गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। इन दिनों परीक्षा परिणामों का दौर चल रहा है। विशेषकर 10 वीं, 12 वीं एवं कॉलेज के परीक्षा परिणामों में वांछित एवं दोस्तों, प्रतिस्पर्धी छात्रों आदि से कम परीक्षा परिणाम मिलने से से भावुक छात्र कई प्रकार के अवांदित अथवा आत्मघाटी कदम उठा लेते है। इस स्थिति पर स्वयं को सामान्य रखने एवं भावावेश में विद्यार्थी गलत निर्णय न लेते इसके लिए प्रशासन अनेक गोष्ठिया, पालक-छात्र सम्मेलन आदि करवाकर लोगों को जागृत करने का प्रयास कर रहे है। महाविद्यालय एवं कक्षा 10 वीं, 12 वीं के परीक्षा परिणाम प्रतिवर्ष घोषित किए जाते है विद्यार्थियों के अपेक्षित परिणाम नहीं आने से विद्यार्थी प्रायः तनाव में रहते है तथा कुछ विद्यार्थी तो डिप्रेशन में चले जाते है, प्रशासन द्वारा इस विषय को गंभीरता से लेते हुए फिंगेश्वर-राजिम अनुविभाग की एसडीएम अर्पिता पाठक ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने वाले है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के पहले या बाद में विद्यार्थियों को निराश होने या तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है। पालकों को भी बच्चों से बहुत अधिक एक्सपेक्टेशन नही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी बच्चें में यह प्रवृत्ति पायी जाती है या इस संदर्भ में कोई भी सूचना मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 104/14416 आरोग्य सेवा निःशुल्क परामर्श पर सूचित किया जा सकता है। यह टोल फ्री नंबर संचालित रहेगा। सूचना प्राप्त होने पर विद्यार्थियों के हित में तत्काल समाधान उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि कई बच्चें अपेक्षा अनुसार परिणाम नहीं ला पाते इस स्थिति में तनाव नहीं लेना चाहिए। कम नंबर लाने का मतलब यह नहीं है कि नॉलेज कम है, कई व्यक्तित्व ऐसे है जो अपने बचपन में अच्छे नंबर नहीं ला पाए पर आगे जाकर उन्होंने बहुत ख्याति प्राप्त की। उन्होंने शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों व अधिकारियों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के आवश्यक निर्देश दिए। एसडीएम अर्पिता पाठक ने अपने अनुभव और नवजीवन के बारे में विस्तार से बताते हुए पालक व जन सहयोग आधारित कार्यक्रम, स्वयंसेवी की मदद लेने की प्रक्रिया और क्रियान्वयन के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कुछ ऐसे व्यक्तित्व का उदाहरण दिया। जिनके प्रारंभिक जीवन में चुनौतियों थी परंतु बाद में वे सफल हुए। उदाहरण के लिए बिल गेट्स, अल्बर्ट आइंस्टीन, थॉमस एडिसन। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को हमेशा इनकरेज करना चाहिए, फैमिली इनवायरमेंट हमेशा पॉजिटिव होना चाहिए, बच्चों को अन्य बचें के साथ कंपेयर नहीं करना चाहिए और हमेशा बच्चों के साथ टाइम बिताना चाहिए। उन्होंने अपने उदबोधन में बताया कि बहुत बार ऐसा देखा गया है कि बहुत अच्छे रिजल्ट लाने वाले बच्चों का परिणाम खराब हो जाता है तो ऐसे बच्चे अपने रिजल्ट को एसेप्ट नही कर पाते, ऐसे बच्चे तनाव ग्रसित हो जाते है कभी कभी अपने बड़े भाई या बहनों के साथ कंपैरिजन करने पर भी वह अपने आप को कुठित महसूस करते है। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि कैरियर काउसिंलिंग विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बच्चों के लिए 5000 से अधिक करियर के ऑप्शन है तथा बच्चों में 21 वीं सदी सेंचुरी स्किल विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता है। एसडीएम ने कहा कि परीक्षा के बाद बच्चे तनाव ग्रसित हो जाते है तथा गलत रास्ते पर चले जाते है अतः इस हेतु तनाव प्र्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है। गौरतलब है कि पहली बार राज्य में परीक्षा परिणाम से विद्यार्थियों में उत्पन्न विभिन्न अवसाद और अन्य जानलेवा समस्याओं से निजात पाने तथा उन्हें पहचान कर नियंत्रित करने, समाज, पालक, स्वयंसेवियों, शिक्षकों के माध्यम से निगरानी प्रणाली विकसित करने मानसिक विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।


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