गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। नगर के विद्या निकेतन अंग्रेजी मिडियम शाला में आज बसंत पंचमी का महोत्सव मातृ-पितृ पूजन के साथ काफी ही आकर्षित एवं परंपरानुसार मनाया गया। कार्यक्रम में शाला के छात्र-छात्राओं के माता-पिता, दादा-दादी का आमंत्रित कर बच्चों द्वारा अपने अपने पालकों की पूजा, चरणवंदन एवं आरती करते हुए जीवन में उनके महत्व को बताते हुए बच्चों को उनका सम्मान करने की प्रेरणा दी गई। इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए शाला के संचालक नरेन्द्र रात्रे ने कहा कि मातृ-पितृ यह संस्कृत शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है माता-पिता इस संसार में माता-पिता भगवान से भी बढ़ कर होते है। माता-पिता हमारे जीवन का आधार है और वही हमारे सच्चे गुरू और मित्र होते है। शास्त्रों में भी माता-पिता की सेवा करके ही श्री गणेश जी देवों में प्रथम पूजन के अधिकारी बने। श्रवण कुमार भी अपने माता पिता कांवर लेकर तीर्थ यात्रा पर निकले थे जो अमरत्व को प्राप्त हुए। शाला के प्राचार्य श्री खान सर ने बच्चों से कहा कि धु्रव जैस बालक ने भी अपने माता पिता के आज्ञा का पालन करके सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। माता पिता के दिए हुए संस्कारों चलकर ही हम अपना जीवन धन्य कर सकते है। माता की ममता और पिता के अनुशासन से ही बच्चों का जीवन महान बनता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा संस्कृत भाषा में रचित पद्य पुराण के सृष्टि खण्ड में बताया गया है। सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेव मयः पिता। मातरम पितरं तस्मात सर्वयतेन पुजयेत। अर्थात माता सभी तीर्थो से बढ़कर है और पिता स्वयं देवताओं का स्वरूप है। इसलिए सभी प्रकार से श्रद्धापूर्वक माता पिता का पूजन करना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित पालक अंकित पहाड़िया ने मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जो माता पिता की प्रदक्षिणा करता है उसके द्वारा सातों द्वीपों से युक्त पृथ्वी की परिक्रमा हो जाती है। इसलिए भगवान श्री गणेश जी ने भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की थी। छत्तीसगढ़ में भी पूर्व मुख्यमंत्री जी ने 9 फरवरी 2015 को मातृ पितृ दिवस मनाने आदेश किए तब से 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस मनाया जाता है। माता पिता अपने बच्चों के लिए आदर्श होते है। बच्चे जीवन भर माता पिता के ऋण से ऋण नहीं हो सकते। शास्त्रों के अनुसार माता पिता के चरणों को ही तीर्थ स्थान माना गया है। इसलिए सभी जनों को चाहिए कि माता पिता की पूजा सिर्फ मातृ पितृ दिवस के ही दिन न करके जीवन भर करना चाहिए। शाला पालक शिक्षक समिति की सदस्य श्रीमती पूजा जैन ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी माता पिता अपने बच्चों की भलाई ही चाहते है। बचपन से ही जीवन मूल्यों की शिक्षा देते है। और यही जीवन मूल्य की शिक्षा हमें जीवन संस्कारवान बनाते है समाज में स्थान दिलाते है और बुरे समय में हमारे पथ प्रदर्शक बनते है। माता पिता द्वारा दिए गए उपदेश ज्ञान ही हमारे जीवन पर अमिट छाप छोड़ती है। और माता पिता के आशीर्वाद से ही हम जीवन में फलीभूत होते है। अस्तु अपने अपने माता पिता का नित्य प्रतिदिन यथयोग्य पूजन करें। इस मातृ पितृ दिवस पर मै भी सर्व मातृ पितृ को सादर नमन करती हूॅ। मातृ पितृ देवोभ्यों नमः।


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