गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ में कॉमर्स पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य धीरे-धीरे अंधकार की ओर जाने लगा है। विषय बाध्यता को लेकर चार साल पहले सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया के नियमावली में किए गए संशोधन के कारण बीकॉम के साथ b.Ed करके शिक्षक बनने का सपना देखने वाले छात्रों का गहरा झटका लगा है। दरअसल राज्य शासन द्वारा कुछ वर्ष पूर्व कला और वाणिज्य संकाय को लेकर भर्ती प्रक्रिया में किए गए संशोधन से कामर्स के छात्र शिक्षक बनने की पात्रता के मापदंड से ही बाहर हो गए है।

जानकारी के मुताबिक राज्य बनने के बाद से 2018 तक की नियुक्ति में बीकॉम एवं b.ed अभ्यर्थियों को कला संकाय के अंतर्गत शिक्षक बनाया जाता रहा है। लेकिन वर्ष 2019 में तत्कालीन भूपेश सरकार के समय विषय बाध्यता में हुए संशोधन के कारण बीकॉम और बीएड किए अभ्यर्थी पात्रता के मापदंड से बाहर हो गए। इसके बाद उनके बीएड करने का कोई औचित्य ही नहीं रह गया। जिससे राज्य के हजारों बीकॉम एवं बीएड अभ्यर्थियों में घोर निराशा व्याप्त हो गई है। बाध्यता लागू होने के बाद बीकॉम एवं बीएड के छात्रों को माध्यमिक शिक्षक में नौकरी की उम्मीद खत्म हो गई है।

इस संबंध में कॉमर्स के अभ्यर्थियों का कहना है कि सामाजिक विज्ञान संकाय में बीए ओर बीकॉम के अभ्यर्थी एक समान ही अर्थशास्त्र विषय पढ़ाते हैं। आज भी भारत के 13 राज्यों जिसमें मध्यप्रदेश, सर्वाधिक साक्षर राज्य केरल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पड़ोसी राज्य उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में बीकॉम एवं बीएड अभ्यर्थियों के माध्यमिक शिक्षक के पद पर कला संकाय (सामाजिक विज्ञान) अंतर्गत नियुक्तियां दी जा रही है इसके विपरीत छत्तीसगढ़ में नियमों को संशोधन कर सुनियोजित ढंग से कॉमर्स के छात्रों का भविष्य बर्बाद करने का आरोप अभ्यर्थियों ने लगाया है। कहना है कि शासन के नुमाइंदों ने जिस तरह से नियमों में छेड़खानी की उसके चलते पात्र श्रेणी में आने वाले छात्र-छात्राएं भी अपात्र होने लगे हैं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षक हेतु होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा सीटेट एवं सीजी टेट में भी बीकॉम के अभ्यर्थियों को सामाजिक विज्ञान कला संकाय के अंतर्गत ही सम्मिलित किया जाता रहा है। वर्तमान में भी राज्य में माध्यमिक शिक्षक बनने की आस में अनेक बीएड किए बीकॉम के अभ्यार्थी अथक परिश्रम कर इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर चुके हैं परंतु अब अचानक उन्हें विषय बाध्यता के नाम पर अपात्र घोषित करना अभ्यर्थियों एवं उनके परिवारजनों हेतु मानसिक कष्ट का कारण बन चुका है। यदि बीकॉम के साथ b.Ed किए अभ्यर्थी माध्यमिक शिक्षक बनने के लिए अपात्र हो जाते हैं तो उनके सालों की मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। उनकी b.Ed की डिग्री किसी काम की नहीं रह जाएगी।

इस मामले को लेकर हाल में ही बीकॉम के अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल तथा लोक शिक्षण संचनालय के जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौपा है। ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने माध्यमिक स्तर पर होने वाली शिक्षक भर्ती में विषय बाध्यता हटाने की मांग उनके समक्ष रखी है। अभ्यर्थियों ने आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा में इन्हें कला संकाय (सामाजिक विज्ञान शिक्षक) अंतर्गत भर्ती परीक्षा में सम्मिलित कर शिक्षक बनने का अवसर देने की मांग की है। इस मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अभ्यर्थियों को जल्द ही निराकरण का आश्वासन दिया है। वही अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर शासन प्रशासन इस मामले में गंभीरता से त्वरित कार्रवाई नहीं करती तो वह उग्र आंदोलन का रास्ता अपने मजबूर होंगे।

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