एसपी कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी और सरपंच पति कर रहें अवैध भट्ठे का निर्माण

छुरा(गंगा प्रकाश)।:-छुरा क्षेत्र में इन दिनों बेधड़क अवैध ईट भट्‌ठे चल रहे हैं। इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हाने से अवैध ईट भट्‌ठों की संख्या दिन व दिन बढ़ती जा रही है। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो रही रहा है। साथ ही राजस्व को होने वाले आय का भी नुकसान हो रहा है।शिकायत के बाद भी अब तक खनिज विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की हैं।हालांकि कुछ स्थानों में कागजी कार्रवाई करते अवैध वसूली कर खानापूर्ति की जाती रही है। इससे ईंट भट्‌ठा संचालकों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं ये लोग बड़े पैमाने पर ईट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। छुरा ब्लॉक में अवैध ईंट भट्ठा का गोरखधंधा खूब फल फूल रहा है।सारे नियमो को ताक में रखकर जगह जगह ईंट भट्ठे का निर्माण और इसे पकाने हरे भरे पेड़ो की कटाई लगातार जारी है।लेकिन इस ओर किसी भी जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है।नतीजन अवैध ईंट भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद है और ईंट के कोचिया उल्टे ही पत्रकारों को पत्रकारिता सीखाने की बात कहने से भी बाज नहीं आ रहा है।जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है की चोरी भी और सीना जोरी किस तरह से कर लेते है ये लोग।

तहसील व ब्लॉक मुख्यालय छुरा से 4 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत दादरगांव पुराना में पंचायत के पीछे के रास्ते से कारीदादार जाने वाले मार्ग में अवैध ईंट भट्ठा का निर्माण हो रहा है।जिसमे लाखो की संख्या में लाल ईंट का निर्माण हो रहा है।जिसके लिए खनिज विभाग से किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नहीं लिया गया है।उक्त अवैध ईंट भट्ठे का संचालन पुलिस विभाग व एसपी कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी विक्रम सिंह ध्रुव द्वारा बेखौफ किया जा रहा है।जिस पुलिस के कर्मचारियों को कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है वही सारे नियमो को ताक में रखकर अवैध ईंट भट्ठे का निर्माण कर कानून को ठेंगा दिखाने में लगे है।वही इस ईंट भट्ठे को संचालन में ग्राम पंचायत दादरगांव के सरपंच पति की मिलीभगत की जानकारी हमारे सूत्रों से मिली है।जो पड़ताल करने गए मीडियाकर्मी को पत्रकारिता सीखाने की बात लोगो से कह रह है।अक्सर छुरा ब्लॉक में देखा जाता है की महिला सरपंच पति अपने आपको किसी कलेक्टर से कम नहीं समझता और पूरे पंचायत के हर गतिविधि का संचालन सरपंच पति ही पंचायती राज अधिनियमों को ताक में रखकर करता है।जिस पर लगाम लगाने प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है।तो वही जब कोई भी मीडियाकर्मी पंचायत क्षेत्र में पड़ताल कर खबर कवरेज करता है तो उनके कार्य में भी हस्तक्षेप करने से भी बाज नहीं आते।जो ईट भट्ठा के पड़ताल में साफ देखने को मिला। जहा सरपंच पति बोल रहे है की कौन पत्रकार है जो मेरे ईंट भट्ठे में पड़ताल किया है उसको मैं पत्रकारिता सिखाऊंगा की बात लोगो को कहते फिर रहे है।लेकिन पत्रकारिता क्या होती है नियम क्या होता है इसका पाठ उसको जरूर सिखाएंगे।इस पत्रकारों को पत्रकारिता सीखाने की बात को लेकर हमने सीधे सरपंच पति वेद राम दीवान से उनके मोबाइल नंबर पर सीधा बात कर उनका पक्ष लिया।जिस पर उसने क्या कहा एक नजर उसकी बयान पर..

मेरा तो नही है विक्रम सिंह ध्रुव का खेत है, बना रहे है वो ईंट ,मेरे को तो पत्रकारिता के बारे में नालेज नही है,नही भैया मैं पत्रकारों को कैसे सीखा पाऊंगा पत्रकारिता भई।

नियमों को ताक पर रख संचालित है भट्ठा

जानकारों की मानें तो बिना खनन राजस्व जमा किए और बिना पर्यावरण और प्रदूषण विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र के ही भट्ठा को संचालित किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन ईंट भट्ठों में नाबालिगों से भी काम धड़ल्ले से लिया जाता है। बिना खनन टैक्स जमा किए ईंट भट्ठा का संचालन किया जाना लघु खनिज नियम का उल्लंघन है। कानून कहता है कि ऐसे ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है। भट्ठा संचालन के लिए प्रमाण पत्र लिया जाना अति आवश्यक है। जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किये बिना ही छुरा क्षेत्र में अबैध रूप से ईंट भट्ठे संचालन किया जा रहा है।

नियम कहता है…

  • ईंट भट्ठे के संचालन आबादी से दो सौ मीटर से दूर होना चाहिए
  • मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी
  • लोहे के बजाय सीमेंट की चिमनी होनी चाहिए
  • पर्यावरण लाइसेंस और प्रदूषण विभाग से अनुमति जरूरी
  • 750 एसएमसी से अधिक प्रदूषण नहीं होना चाहिए

लेकिन इन सब नियमों को ताक पर रखकर ईंट भट्ठा का संचालन अवैध रूप से होता है। जिस पर कार्रवाई जरूरी है। मामले पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)छुरा ने आवेदन मिलने की बात करते हुए जांच किए जाने की बात कही। अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठा संचालकों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पर्यावरण प्रदूषण का खतरा

क्षेत्र में चल रहे इन ईंट भट्टों से अब पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। रहवासी क्षेत्र के पास लगे होने से दिन भर धुंआ फैलता रहता है। कोयला का उपयोग न कर जंगलों की लकड़ी, भूसा, प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

भट्ठे लगाने के नियम

अगर किसी व्यक्ति को ईंट भट्टे का व्यापार करना है तो उसे मिट्टी उत्खनन के लिए लीज की स्वीकृति लेने के लिए पर्यावरण विभाग की एनओसी, वन विभाग की एनओसी, ग्राम पंचायत की मंजूरी, तहसील की एनओसी, निर्माण करने वाले लोगों का लायसेंस आदि तैयार कराना होगा। तब ही आप कही ईंट भट्टों का व्यापार कर सकते हैं।


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