आवास निर्माण ही नही एवं आवास की राशि अन्य के खाते में डालने का एक और मामला

संविदाकर्मि से बने प्रभारी सीएमओ सी पी श्रीवास्तव के कार्यकाल का कारनामा

राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराने दिए निर्देश

लैलूंगा (गंगा प्रकाश)। नगर पंचायत लैलूंगा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में जमकर धांधली सामने आ रही है।तत्कालीन संविदाकर्मि से प्रभारी सीएमओ बने सी पी श्रीवास्तव ने धांधली व भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला। परत दर परत कारनामे की कलाइयां खुलती जा रही हैं। 

पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत किफायती आवास के लिए एवं सभी के लिए आवास की सुविधा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है।जिसमे लाभार्थी के सीधे खाते में आवास की राशि ट्रांसफर की जाती है। जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, धांधली को रोकना है एवं शत प्रतिशत राशि हितग्राही को मिले। 

नगर पंचायत लैलूंगा में प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी रहे सी पी श्रीवास्तव के काले कारनामे एक एक कर सामने आ रहे हैं।लंबे अरसे से पदस्थ रहे प्रभारी सीएमओ का कार्यकाल शुरू से ही विवादस्पद रहा है। गबन, घोटाले,धांधली, आर्थिक अनियमितता के अनेक प्रकरण उजागर हुए। विगत कुछ दिनों से प्रधानमंत्री आवास हुई धांधली सामने आ रही है। अपात्र लोगो को आवास की स्वीकृति दी गयी। पति पत्नी दोनों के नाम से आवास पास हुए। हितग्राही के खाते में राशि डालने की जगह पंचायत कर्मी के खाते में अंतरित करने का अनूठा मामला सामने आया। पत्नी मीना शाह का मकान बना और राशि मिल गयी। सुखदेव शाह का आवास ही नही बना और पूरी राशि का आहरण भी हो गया। ग्राउंड रिपोर्ट में जनकर्म संवाददाता ने पाया कि हितग्राही सुखदेव शाह की तीन किश्त की राशि सुखदेव सिदार के खाते में अंतरित की गयी और आहरण भी कर लिया गया। दरअसल सुखदेव शाह दंपति के नाम से स्वीकृति देकर एक आवास की राशि का गबन का प्लान बनाया गया था। जिसके लिए बाकायदा मिलता जुलता नाम का हितग्राही खोजा गया। पूर्व पंचायत कर्मी सुखदेव सिदार के खाते में सुखदेव शाह की राशि डाली गयी। मामला उजागर होने एवं फंसने के डर से राशि निकाय खाते में चार साल बाद वापस कर दी गयी है। अब यह जानकारी नही मिल पा रही है कि उक्त वापस की गयी रकम किसके द्वारा की गयी है। और क्यो की गयी है। जानकारों की मानें तो गबन कई आवास में किया गया है और एक कि राशि जमा कराया जाने के प्रति निहित उद्देश्य है। जैसे जैसे खुलासे होंगे सब मे इसी जमा वाउचर को प्रस्तुत करने की योजना की संभावना से इनकार नही किया जा सकता।

अब एक और मामला सामने आया है जिसमे सनकुँवर मुंडा/ रंजीत मुंडा के नाम से आवास स्वीकृत हुआ जिसे बनाया ही नही गया लेकिन आवास की राशि फर्जी जिओटैग एवं फ़ोटो अपलोड कर निकाल ली गयी है। लाभार्थी को पता ही नही है कि उसका आवास स्वीकृत भी हुआ है। इस मामले में फिर से राशि को मिलते जुलते नाम के खाते में डाला गया है। 

जब आवास बना ही नही तो जिओटैग व फ़ोटो अपलोड भी फर्जी

भुगतान के दोषी मुख्य नगरपालिका अधिकारी, इंजीनियर, के साथ निजी कंपनी के कर्मचारी आवास मित्र, CLTC (सिटी लेबल टेकनीकल कंसल्टेंट) आवास स्वीकृत होने के बाद बोलचाल की भाषा मे आवास मित्र यानी सर्वेयर स्वीकृत स्थल का जिओटैग करता है।एवं सिटी लेबल टेकनीकल कंसल्टें निर्माण स्थल की फ़ोटो अपलोड करता है। फ़ाइल में नोटसीट इंजीनियर के लिखने के बाद भुगतान अधिकारी डीबीटी के माध्यम से राशि हितग्राही के खाते में डालता है। हितग्राही सुखदेव शाह के मामले में इन चारों ने शासकीय राशि गबन की साजिश रची।बिना आवास बनाये फर्जी जिओटैग, फोटो अपलोड,इंजीनियर की फर्जी नोटशीट, हितग्राही की जगह मिलता जुलता नाम के खाते में भुगतान प्रथम दृष्टया ही शासकीय राशि के गबन की साजिश रचने के प्रमाण सामने आ गए है।

आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार और भी अनेक भ्रष्टाचार व धांधली किया गया है शासकीय राशि के गबन की सजीस का फुल प्रूफ योजना बनायी गयी थी जिससे धांधली पकड़ी न जा सके।नगर सीमा के बाहर ग्रामीण इलाके में रहने वाले का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में जोड़ा गया है। एक ही घर मे दो लोगो (मां और अविवाहित बेटे) को आवास दिया गया तथा कई किराए की कॉलोनी के मालिक का आवास स्वीकृत कराया गया। उक्त सभी घोटाले जांच में सामने आ रहे है। सूचना के अधिकार में मिली हितग्राही लिस्ट से खुलासे हो रहे हैं।राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई व्यापक धांधली व भ्रष्टाचार में संलिप्त दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश विगत दिवस हुई समीक्षा बैठक में दिया गया है।


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