राज्य सरकार ने आरोपियों को गिरफ्त में लेने के लिए जारी की 17 (A) अनुमति

रायपुर(गंगा प्रकाश)। किसी भी देश की प्रगति और उन्नति में देश के राजनेताओं और शासन का मुख्य हाथ होता है। लेकिन जिस देश के राजनेता भ्रष्ट होते हैं वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। भारत समेत विश्व में ऐसे कई देश हैं, जहां भ्रष्टाचार चरम सीमा तक फैल चुका है, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है।
भ्रष्टाचार एक ऐसी बीमारी है जो आज सभी देशों में बड़ी तेजी से फैल रही है। जिस प्रकार सभी देश विकसित हो रहे हैं उसी प्रकार भ्रष्टाचार भी विकसित हो रहा है। भारत में ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां भ्रष्टाचार न पाया जाए। जो व्यक्ति अपने कार्य के प्रति ईमानदार होगा तो धीरे-धीरे भ्रष्टाचार भी खत्म होगा। अगर भ्रष्टाचार को भारत से पूरी तरह खत्म करना है, तो उसके लिए हमें भ्रष्ट लोगों को शासन को राजनीति से निकालना होगा। किसी भी देश को तरक्की करने के लिए भ्रष्टाचार मुक्त होना काफी जरूरी है। भ्रष्टाचार रूपी दीमक को हमें जल्द से जल्द खत्म करना होगा नहीं तो यह पूरे देश को खोखला कर देगा।बताना लाजमी होगा कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ विष्णुदेव साय सरकार ने मोदी गारंटी के साथ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। भ्रष्टाचार और घोटालों में लिप्त नौकरशाहों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार की पहल से IT-ED के अलावा ACB-EOW भी एक्शन मोड में है। उसने एक साथ 3 बड़े घोटालों की जांच शुरू कर दी है, इसमें 22 सौ करोड़ का शराब घोटाला, 600 करोड़ का कोल खनन परिवहन घोटाला और 6000 हजार करोड़ का महादेव ऐप घोटाला शामिल है। ताजा जानकारी के मुताबिक EOW और ACB ने एक साथ तीनों ही घोटालों की जांच शुरू कर दी है। इसके तहत तमाम आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। कई कारोबारियों और घोटालों में लिप्त आरोपियों के ठिकानों में छापेमारी के बाद बयानों को दर्ज करने का सिलसिला जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों कई संदेही और आरोपी EOW के हत्थे चढ़ सकते हैं।

हाल ही में अंजाम दी गई छापेमारी की कार्यवाही में EOW को कई ऐसे सबूत हासिल हुए हैं , जिससे पता चलता है कि भू-पे राज में कतिपय नौकरशाहों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट प्रदान कर दी गई थी। छत्तीसगढ़ में घोटालों में लिप्त पाए गए ED के आरोपियों के खिलाफ जल्द नया अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। यह मामला आरोपियों की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने से जुड़ा बताया जाता है। इसके लिए राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने ACB-EOW को फ्री हैंड दे दिया है।

सूत्रों का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही को अंजाम दिए जाने के लिए 17 (A) की अनुमति जारी कर दी गई है। सरकार की इस पहल से एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं।
बताया जाता है कि राज्य सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक ढांड , उद्योग सचिव अनिल टुटेजा और मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किए जाने का मामला भी पंजीबद्ध किया जाएगा।

इसके लिए जरूरी सभी वैधानिक अनुमति राज्य सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक तीनों प्रभावशील आरोपियों के खिलाफ EOW जल्द अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज कर सकती है। इसके अलावा महादेव ऐप घोटाले में लिप्त पाए गए कुछ IPS अधिकारियों के खिलाफ भी वैधानिक कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार ने 17 (A) की अनुमति जारी की है।

इस अनुमति के बाद 2005 बैच के IPS शेख आरिफ , 2001 बैच के आनंद छाबड़ा , 2004 बैच के अजय यादव और 2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल के खिलाफ भी नामजद अपराध पंजीबद्ध होने के आसार हैं। इन IPS अधिकारियों के खिलाफ महादेव ऐप सट्टा कारोबार में लिप्त रहने के चलते EOW को अपराध पंजीबद्ध करने के लिए सभी वैधानिक अनुमति जारी होने की जानकारी सामने आई है। दागी अफसरों की फहरिस्त में शामिल विवेक ढांड , अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्ज करने की तैयारी जोरों पर बताई जाती है।

दरअसल वर्ष 2021 में IT-ED की छापेमारी में इन प्रभावशील अधिकारियों के ठिकानों से कई दस्तावेज और आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई थी। मामले की विवेचना के बाद IT-ED ने दागी अफसरों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार को एक शिकायती पत्र भी भेजा था। केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए इस पत्र में दागी अफसरों की संपत्ति, कार्यप्रणाली और काले कारनामों का ब्यौरा भी सौंपा गया था। घोटालों में लिप्त पाए गए अफसरों के खिलाफ कई दस्तावेजी प्रमाण भी संलग्न किए गए थे।

बावजूद इसके तत्कालीन भू-पे बघेल सरकार ने ना केवल भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों का बचाव किया था बल्कि उनके खिलाफ कोई वैधानिक मामला दर्ज ना करते हुए , केंद्रीय जांच एजेंसियों को ही कटघरे मे खड़ा कर दिया गया था। लेकिन अब फिजां बदल चुकी हैं। राज्य में बीजेपी सरकार के गठन के बाद भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में भू-पे सरकार की रवानगी के साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त नौकरशाहों के भी लूट-पाट के दिन लद गए हैं। अब उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने लूटी गई सरकारी तिजोरी की रकम वापसी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बताते हैं कि एजेंसियों के हांथ कई नए आरोपियों के गिरेबान तक पहुंच सकते हैं।

क्या धारा 17 (A)

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए में संशोधन के बाद अब वर्तमान व पूर्व अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने से पहले सरकार की अनुमति लेना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की मूल भावना और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है। साथ ही ताजा संशोधन से भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इसे अनुचित बताया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए में यह प्रावधान किया गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायत होने पर अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। बिना सरकारी अनुमति के पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी किसी भी भ्रष्ट अधिकारी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। उनके खिलाफ एफआईआर भी नहीं हो सकती। सरकार तीन महीने में अपना निर्णय देगी।(साभार न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़)

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