Cgnews:शहर में दहशत का माहौल, शहर की गलियों में पहुंचे दो दतैंल हाथी – बाल-बाल बचे कई नागरिक

 

बालोद (गंगा प्रकाश)। जिले के दल्ली राजहरा शहर में शुक्रवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया जब दो जंगली दतैंल हाथियों का जोड़ा अचानक शहर की सीमा में प्रवेश कर गया। यह घटना वार्ड क्रमांक 13 स्थित घोड़ा मंदिर के समीप सुबह लगभग 4:30 बजे की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथियों को सबसे पहले कुंजाम टोला क्षेत्र की ओर से शहर में आते हुए देखा गया, जो बाद में चिखली की ओर निकल गए।

आपको बता दें कि यहां शहर में बड़ी गंभीर दुर्घटना होते-होते बच गई। अंधेरा होने के कारण सामने से आ रहें लोगों को हाथी नहीं दिखाई दिया। सामने अचानक हाथी के दिखने और हाथियों के चिंघाड़ने की तेज आवाज से लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। कुछ दिनों से आसपास के क्षेत्र में जंगली हाथियों के देखे जाने की पुष्टि हो रही थी। दतैंल हाथियों और उनके शहर में विचरण की घटना भी सीसीटीवी कैमरे में कैद होने से खुलासा हुआ कि शहर में हाथी की आमद हो चुकी है। शहर के नागरिकों भारी दहशत का माहौल है।

अंधेरे के कारण आमजन को इन हाथियों की मौजूदगी का अंदाजा नहीं हो सका, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सामने से आ रहे राहगीर जब अचानक हाथियों के सामने आए, तो दहाड़ सुनते ही जान बचाकर भागे। शुक्र रहा कि कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ। यह पूरी घटना पास ही लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दतैंल हाथियों की आमद शहर में हो चुकी है।

पिछले कुछ दिनों से आसपास के जंगलों और गांवों में जंगली हाथियों की उपस्थिति की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन पर्याप्त सतर्कता के अभाव में अब हाथी शहर के भीतर तक पहुंच गए हैं।

हाथियों के शहर में घुसने की पुष्टि होते ही क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। नागरिकों में भय व्याप्त है और लोग अपने घरों से निकलने में हिचकिचा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से शीघ्र कार्रवाई कर हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने की मांग की जा रही है। वहीं दल्ली राजहरा वन विभाग चैन की नींद सो रहा है। “लोगो का कहना है कि जो विभाग अपने नाके पर हुए अवैध कब्जे को ही हटा नहीं पा रहा है उन्हें शहर में हाथियों की आमद की खबर कहां हो सकती है।” दल्ली राजहरा वन परिक्षेत्र में वन परिक्षेत्र अधिकारी मूलचंद शर्मा के प्रमोशन के बाद से ही क्या वन विभाग के कारिंदो ने जंगल में जाना ही छोड़ दिया है? ग्रामीणों का कहना है कि कभी कभार ही वन विभाग के कर्मचारी जंगल में दिखाई देते है। वहीं ज्यादातर अपनी मासिक वेतन लेकर मौज कर रहे है। सबसे शर्मनाक बालोद वन मंडलाधिकारी बलभद्र सरोटे का नियंत्रण अपने अधीनस्थ कर्मचारियों तक ही नहीं है। उनके आदेश पर कोई सुनवाई ही नहीं होती ऐसा प्रतीत होता है।

हाथियों को गांव व शहर से बाहर खदेड़ने का दल्ली राजहरा वन विभाग के पास कोई पुख्ता उपाय है ही नहीं है। क्या वन विभाग के कर्मचारी भी हाथियों के आने की दहशत से हाँफ रहे है?

छत्तीसगढ़ में वन विभाग द्वारा जंगली हाथियों को गांव और शहरों से दूर रखने के लिए कई प्रभावी योजनाएं और तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और दोनों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना है। प्रमुख योजनाएं और उपाय निम्नलिखित हैं:

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ सालों से हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वन विभाग ने ऐसे में अब एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एप्लिकेशन विकसित किया है। इस एप्लिकेशन के माध्यम में हाथियों की आवाजाही के बारे में पता चल सकेगा। इस ऐप का नाम ‘छत्तीसगढ़ एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट’ रखा गया है।

वन विभाग ने ‘हाथी अलर्ट ऐप’ और ‘एलीफेंट ऐप’ विकसित किए हैं, जो हाथियों की गतिविधियों की निगरानी करते हैं और संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अलर्ट भेजते हैं। इन ऐप्स के माध्यम से हाथियों की लोकेशन ट्रैक की जाती है और आसपास के 10 किमी क्षेत्र में रहने वाले पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर स्वचालित संदेश और कॉल के जरिए चेतावनी दी जाती है।

राज्य में सबसे ज्यादा हाथी की संख्या सरगुजा संभाग के साथ बिलासपुर संभाग के कोरबा, रायगढ़ में है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोरबा, रायगढ़ तथा सरगुजा वनमंडल के दो हजार किलोमीटर के एरिया को हाथियों के लिए संरक्षित कर लेमरू प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है। वन विभाग ने एक ऐप विकसित किया गया है, जिसे सक्रिय करने पर उसमें से निकलने वाली ध्वनि और प्रकाश से हाथी डरकर जंगल की ओर भाग जाते हैं। इस योजना के तहत हाथी प्रभावित गांवों में हाई वोल्टेज लाइट्स और सायरन सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिन्हें ऐप के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

वन विभाग ने हाथी प्रभावित गांवों में ‘हाथी मित्र दल’ का गठन किया है। ये दल हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, लोगों को सतर्क करते हैं और हाथियों के मूवमेंट की जानकारी साझा करते हैं। इसके अलावा, ‘गज यात्रा’ जैसे जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को हाथियों के साथ सह-अस्तित्व के बारे में शिक्षित किया जाता है।

कोरबा जिले में हाथियों को गांवों में प्रवेश से रोकने के लिए ‘एलीफेंट प्रूफ ट्रेंच’ (ईपीटी) का निर्माण किया जा रहा है। ये खंदकें तीन मीटर चौड़ी और डेढ़ मीटर गहरी होती हैं, जो हाथियों को गांवों में प्रवेश करने से रोकती हैं। इस परियोजना की शुरुआत परला और कापा नवापारा गांवों से की गई है।

वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए ड्रोन और नाइट विजन उपकरणों का उपयोग शुरू किया है। इससे हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकती है और समय पर आवश्यक कार्यवाही की जा सकती है।

हाथियों द्वारा फसलों या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर वन विभाग द्वारा प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान किए जाते हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और दोनों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं शहरवासियों तथा ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग द्वारा ठीक से गश्त नहीं की जाती। हाथियों के मूवमेंट की निगरानी के लिए ड्रोन या अन्य तकनीकी सहायता ली जाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

 


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