दो युवा महिला उद्यमियों व्दारा काजू महोत्सव के माध्यम से राज्य सक्षमीकरण 

फ्रांस की शैम्पेन की टक्कर में गोवा की काजू फेणी – डॉ दिव्या राणे

करण समर्थ : आयएनएन भारत मुंबई

पणजी(गंगा प्रकाश)। गोवा राज्य के वन मंत्री विश्वजीत राणे ने गोवा वन विकास प्राधिकरण व्दारा गोवा राज्य शहर विकास प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित किए जानेवाले प्रथम गोवा काजू फेस्टिवल 2023 की तैयारीयों‌ का पणजी में एक कार्यक्रम में पर्दा उठाकर उद्घाटन किया। इस अनोखे महोत्सव तैयारीयों‌ की जानकारी देने के लिए वनमंत्री विश्वजित राणे के साथ गोवा वन विकास प्राधिकरण अध्यक्षा विधायिका डॉ दिव्या राणे, व्हि एम साळगावकर ग्रुप अध्यक्ष स्वाती साळगावकर, मुख्य वन संरक्षक राजीव कुमार, वन विभाग के एमडी सौरभ कुमार, जाने-माने काजू उत्पादक रोहित झांट्ये, निदेशक अरविंद बुगडे भी उपस्थित थे। 

महोत्सव की जानकारी देते हुए गोवा के पर्ये विधानसभा क्षेत्र की विधायिका तथा गोवा वन विकास प्राधिकरण अध्यक्षा तथा काजू महोत्सव कि मुख्य प्रवर्तक डॉ दिव्या राणे ने बताया, 15 तथा 16 अप्रैल को पणजी शहर के कंपाल स्थित  भाऊसाहेब बांदोडकर ग्राऊंड पर राज्य का प्रथम गोवा काजू फेस्टिवल २०२३ आयोजित किया गया है।‌ फ्रांस के शैम्पेन की टक्कर में गोवा की काजू फेणी को स्थापित करना यह सपना मैंने और प्राधिकरण की भूतपूर्व अध्यक्षा स्वाती सालगांवकरने मिलकर देखा था। हम दोनों अपने वन विभाग तथा वन विकास प्राधिकरण के सहयोग से गत कई महिनों से इसे यशस्वी बनाने के लिए प्रयत्नशील है।‌‌ इस अनोखे महोत्सव व्दारा गोवा काजू को विश्वपटल पर सकारात्मक प्रभाव से स्थापित करने के लिए हमें राज्य विकास के लिए प्रेरित टिम का साथ मिला है। इस महोत्सव के माध्यम से हम काजू फल के गुणों के विषय में अवगत करने के साथ इसे लोकप्रिय बनाने का प्रयास करेंगे।

विश्वजीत राणेने अपने विभाग के अधिकारियों व्दारा शुरू किए गए इस अनोखे पहल कि तारीफ करते हुए इस कार्यक्रम तथा तैयारियों

से अपनी संतुष्टता व्यक्त करते हुए काजू महोत्सव के माध्यम से बड़ों से लेकर छोटे बच्चों को भी एक अलग अनुभव मिलेगा ऐसा भरौंसा जताया। वास्तव में काजू फल और इससे आधारित उत्पादनों को ऐसे ही किसी प्रभावशाली अनोखी पहल कि आवश्यकता थी, इसलिए मुझे विश्वास है, इस रंगारंग मनोरंजन महोत्सव से राज्य के काजू इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। 

एमडी सौरभ कुमार, ने जानकारी देते हुए बताया, वैसे तो गोवा और गोवा फेणी किसी पहचान कराने की आवश्यकता नहीं है। गोवा का काजू और इससे बनने वाली काजू फेणी को पूरा विश्व जानता है।‌ इस महोत्सव के माध्यम से गोवा के काजू उत्पादक तथा संबंधित व्यावसायिकों को सहायता मिलेगी।‌ इस महोत्सव में गोवा के काजू तथा फेणी का प्रचार प्रसार होगा ऐसी हमें आशा है।‌ फेणी गोवा की पारंपरिक ड्रिंक है, इसे प्रसारण करना सरकार अपनी जिम्मेदारी मानती है। युवाओं को काजू संबंधित किसी व्यावसायिक स्टार्टअप करना है तो हम उन्हें आमंत्रित करतै है। इस तरह का अनोखा काजू फेस्टिवल का आयोजन करने कि कल्पना प्राधिकरण अध्यक्षा डॉ दिव्या राणे की है।‌

महोत्सव की जानकारी लेते हुए वन मंत्री विश्वजीत राणे ने महोत्सव लोगो लॉन्च किया।‌ काजू वृक्ष खेती ने गोवा राज्य की तकरीबन 65 प्रतिशत भूमि को हराभरा किया है। आज गोवा की 20 हजार हेक्टर भूमी पर काजू खेती हो रही है‌‌, इससे अंदाजन 24 टन काजू उत्पादन होता है लेकिन यह काफी कम है इसलिए इस उत्पादन को बढाना हमारा लक्ष्य है।‌ गोवा देश का एक मुख्य काजू उत्पादक राज्य है और हम सातवें नंबर पर है।‌

डॉ दिव्या राणे ने इस महोत्सव के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि, काजू  तो हमारे पारंपरिक तथा वर्तमान समय में रोजमर्रा जीवन का अभिन्न हिस्सा है।‌ इस अनोखे फेस्टिवल को मैने और स्वाती सालगांवकर दोनों ने मिलकर विकसित किया है और  हमारे पूरे विभाग का इसे सहयोग मिला है। इसलिए हम गोवा काजू को विश्व भर में प्रसारित करने के लिए प्रयत्नशील है।‌ हम गोवा काजू को विश्व पटल पर रखकर काजू इंडस्ट्री को विकसित करना चाहते हैं। आज हम एक हेक्टर पर चारसौ पचास टन उत्पादन कर रहे हैं, जो दुसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है। इसलिए कृषि विभाग काजू उत्पादकों को सहायता करते हैं तो हमारे काजू उत्पादक किसानों कों मददगार साबित होंगी।‌ काजू फल के गुणों को अधिक तरह से लोगों तक पहुंचाना है, जिससे काजू इंडस्ट्री विकसित होकर इस पर आधारित दुसरे उत्पादन के माध्यम से राज्य में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ काजू इंडस्ट्री को विकसित करने से राज्य में कई क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बनेगी ।

इस महोत्सव में काजू के साथ ही गोवा की पारंपरिक चीजों का गोवा तथा गोवा के बाहर प्रसार करने हेतु हम अपनी पारंपरिक कुणबी साडीयों का फैशन शो भी आयोजित किया है।‌ यह फेस्टिवल पूरी तरह से काजू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के साथ मल्टिपल प्रमोशन के भी उद्देश्य है, ऐसा डॉ दिव्या राणे ने बताया। 

अपने भाषण में डॉ दिव्या राणे ने महोत्सव के उद्देश्यों की अधिक जानकारी देते हुए कहा कि, जैसे शॅम्पैन फ्रांस का लोकप्रिय पेय है, वैसे काजू फेणी को भी गोवा पेय के रूप में विश्व भर मान्यता देकर हमे इसे प्रसारित करना है।‌ काजू महोत्सव मात्र काजू इंडस्ट्री से संबंधित नहीं लेकिन और भी कई पहलुओं को जोड़ते हुए काजू के माध्यम से गोवा के पर्यटन व्यवसाय तता महिला स्वरोजगार ग्रुप को लाभ होगा ऐसी मुझे विश्वास है।‌ वर्तमान समय में राज्य की महिलाएं बड़ी संख्या में काजू खेतीबाड़ी से जुड़ी होने के कारण काजू इंडस्ट्री विकसित होने के कारण काजू उत्पादन का ग्रामीण क्षेत्रों का बड़े पैमाने पर विस्तार होगा। हम अपने काजू को विश्व भर पहचान दिलाएंगे जिससे गोवा की इकोनॉमी विकसित करने में सहायता मिलेगी।‌

लॉन्चिंग वक्त राजीव कुमार आयएफएस ने इस समूचे कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहां की, यह पहिला मौका है की, यह हमारे लिए बड़े आनंद की बात है कि, गोवा में काजू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए इस तरह का अनोखा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। हम सब काजू उत्पादकों को हर तरह से सहायता करने उत्सुक हैं।‌ काजू यह गोवा का तुरंत पैसा देनेवाली फल खेती है। लेकिन वर्तमान समय में हम गोवा उत्पादकों को नए तंत्रज्ञान की सहायता से अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वर्तमान खेतीबाड़ी को इस महोत्सव की उपलब्धियों से लाभकारी व्यावसायिक इंडस्ट्री बनाने का सपना डॉ दिव्या राणे तथा स्वाती सालगांवकर ने देखा है।‌ इस महोत्सव के माध्यम से काजू इंडस्ट्री से जुड़े उत्पादक किसानों के साथ महिला सहायता ग्रुप, तथा पर्यटन को नई दिशा और पहचान मिलेगी। इससे इको-ग्रामीण पर्यटन क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा।

इस मौके पर वन मंत्री विश्वजीत राणे ने गोवा राज्य वन विकास विभाग के संबंधित जानकारी देनेवाली वेबसाइट का लोकार्पण किया गया और गोवा वनसंपदा के विषय में अधिक जानकारी के लिए वन विभाग की इस नई वेबसाइट को देखने की अपील की है।


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