गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। अंचल में रबी फसल लगाने किसान तेजी से खेतों में काम कर रहे है। खरीफ फसल की नरई को पलारी के रूप में खेतों में जलाकर पर्यावरण के साथ साथ शासन की अपील सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का खुल्लमखुल्ला उल्लघंन किया जा रहा है। परंतु ऐसे लापरवाह कृषकों पर कार्यवाही न होने से इनके हौसले बुलंद है। छत्तीसगढ़ में जहां एक और पराली जलाने पर पाबंदी लगा दी गई है वहीं दूसरी और किसान अंधाधुन अपने खेतों में पराली को आग हवाले कर रहे है नगर से लगे हुए आसपास ग्रामीण क्षेत्र के खेतों में धान की पराली में आग लगा दी जा रही है। वहीं शासन ने प्रदूषण के मद्देनजर बचे अपशिष्ट वह पैरा नरवाई पराली जलने पर प्रतिबंध लगाई हुई है खेतों को आगे हवाले करने वालों के खिलाफ राजस्व विभाग ने कार्यवाही में नहीं की है। पाबंदी होने के बावजूद भी क्षेत्र में ढलने से नरवाई जल रहे है। वही खरीफ सीजन के बाद क्षेत्र में कई किसान रबी फसल लगाने व मेड़ को साफ करने के लिए भी खेत में आग लगा देते है खरीफ फसल के बाद खेतों में बचे हुए फसल के ठूंठ व आवश्यक खरपवार को जलते है अक्सर खेतों की मेड को साफ करने के चक्कर में आग सभी और फैल जाती है कभी कभी आसपास के गांव की ओर भी पहुंच जाती है। पराली जलाने के नुकसान इससे वायु प्रदूषण के साथ साथ जमीन को भी नुकसान पहुंचता है। पराली का धुआ उठाते हुए वायुमंडल में आ जाता है जिस दिन में भी धंध छा जाती है लोग साफ सुथरा हवा के लिए तरसने लगते है पराली जलाने से किसानों को भी नुकसान होता है जिससे क्षेत्र के खेतों में बेधड़क होकर लोग खेतों में आग लग रहे है। प्रशासन में नियम विरूद्ध पलारी जलाने वालों पर सख्त कार्यवाही आपेक्षित है।
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