जयपुर (गंगा प्रकाश)। पिंक सिटी में रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल के सामने आयोजित शपथग्रहण समारोह में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में सांगानेर के विधायक भजनलाल शर्मा ने राजस्थान के चौदहवें मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस दौरान उनके साथ – साथ विद्याधरनगर विधायक दीया कुमारी और दूदू से विधायक प्रेमचंद बैरवा ने भी उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ ली।  राज्यपाल कलराज मिश्र ने तीनों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। राष्ट्रगान के साथ शपथग्रहण समारोह की शुरुआत हुई , जो लगभग उन्नीस मिनट चली।शपथग्रहण समारोह के लिये तीन मंच बनाये गये थे , जिसमें मुख्य मंच पर राज्यपाल कलराज मिश्र , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , भजनलाल शर्मा , विधायक प्रेमचंद बैरवा व दीया कुमारी बैठे। एक पर विभिन्न मंत्री व मुख्यमंत्री बैठे थे , वहीं एक मंच पर साधु समाज के लोग बैठे। शपथ ग्रहण के दौरान समर्थकों ने ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाये।इस शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह , रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा , गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत , त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा , महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे , गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल , उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित देश भर के कई दिग्गज नेता विशेष रूप से उपस्थित थे।अपना कार्यभार सम्हालने के बाद डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा  हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करनी होगी कि केंद्र सरकार की योजनायें पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुझे जो विभाग आवंटित किया जायेगा , उसमें ईमानदारी से काम करूंगा। हम दलितों के उत्थान के लिये काम करेंगे और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकने पर भी ध्यान देंगे। उल्लेखनीय है कि सांगानेर से विधायक भजनलाल शर्मा पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं और पहली ही बार में बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया है। वे ब्राह्मण समाज से आते हैं और इस समाज से आने वाला कोई शख्स तैंतीस साल बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री बना है।शपथ लेने से पहले भजनलाल शर्मा ने अपने माता- पिता के पैर धोकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके अलावा उन्होंने गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन किये और टोंक रोड पर पिंजरापोल गोशाला में गायों को चारा खिलाया। आज शपथग्रहण समारोह वाले दिन भजन लाल का जन्मदिन भी रहा , वो देश के इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपने जन्मदिन पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 

उन्होंने अपने दिन की शुरुआत प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। उन्होंने इसके बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने संतों और अपने गुरू का आशीर्वाद लिया है। राजस्थान अग्रणी प्रदेश हो इसकी उन्होंने भगवान से प्रार्थना की है।

                                     गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिये इस बार 25 नवंबर को मतदान हुआ था और इसके परिणाम 03 दिसंबर को आये थे। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुये कांग्रेस की सत्ता से विदाई पर मुहर लगाई थी। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को हराते हुये 199 विधानसभा सीटों में से 115 पर जीत दर्ज की थी , वहीं कांग्रेस पार्टी को महज 69 सीटें ही मिलीं। दो सौ विधानसभा वाले राजस्थान में चुनाव से पहले करणपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के निधन के कारण 199 सीट पर ही चुनाव हुये थे। इस विधानसभा चुनाव में बम्फर जीत के बाद भी बीजेपी में मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबा मंथन चला। हफ्ते भर की राजनीतिक उठा-पटक के बाद बीते मंगलवार को आखिरकार बीजेपी विधायक दल की बैठक में भजनलाल शर्मा का नाम मुख्यमंत्री के रूप में चुन लिया गया। उनके अलावा दिया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा का नाम डिप्टी सीएम के तौर पर चुना गया।उस बैठक में राजस्थान बीजेपी के विधायकों के अलावा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राजस्थान के लिये बनाये गये पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह , सरोज पांडे और विनोद तावड़े मौजूद थे। रोचक बात यह है कि विधायक दल के नेता के रूप में शर्मा के नाम का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री राजे ने किया , जिन्हें खुद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल माना जा रहा था। इस तरह से शर्मा भाजपा की ओर से उन तीन विधायकों की कतार में शामिल हो गए हैं जिन्हें पार्टी ने तमाम दिग्गजों को दरकिनार कर मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी इससे पहले छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय तथा मध्य प्रदेश में मोहन यादव को भी इसी तरह इस पद के लिये चुन चुकी है।

सरपंच से मुख्यमंत्री तक का सफर

भजन लाल शर्मा का जन्म 15 दिसम्बर 1967 को हुआ। इनके पिता का नाम किसान स्वरूप शर्मा है।इनका बचपन आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में बीता , लेकिन इन्होंने अपनी शिक्षा को कभी बाधित होने नहीं दिया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अटारी गांव में हुई , इसके बाद वे माध्यमिक शिक्षा के लिये नदबई आ गये। इन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल कर राजनीति में अपना कैरियर बनाने का फैसला किया। इनके पास राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री है। राजनीति में इनका प्रवेश 1990 के दशक में भाजपा के साथ हुआ। इन्होंने जमीनी स्तर से काम करना शुरू कर पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 1991-92 में इन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा की जिम्मेदारी मिली , वर्ष 1992 में ये श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में जेल भी गये। भजन लाल शर्मा ने 27 साल की उम्र में अटारी गांव से सरपंच का चुनाव लड़ा। वे वर्ष 2000 से 2005 तक अटारी गांव के सरपंच रहे। इसके बाद वर्ष 2010 से 2015 पंचायत समिति सदस्य रहे। इसके अलावा भारतीय जनता युवा मोर्चा नदबई मंडल अध्यक्ष , जिला मंत्री भाजयुमो , तीन बार जिला अध्यक्ष भाजयुमो , जिला मंत्री भाजपा भरतपुर , वर्ष 2009 से 2014 तक भरतपुर के जिला अध्यक्ष , वर्ष 2014 से 2016 तक प्रदेश उपाध्यक्ष राजस्थान और वर्ष 2016 से अब तक प्रदेश महामंत्री रहे। उन्होंने चार बार भारतीय जनता पार्टी के राज्य महासचिव के रूप में भी कार्य किया है। वे पार्टी में प्रदेश महामंत्री के रुप में भूमिका निभा रहे थे और हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में उन्हें जयपुर की सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी बनाया और वह पहली बार विधायक बने। वे चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पेन्द्र भारद्वाज को 48081मतों से हराकर विधायक निर्वाचित हुये। विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं का आभार जताते हुये कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है उसे और अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।

द्वय डिप्टी सीएम का संक्षिप्त परिचय

एक सामान्य दलित परिवार में जन्मे डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने वर्ष 2000 में दूदू के वार्ड 15 से जिला परिषद सदस्य के तौर पर चुनाव जीत दर्ज कर राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की। इन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 2013 में लड़ा और कांग्रेस के हजारीलाल नागर को हराया। वर्ष 2018 में प्रेम चंद बैरवा कांग्रेस के बाबूलाल नागर से चुनाव हार गये। फिर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इन्होंने सीएम के सलाहकार रहे बाबूलाल नागर को करारी शिकस्त देते हुये 35743 मतों से हराया है। वहीं डिप्टी सीएम दीया कुमारी विद्याधरनगर से विधायक चुनी गई और वे कांग्रेस प्रत्याशी सीताराम अग्रवाल को प्रदेश में सर्वाधिक 71 हजार से अधिक मतों से हराकर दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुई। इससे पहले वे वर्ष 2013 से सवाईमाधोपुर से विधानसभा चुनाव लड़कर पहली बार विधायक चुनी गई थी। वे विद्याधरनगर से विधायक चुने जाने से पहले राजसमंद से सासंद थी और उन्होंने विधायक बनने के बाद संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

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