माँ मनी उद्योग में फर्नेस ब्लास्ट से मचा कोहराम! चार मजदूर झुलसे, दो की हालत नाजुक — प्रबंधन की लापरवाही से फिर लहूलुहान हुआ श्रमिक वर्ग!
पूंजीपथरा/रायगढ़ (गंगा प्रकाश)। बीती रात पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में स्थित माँ मनी इंडस्ट्री में अचानक हुई एक जोरदार फर्नेस ब्लास्ट ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया। हादसा इतना भयावह था कि आस-पास की फैक्ट्रियों तक कंपन की आवाज पहुंची। इस धमाके में चार मजदूर बुरी तरह झुलस गए, जिनमें से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है।
हादसे के बाद मजदूरों को आनन-फानन में जिंदल फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां दो मजदूरों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया है। घायलों की पहचान अनुज कुमार (35), सुधीर कुमार (47), रामानंद सहनी (40) और संजय श्रीवास्तव (52) के रूप में हुई है। परिजनों की आंखें अभी भी डर और चिंता से भरी हैं।

लापरवाही या सुनियोजित अनदेखी?
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मजदूरों से बिना किसी सेफ्टी इक्विपमेंट और प्रोटेक्टिव गियर के खतरनाक कार्य करवाया जा रहा था। कई मजदूरों के पास हेलमेट, आग प्रतिरोधी कपड़े या ऑक्सीजन मास्क तक नहीं थे। ऐसे में हादसे का होना एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है।
उद्योग प्रबंधन पर उठे सवाल, प्रशासन मौन क्यों?
इस दर्दनाक हादसे के बाद श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। सभी की जुबान पर एक ही सवाल है —
“क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है?”
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्योग विभाग और जिला प्रशासन कब जागता है। क्या कोई ठोस कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य हादसों की तरह कागज़ों में दफन कर दिया जाएगा?
क्या कहते हैं कानून और नियम?
औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम के तहत किसी भी फैक्ट्री को संचालन के लिए मानव सुरक्षा के स्पष्ट नियमों का पालन करना होता है। यदि यह सिद्ध होता है कि मजदूरों को बिना सुरक्षा साधनों के काम कराया गया, तो यह धारा 304-A (गैर इरादतन हत्या), 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) जैसी धाराओं के तहत दंडनीय अपराध बनता है।
यह हादसा न सिर्फ चार परिवारों की जिंदगी में अंधेरा ले आया है, बल्कि एक बार फिर यह सवाल उठा गया है — ‘विकास की चकाचौंध में मजदूरों की सुरक्षा कब तक अनदेखी की जाएगी?’
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