गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद भी नगर में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन जैसे का तैसा पड़ा हुआ है। पक्के मकान के इंतजार में लोग अब भी परेशान है। नगर में पीएम आवास बनाने हेतु हितग्राहियों ने ठेकेदारों को ठेका दिया था। लेकिन शासन से इस योजना का पैसा नहीं मिलने के कारण अधूरा छोड़ दिया है। जिसके कारण किराए के मकान में रहने हितग्राही लोग मजबूर है। वहीं डेढ़ महीने के बाद वर्षाकाल प्रारंभ हो जाएगा। जिसके चलते हितग्र्राहियों की परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। आखिर इंतजार कब तक। हितग्राहियों ने ठेकेदारों को दिया था ठेका, पर पैसा नहीं मिलने पर काम अधूरा छोड़ दिया। शहर में पीएम आवास के मकान आज भी अधूरे पड़े हुए है। नगर में लगभग 1000 कर लक्ष्य है जिसमें अभी तक सिर्फ आधे बन पाए है। नगर पालिका के अधिकारी का कहना है कि इस योजना के शासन से रूपए मिलने के बाद ही लोगों के खातों में पैसा डालते है। गरीबों के खुद का पक्का घर का सपना पूरा करने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ जनता को समय पर नहीं मिल रहा है। मकान निर्माण के लिए मिलने वाली किश्तों में हो रही देरी के कारण नगर में सैकड़ों गरीबों के मकान आज भी अधूरे पड़े हुए है। जिसकी वजह से गरीबों को किराए के मकान में रहना पड़ रहा है। लिहाजा उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल से पीएम आवास निर्माण की गति धीमी हुई थी। जो अब तक वास्तविक गति नहीं पकड़ पाई है। शहर में लगभग 1000 आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें आधे मकान ही पूर्ण हो पाए है। वहीं कई मकान अधूरे है और कइयों मकान का काम शुरू ही नहीं हो पाया है। हितग्राहियों ने मकान स्वीकृत होने के बाद जिन ठेकेदारों को मकान निर्माण का ठेका दिया है। उन्होंने पैसा नहीं मिलने पर काम अधूरा छोड़ दिया है। लिहाजा नगर में सैकड़़ो मकान पैसों के अभाव में नहीं बन पा रहे है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को चार चरणों में पैसे जारी किए जाते है। इनमें नींव निर्माण, छज्जा लेवल, लेंटर और अंत में मकान का प्लास्टर कंपलीट होने के बाद अंतिम किश्त मकान मालिक के खाते में डाला जाता है। शहर के लगभग सभी वार्डो में यही हाल है। हितग्राहियों ने बताया कि पीएम आवास स्वीकृति होने के बाद उन्हें मकान निर्माण का नक्शा और अनापत्ति प्रमाण दिया गया। इसके लिए हमने अपनी जमीन संबंधी सारे दस्तावेज जमा किए है। इसी तरह शहर के काफी पीएम आवास मकान अधूरा पड़ा है। सर्वे रिर्पोट तैयार किया गया है। उसके बाद अपने खर्च पर काम शुरू किया गया। कुछ पैसे कर्ज पर लिए गए। लेकिन काम अधूरा होने के कारण अब उनके कर्ज का ब्याज बढ़ रहा है तो वहीं मकान भी अधूरा पड़ा है। अधिकारी सुन नहीं रहे है कर्मचारी हर बार कुछ न कुछ बहाना बनाकर वापस लौटा देते है। पैसा नहीं होने की वजह से ठेकेदार भी काम बंद कर दिए है। हितग्राहियों ने बताया कि पिछले एक वर्ष से उनकी प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुई है। जिसकी राशि समय पर जारी नहीं होने के कारण उनका मकान अब तक नहीं बन पाया है। उनका परिवार किराए के मकान में रह रहा है। आर्थिक तंगी और उपर से किराए के मकान का खर्च बढ़ गया है। नगर पालिका सीएमओ ने कहा कि शासन से राशि मिलने के बाद हितग्राहियों के खातों में पैसा डाल दिया जाता है। यह राशि मकान निर्माण के साथ अलग अलग किश्तों में जारी होती है। हितग्राहियों का शासन के गाइडलाइन के हिसाब से जैसे जैसे निर्माण पूर्ण होता है। उसका रेंडम जांच किया जाता है। फोटो खींची जाती है। उसके बाद शासन से राशि की मांग की जाती है। कई बार शासन से पूरा पैसा नहीं आता है। इसलिए प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों के खाते में पैसे डाला जाता है। इन हितग्राहियों को समय पर पैसे नहीं मिलने के कारण घर नहीं बन पाए है। हितग्राहियों ने बताया कि उनके मकान को ठेकेदार ने अधूरा छोड़ दिया है। पैसा नहीं होने के कारण उसका भुगतान भी नहीं हो पाया। इसकी वजह से उसने काम बंद कर दिया है। किश्त की राशि आने बाद ही अब काम शुरू हो पाएगा। खुद का पक्का मकान होने का सपना सपना बनकर ही रह गया है।
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