नदी की अस्तित्व समाप्त होने का कगार पर –

पंचायत सचिव होने के उपरांत भी शासकीय भूमि पर कब्जा एवं खरीद बिक्री का आरोप ग्रामीणों ने लगाया

लखनपुर (गंगा प्रकाश)। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में  शासकीय जमीनों की खरीदी बिक्री जोरों शोरों से चल रहा है। जहां आदिवासी वर्ग के लोगों को पैसे का लालच देकर उनकी जमीन खरीद कर राजस्व विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों से साठ गांठ कर ऊंचे दामों में खरीद बिक्री की जा रही है।

कुछ ऐसा ही मामला दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र लखनपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम तिरकेला में देखने को मिला जहां पंचायत सचिव के द्वारा मझवार जनजाति के ग्रामीण से उसके कब्जे के शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री की गई है। पंचायत सचिव के द्वारा शासकीय जमीन की खरीदी के बाद उसे खेत बनवाया गया साथ ही नदी के भूमी पर भी कब्ज़ा कर लिया गया। ग्राम तिरकेला नदी पर बने पुलिया के किनारे  1 एकड़ से अधिक भूमी मझवार जनजाति के ग्रामीण का  शासकीय भूमि था। जिस पर वह खेती कर जीवन यापन करता था। पंचायत सचिव के द्वारा आदिवासी ग्रामीण को पैसे का लालच देकर शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री करते हुए उसे जमीन को खेत बनाकर नदी की जमीन को भी कब्ज़ा कर लिया गया। और लगातार नदी के भूमि पर खेत बनाने के आड़ में कब्जा किया जा रहा है ।ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि कुछ वर्ष पूर्व तक नदी की चौड़ाई काफी थी। जिस पर लगभग पांच  सौ मीटर में रपटा पुल बना हुआ था। और लोग उस मार्ग से आना-जाना किया करते थे। क्षेत्र के लोगों की मांग पर विगत वर्ष पूर्व शासन के द्वारा बड़े पुलिया का निर्माण किया गया। पुलिया के निर्माण होते हैं नदी के भूमि पर कब्जा कर खेत बनाने का खेल शुरू हो गया।आज की स्थिति में नदी की चौड़ाई इतनी कम हो गई है कि बड़ी नदी नाले के  रूप में तब्दील हो गया है। बताया जाता है कि गर्मी के समय में जब नदी में पानी कम होता है तब लोग अपने खेत को नदी की ओर बढ़ना शुरू करते हैं और धीरे से नदी के भूमि पर कब्जा कर लिया जा रहा है। लेकिन इस ओर सरकारी अमला ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का कहना कि जिस प्रकार से तिरकेला नदी पर लगातार कब्जा किया जा रहा है इससे नदी का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। 

तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी ने जांच के दिए थे निर्देश

पूर्व में ग्रामीणों के द्वारा तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बि आर खांडे से शिकायत की गई थी। जिसके बाद तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने हल्का पटवारी को जांच कर धान फसल को जप्त करने के निर्देश दिए थे। परंतु यह मामला ठंडा बस्ते में चला गया और इसी बीच पंचायत सचिव के द्वारा शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री की गई जो जांच का विषय है।अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन के द्वारा शासकीय जमीन खरीदी बिक्री के मामले में पंचायत सचिव के ऊपर किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।

नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा पहाड़ी नदी नाले में तब्दील 

सरकार एक तरफ जल संचय के लिए कई योजनाएं चला रही है।  क्षेत्र में अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब निर्माण और तालाबों नदियों का जीर्णोद्धार कर जल संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन क्षेत्र के पहाड़ी से निकली तिरकेला नदी की जमीन को ही अतिक्रमण किया जा रहा है। नदी के दोनों तरफ के भूस्वामी भूमि का अतिक्रमण कर रहे हैं।  इससे नदी के अस्तित्व पर खतरा बढ़ गया है।

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