WhatsApp ग्रुपों में प्रचार, कई गंभीर बीमारियों के उपचार का दावा; डॉक्टर का पता ओडिशा का, शिविर की वैधानिकता पर उठे सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। नगर में इन दिनों एक पंपलेट चर्चा का विषय बना हुआ है। पांपलेट के माध्यम से विभिन्न बीमारियों के उपचार का दावा करते हुए लोगों को इलाज के लिए संपर्क करने की अपील की जा रही है। पांपलेट में दी गई जानकारी के अनुसार 14 अगस्त 2026, शुक्रवार को छुरा नगर में सुनील सचदेव की दुकान के सामने उपचार शिविर आयोजित किया जाना है। इस शिविर का प्रचार WhatsApp ग्रुपों के माध्यम से भी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पांपलेट में लोगों से अपील की गई है कि जिन भाई-बहनों को उसमें उल्लेखित बीमारियों का इलाज करवाना है, वे संबंधित डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। उपचार का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तथा पंजीयन शुल्क 200 रुपए बताया गया है।
मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि छुरा में एक ओर शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, वहीं दूसरी ओर पंजीकृत निजी स्वास्थ्य केंद्र भी मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद किसी निजी व्यापारी की दुकान के सामने इस तरह मरीजों को बुलाकर उपचार किए जाने की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।
पंपलेट में कई बीमारियों के इलाज का दावा
पांपलेट में डॉ. सुरेंद्र मिश्रा (D.A.T.D.H.M.S.) को एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ बताया गया है। वहीं डॉ. कमलेश मिश्रा (B.A.Y.S.) का नाम भी दर्ज है।
पांपलेट में पथरी, पेट संबंधी गैस, श्वास रोग, शुगर, साइटिका, अस्थमा, निःसंतानता, सफेद दाग, फाइलेरिया सहित विभिन्न बीमारियों के उपचार का दावा किया गया है। इस तरह गंभीर और सामान्य दोनों प्रकार की बीमारियों के उपचार का दावा किए जाने के बाद संबंधित चिकित्सकों की योग्यता, पंजीयन और उपचार पद्धति की वैधानिकता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
किसी भी बीमारी से परेशान मरीज जब उपचार के लिए ऐसे शिविर में पहुंचता है तो उसके लिए यह जानना जरूरी होता है कि उपचार करने वाला व्यक्ति संबंधित चिकित्सा पद्धति में विधिवत पंजीकृत है या नहीं और उपचार स्थल निर्धारित स्वास्थ्य मानकों को पूरा करता है या नहीं।
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डॉक्टर का पता ओडिशा का, छुरा में इलाज
पांपलेट में संबंधित डॉक्टर का पता खरियार रोड, ओडिशा, बाजार पारा, वार्ड नंबर 4 बताया गया है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि दूसरे राज्य के पते वाले चिकित्सक छत्तीसगढ़ के छुरा में मरीजों का उपचार किस पंजीयन और अनुमति के आधार पर कर रहे हैं।
यहां यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि दूसरे राज्य में पंजीकृत चिकित्सक द्वारा किसी अन्य राज्य में चिकित्सा गतिविधि संचालित करने की वैधानिक स्थिति संबंधित नियमों और पंजीयन पर निर्भर करती है। इसलिए इस मामले में अनुमान के बजाय स्वास्थ्य विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच किया जाना आवश्यक है।
छुरा में चौथी बार कार्यक्रम होने की जानकारी
सूत्रों के अनुसार संबंधित पांपलेटधारी डॉक्टर द्वारा छुरा नगर में इस प्रकार का कार्यक्रम चौथी बार आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले छुरा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में भी इसी तरह उपचार संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यदि लगातार चौथी बार नगर में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है तो यह सवाल भी उठता है कि क्या पूर्व में आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को थी? यदि थी तो क्या विभाग द्वारा संबंधित चिकित्सकों के दस्तावेज और उपचार स्थल की जांच की गई थी?
यदि जांच हुई है तो उसकी स्थिति क्या रही, यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दुकान के सामने इलाज, क्या है नियम?
पूरे मामले का सबसे अहम पहलू उपचार स्थल को लेकर है। 14 अगस्त को सुनील सचदेव की दुकान के सामने शिविर लगाने की जानकारी पांपलेट के साथ नीचे लिखा गया है।
अब सवाल यह है कि क्या किसी सामान्य व्यापारिक परिसर या दुकान के सामने मरीजों को बुलाकर उपचार किया जा सकता है? क्या इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से पूर्व अनुमति आवश्यक है? क्या ऐसे शिविर के लिए कोई निर्धारित मानक हैं? क्या मरीजों की जांच, उपचार और दवाओं के लिए आवश्यक सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी?
यदि यह विधिवत चिकित्सा शिविर है तो इसके लिए आवश्यक अनुमति और पंजीयन की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं यदि यह किसी पंजीकृत स्वास्थ्य संस्था के दायरे में नहीं आता तो विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए।
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अस्पताल और निजी स्वास्थ्य केंद्र अपनी जगह, फिर यह व्यवस्था क्यों?
छुरा में शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा पंजीयनयुक्त निजी स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हैं। इन संस्थानों में चिकित्सा व्यवस्था के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाएं लागू होती हैं।
ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब मरीजों के उपचार के लिए निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान मौजूद हैं, तो निजी व्यापारी की दुकान के सामने अस्थायी रूप से मरीजों को बुलाकर इलाज करने की जरूरत और वैधानिकता क्या है?
यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि आम मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए उठाया जा रहा है।
WhatsApp ग्रुपों पर भी वायरल हो रहा पांपलेट
पांपलेट की जानकारी WhatsApp ग्रुपों में प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है। इससे उपचार संबंधी दावा तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे संदेश पहुंचने की संभावना है।
आम नागरिक बीमारी के इलाज की उम्मीद में प्रचार सामग्री देखकर शिविर तक पहुंच सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के लिए यह जरूरी हो जाता है कि पांपलेट में किए गए उपचार संबंधी दावों और संबंधित चिकित्सकों की वैधानिक स्थिति की जांच करे।
गंभीर बीमारियों के दावों पर विशेष निगरानी जरूरी
पांपलेट में केवल सामान्य समस्याओं का ही नहीं, बल्कि शुगर, अस्थमा, पथरी, श्वास संबंधी बीमारी, निःसंतानता और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार का भी दावा किया गया है।
ऐसे मामलों में मरीजों को यह जानकारी होना जरूरी है कि उन्हें किस चिकित्सा पद्धति के तहत उपचार दिया जाएगा, उपचार करने वाले व्यक्ति की संबंधित पद्धति में क्या योग्यता है और क्या उसका पंजीयन वैध है।
स्वास्थ्य विभाग यदि मौके पर जाकर जांच करता है तो इन सभी सवालों का जवाब दस्तावेजों के आधार पर सामने आ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि 14 अगस्त को शिविर आयोजित होने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग को मामले की जांच करनी चाहिए। संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन, उपचार पद्धति, छत्तीसगढ़ में उपचार करने की अनुमति, उपचार स्थल की वैधानिक स्थिति और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क की जांच की जानी चाहिए।
इसके साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि छुरा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पहले आयोजित किए गए कार्यक्रमों में किन नियमों का पालन किया गया था।
14 अगस्त को क्या होगा, अब स्वास्थ्य विभाग पर नजर
पांपलेट के अनुसार शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को सुनील सचदेव की दुकान के सामने शिविर लगाया जाना है। पांपलेट में दी गई बीमारियों का उपचार कराने के इच्छुक भाई-बहनों को डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की गई है।
अब देखना यह है कि शिविर शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग इसकी वैधानिकता की जांच करता है या नहीं। यदि सभी दस्तावेज और व्यवस्थाएं नियमानुसार हैं तो विभाग द्वारा स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो मरीजों के हित में कार्रवाई आवश्यक होगी।
फिलहाल छुरा में इस पांपलेट ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब इलाज के लिए शासकीय और पंजीकृत निजी स्वास्थ्य संस्थान मौजूद हैं, तो निजी दुकान के सामने आयोजित होने वाले इस उपचार शिविर की वैधानिक स्थिति क्या है?
इसका जवाब अब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आएगा।
