छुरा (गंगा प्रकाश)। संतान की दीर्घायु और उसके सुख में जीवन के लिए हर साल मनाया जाने वाला हलपष्ठी का पर्व शहर सहित अंचल में उत्साह के साथ मनाया गया। छुरा नगर में भी माताओं ने अपनी संतान के लिए यह व्रत श्रद्धा पूर्वक रखा और विधि विधान से पूजन पाठ किया, संतान की सलामती के लिए भगवान से पूजा-अर्चना कर मंगल कामना की।
छुरा नगर क्षेत्र के ग्राम हीराबतर, रसेला, कामराज, रुवाड, खरखरा, ग्राम के पंडित/गौटिया मोहल्ला के घरों व चौक-चौराहों में सगरी बनाकर महिलाओं द्वारा भगवान शिव व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। माताओं को विधि विधान से पूजन पाठ संपन्न करा रहे पंडित श्री बजरंग पांडेय ने बताया भादो माह के कृष्ण पक्ष के षष्टम तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम जी के जन्मोत्सव के अवसर पर हलषष्ठी का पर्व मनाया जाता है। यह व्रत माताएं संतान प्राप्ति एवं संतानों के दीर्घायु जीवन की मंगलकामना लिए व्रत रखती है। इस व्रत के लिए महिलाएं एक दो दिन से ही तैयारी में जुट जाती है। छुरा में विधि विधान से पूजन पाठ कर रही गंगा ध्रुव, वेदिका, अदिति पांडेय, केसर पांडे, सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने श्रद्धा एवं आस्था के साथ एकत्रित होकर व्रत रखकर भगवान बलभद्र, भगवान विष्णु एवं भगवान शिव का पूजा-अर्चना कर साथ ही छह कहानियां और कुंड के छह फेरे लगाकर हलषष्ठी पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। आदिति पांडेय ने बताया इस व्रत में प्रसाद के रूप में धान की लाइ, महुआ फूल, उड़द, मक्का, मटर, गेहूं इत्यादि एवं भैंस का दूध, दही, घी का भोग लगाया जाता है साथ ही व्रती महिलाओं द्वारा इस दिन छह प्रकार की भाजी एवं पसहर चावल जो की बगैर हल की जुताई से उत्पन्न धान से निकला चांवल (पसहर) होता है, इसे ही शाम को ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। साथ में छह प्रकार की भाजी होती है।
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