गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। अन्य खाद्य पदार्थो की तरह रोजमर्रा में लगभग प्रत्येक रसोई में उपयोग किए जाने वाले आलू एवं प्याज बेचने दैनिक एवं साप्ताहिक के साथ साथ ठेले में फेरी लगाकर बेचने वालों को भी अब आलू और प्याज विक्रय करने लाइसेंस बनान अनिवार्य किया जा रहा है। यानी आलू प्याज बेचने वालों को भी अब अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, वहीं रिटेल काउंटरों को रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जागरूकता अभियान के बाद सघन जांच की योजना पर प्रशासन ने काम करना चालू कर दिया है। आलू, प्याज और लहसुन पूरे साल मांग में रहता है। कोल्ड स्टोर तक तो सही लेकिन बाजार पहुंचने के बाद जैसी लापरवाही परिवहन, भंडारण और विक्रय में दिखाई जा रही है उससे गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की जानकारियां खाद्य एवं औषधि प्रशासन तक पहुंचने लगी है। फौरी तौर पर की गई जांच में शिकायतें सही मिली है। इसलिए अब इस क्षेत्र पर भी नियमों के परिपालन को लेकर लड़ाई बरतने की तैयारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने चालू कर दी है। उत्पादक क्षेत्र के बाद कोल्ड स्टोर यहां पहले से फूड एंड सेफ्टी लाइसेंस का लिया जाना अनिवार्य किया जा चुका है। अब वह कारोबारी भी अनिवार्यतता के घेरे में आ चुके है जो होलसेल बिजनेस करते है। याने थोक कारोबारियों को भी लाइसेंस बनवाना होगा। इस अनिवार्यता के बाद ही इन्हें कारोबार करने की अनुमति होगी। भंडार कक्ष में काम करने वाले श्रमिक को हेड कैप, मास्क, ग्लब्स और शूज देना होगा। अस्वच्छ वायु की निकासी के लिए एग्जॉट का लगाया जाना अनिवार्य है। आग से बचाव के लिए फायर फाइटर की भी उपस्थिति अनिवार्य होगी। तीसरी और अंतिम कड़ी होती है चिल्हर दुकानें। थोक की अपेक्षा लापरवाही थोड़ी कम होती है लेकिन यहां से भी शिकायतें मिल रही है। अब प्रशासन ने इन्हें भी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता से बांध दिया है। सघन या औचक जांच में यह अनिवार्यता नहीं मिली, तो विधि सम्मत कार्यवाही की जाएगी। आलू, प्याज और लहसुन के खुदरा कारोबारी को काउंटर की नियमित सफाई करनी होगी। ग्रेडिंग के दौरान निकले अपशिष्ट का प्रबंधन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों के अनुसार करना होगा। संस्थान के आसपास सफाई का ध्यान अहम होगा। यानी अब सभी सब्जी विक्रेता जो लहसुन, प्याज, आलू बेचते है उन्हें भी इसके बेचने की अनमुति यानी लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा रहा है। इससे बाजारों में पसरा लगाकर बेचने वालों को ही ज्यादा परेशानी होगी।


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