मीडिया सेंटर में बातचीत करते हुए अनुराग शर्मा ने दिल की बात जुबां पर उतारी 


सस्ती लोकप्रियता लम्बे समय तक नहीं टिकती राजिम का महोत्सव मंच कलाकारां का सपना होता है

राजिम (
गंगा प्रकाश)। रायपुर से पहुंचे स्टार नाईट कलाकार अनुराग शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि खुली मानसिकता आगे बढ़ाने में सहायक सिध्द होते है, दबाव में मार्ग अवरूध्द हो जाता है। हिट होने के लिए फिट रहने की आवश्यकता है। सस्ती लोकप्रियता लम्बे समय तक नहीं टिकती। कलाकार मेहनत करें, सीखें, जाने। उनको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। छत्तीसगढ़ी फिल्म का भविष्य सबसे अच्छा है जिसमें काम अच्छा हो रहा है परन्तु पर्दे की कमी है। फिल्म इंडस्ट्री इन 22 वर्षों में तेजी के साथ बढ़ा है। मेरी मंचीय प्रस्तुति हिन्दी गाने से हुई है। छत्तीसगढ़ी लोकगायक मिथलेश साहू, महादेव हिरवानी मेरे पसंदीदा हैं।
श्री शर्मा ने आगे बताया कि राजिम का महोत्सव मंच कलाकारां का सपना होता है। आज प्रस्तुति देकर मै बहुत प्रसन्न हूं। मेरी कोशिश रहती है कि अपना हर काम ईमानदारी के साथ करूं। पिछले 20 सालों से गा रहा हूं जिस तरह से पंजाब, उड़ीसा, बंगाल आदि के कलाकारों की मुंबई में पैठ होती है। वह अपनी फोक के साथ बॉलवुड स्टाइल को मर्ज करते है ताकि उन्हें पूरा देश जाने। मेरी खयालात भी ऐसा ही है। कर्मा, ददरिया, सुवा ने मुझे आगे बढ़ाया। संस्था चंदैनी गोंदा से ंलोक संगीत सीखा। छत्तीसगढ़ी भाषा हिन्दी के सबसे नजदीक है। मेरा पूरा कार्यक्रम छत्तीसगढ़ी में होते है। हालांकि कभी-कभार हिन्दी गानों का उपयोग कर लेता हूं। भाषा कभी संकट पैदा नहीं करती, वह हमेशा जोड़कर रखते है। गीत तोर सुरता म, तोर आंखी म दीवानी…गीत ने मुझे आगे बढ़ाया। मेरे कार्यक्रम में कोई सेटेड नहीं होते माहौल के अनुसार प्रस्तुति देना ज्यादा अच्छा समझता हूं। 1500 से भी ज्यादा गाना फिल्मों में गा चुका हूं। 7 बार प्लेबैक आवार्ड मिला है आने वाला एलबम तोर बोली म मंदरस धूम मचाएगा मुझे पूरा विश्वास है। तोर आंखी म दिवानी गीत को अरूण यादव ने लिखा है। उन्होंने प्रण कर लिया था कि मेरी नौकरी लगेगी तब उनकी पहली तंख्वाह से यह गीत अनुराग शर्मा के आवाज में श्रोताओं तक पहुंचेगी। ऐसा ही हुआ और इस गीत ने मुझे प्रसिध्दि दिला दी। सन् 2018 में स्थापित होने का मौका मिला। गीत छम-छम बाजे पांव के पैरी के 90 मिलियन के आसपास विवर्स है श्री शर्मा ने आगे बताया कि मेरे दादा अपने लिए रामायण गाते थे। मेरे घर में कोई संगीत का माहौल नहीं रहा। मेरी रूझान संगीत के प्रति होने से लोग आश्चर्य मानते है।


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