छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र का गला घोंटते रेत माफिया: बालोद में पत्रकार पर जानलेवा हमला, खनिज विभाग की खुली सरपरस्ती!

बालोद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जो यह साबित करती है कि राज्य में अब कलम की ताकत से डरने वाले माफिया बेलगाम हो चुके हैं और उन्हें संरक्षण देने वाले अफसर उनकी ढाल बन बैठे हैं। रेत तस्करी की सच्चाई उजागर करने पहुंचे पत्रकार कृष्णा गंजीर पर रेत माफियाओं ने न सिर्फ हमला किया, बल्कि उन्हें लोहे की रॉड से पीटकर मारने की कोशिश की और उसके बाद उन पर हाईवा चढ़ाने का प्रयास भी किया गया। यह घटना न केवल लोकतंत्र पर हमला है, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और अफसरशाही की पोल भी खोलती है।

पत्रकारिता नहीं, अब जान की बाज़ी है…

ग्राम मरकाटोला (गुरूर तहसील) में रेत भंडारण की जांच के लिए गए हल्का पटवारी डोमेंद्र मंडावी के साथ पत्रकार कृष्णा गंजीर और अमित मंडावी पहुंचे थे। जैसे ही कैमरे ने रेत के पहाड़ और अवैध ढुलाई की ओर रुख किया, माफिया और उनके गुंडों ने अचानक हमला बोल दिया। पहले रॉड, फिर मुक्के और लात-घूंसे बरसे। जब पत्रकार जमीन पर गिर पड़े, तो उन्हें कुचलने के लिए हाईवा ट्रक दौड़ा दिया गया। गनीमत रही कि मौके पर कुछ स्थानीय लोग पहुंच गए और उन्हें बचा लिया गया।

खनिज विभाग की मिलीभगत? रॉयल्टी पर्ची गायब, रेत कहां से आई?

मुख्य आरोपी उमेश्वर उर्फ ओमू साहू, जिसने देवकी बाई ठाकुर के फार्म हाउस पर रेत भंडारण की अनुमति ली थी, उसके पास 22-23 हजार घन मीटर रेत का कोई वैध स्रोत नहीं है। न कोई नदी का जिक्र, न कोई रॉयल्टी नंबर, और न ही परिवहन दस्तावेज। सवाल उठता है कि फिर जिला खनिज विभाग ने रॉयल्टी बुक कैसे जारी की?

जवाब है — मिलीभगत!

जिला खनिज अधिकारी मीनाक्षी साहू और निरीक्षक शशांक सोनी पर आरोप हैं कि पूरे जिले में अवैध खनन को खुली छूट मिली हुई है। बालोद के कई पत्थर, मुरुम और रेत खदानों में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है और प्रशासन आँख मूंदे बैठा है।

पुलिस ने FIR तो दर्ज की, मगर बड़े मगरमच्छ अब भी आज़ाद

पुरूर थाना पुलिस ने इस हमले में BNS की धारा 109, 190, 191(2), 191(3), 296, 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी रविकांत साहू, राजू साहू, कोमल निर्मलकर, तालेश्वर वर्मा, गुलशन, हेमराज, हमेश्वर, और विजय ठाकुर सहित कई नामजद हैं। लेकिन मुख्य आरोपी ओमू साहू और रविकांत साहू अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। क्या इन्हें कोई बचा रहा है? क्या कोई बड़ा हाथ है जो इनके सिर पर है?

राज्य में पत्रकारों की हत्या अब सामान्य घटना?

इस एक घटना को अलग-थलग नहीं देखा जा सकता।

  • कुछ महीने पहले विनोद नेताम पर हमला हुआ।
  • बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर को मारकर सैप्टिक टैंक में फेंक दिया गया।
  • फिरोज खान को दल्ली राजहरा बस स्टैंड पर जान से मारने की धमकी दी गई।
  • जगन्नाथपुर (सूरजपुर) में पत्रकार संतोष टोप्पो के माता-पिता और भाई की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई।
  • आरटीआई एक्टिविस्ट व्यास मुनि द्विवेदी पर हमला कर उनकी कार जला दी गई।
  • दुर्ग में पत्रकार धीरेंद्र गिरि गोस्वामी पर हमला हुआ जिसमें भाजपा नेता मोनू साहू गिरफ्तार हुआ।

सवाल जो सरकार को चुभने चाहिए:

  1. क्या छत्तीसगढ़ में पत्रकार बनना अब आत्महत्या करना है?
  2. क्यों अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं?
  3. किसके दबाव में पटवारी पर जांच रिपोर्ट को हल्का करने का दबाव बनाया जा रहा है?
  4. रेत के इस काले कारोबार में किन सफेदपोशों का नाम जुड़ा है?
  5. क्या राज्य सरकार पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लाएगी?

जनता की अदालत से गुहार:

यह कोई आम हमला नहीं, यह लोकतंत्र पर हमला है।

कलम उठाने वालों की कलाइयाँ तोड़ी जा रही हैं।

जो सच दिखाना चाहता है, उसे मिटा देने की कोशिश हो रही है।

अब वक्त आ गया है कि जनता, मीडिया संस्थान, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक दल, सब एकजुट होकर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग करें।


There is no ads to display, Please add some
WhatsApp Facebook 0 Twitter 0 0Shares
Share.

About Us

Chif Editor – Prakash Kumar yadav

Founder – Gangaprakash

Contact us

📍 Address:
Ward No. 12, Jhulelal Para, Chhura, District Gariyaband (C.G.) – 493996

📞 Mobile: +91-95891 54969
📧 Email: gangaprakashnews@gmail.com
🌐 Website: www.gangaprakash.com

🆔 RNI No.: CHHHIN/2022/83766
🆔 UDYAM No.: CG-25-0001205

Disclaimer

गंगा प्रकाश छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले छुरा(न.प.) से दैनिक समाचार पत्रिका/वेब पोर्टल है। गंगा प्रकाश का उद्देश्य सच्ची खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का है। जिसके लिए अनुभवी संवाददाताओं की टीम हमारे साथ जुड़कर कार्य कर रही है। समाचार पत्र/वेब पोर्टल में प्रकाशित समाचार, लेख, विज्ञापन संवाददाताओं द्वारा लिखी कलम व संकलन कर्ता के है। इसके लिए प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी, संपादक की कोई जवाबदारी नहीं है। न्यायिक क्षेत्र गरियाबंद जिला है।

Ganga Prakash Copyright © 2025. Designed by Nimble Technology

You cannot copy content of this page

WhatsApp us

Exit mobile version