फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। भाद्रपद अमावस्या को मनाया जाने वाला पर्व पोला आज 14 सितंबर गुरुवार को मनाया जाएगा।नगर के पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि यह पर्व हमारे छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार है। इस समय बहन बेटियां अपनी मायके में रहकर यह पर्व मानती है। प्रत्येक घर में छत्तीसगढ़ की व्यंजन, खुरमी, ठेठरी, सोंहारी चौसेला बनाते हैं और मिट्टी की पोला में भरकर उनकी पूजा करते हैं। सवेरे बैल को स्नान कर कर उसे सजाया जाता है, फिर उन्हें दौड़ाकर बैल प्रतियोगिता करते हैं। जिस किसान का बैंल विजय प्राप्त करता है। उसकी फसल अच्छा होना तय मानते हैं। द्वापर युग में भाद्रपद अमावस्या अर्थात पोला के ही दिन कृष्ण जी ने पोलासुर का वध किया था। तो गोपियों ने पोलासुर दैत्य को कोसनें के लिए मिट्टी की पोला को तोड़ने लगी। और आक्रोश जताने लगी। तब से पोला में व्यंजन रखकर मिट्टी के पोला को तोड़ा जाता है। आज के दिन बच्चे नांदबैल और चक्की अर्थात मिट्टी की जांता की पूजा करके उन्हें खेलते हैं।श्री देव पंचांग के अनुसार इस बार तिथियो में कोई मतांतर नहीं है। सभी व्रत पर्व को मनाने की एक ही तिथि है। इसीलिए श्रद्धालु किसी प्रकार के संसय में ना पड़े।हरितालिका तीज का व्रत 18 सितंबरसोमवार एवं श्री गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना 19 सितंबर मंगलवार को किया जाएगा।
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