रिया तथा पंचायत से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामसभा की पारदर्शिता पर भी सवाल
ग्रामीण लालाराम यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के दौरान पंचायत के आय-व्यय, विकास कार्यों तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी ग्रामीणों को समुचित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा पंचायत की जवाबदेही और पारदर्शिता का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए पंचायत के वित्तीय एवं विकास संबंधी कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
चार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में चार बार शिकायत की गई। उनके अनुसार शिकायतों के आधार पर जांच भी हुई तथा जांच में शिकायतें सही पाए जाने की जानकारी उन्हें मिली। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि जांच में शिकायतें सही पाई गई थीं तो संबंधित अधिकारी ने अब तक क्या कार्रवाई की? जांच रिपोर्ट पर क्या निर्णय लिया गया और कार्रवाई नहीं किए जाने का कारण क्या है? ग्रामीण अब जांच रिपोर्ट एवं कार्रवाई से संबंधित अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
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प्रभारी सीईओ पर संरक्षण का आरोप
ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत के प्रभारी सीईओ सतीश चन्द्रवंशी पर शिकायतों के बावजूद सचिव के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इस संबंध में कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने प्रभारी सीईओ पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने तथा स्वयं को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का करीबी बताकर प्रभाव दिखाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं पंचायत सचिव अंबिका सोनी और प्रभारी सीईओ सतीश चन्द्रवंशी का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
कलेक्टर से सचिव को हटाने की मांग
मामले को लेकर मडेली पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पंचायत सचिव को मडेली से हटाने तथा पंचायत की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने सचिव की उपस्थिति, मुख्यालय में निवास, ग्रामसभा की कार्यवाही, वेतन आहरण, पंचायत के आय-व्यय, विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच कराने की मांग की है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत शासन की सबसे महत्वपूर्ण जमीनी इकाई है और यहां कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति तथा पारदर्शी कार्यप्रणाली सीधे आम लोगों को प्रभावित करती है। यदि शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीण सामूहिक रूप से आंदोलन करने पर विचार कर सकते हैं।
अब पूरे मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और कलेक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीणों की शिकायतों, जांच रिपोर्ट और पंचायत के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई तथा आरोप निराधार पाए जाने पर उसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।
