CGNEWS:धर्म के नाम पर सौदा! स्कूल प्रिंसिपल ने शिक्षिका से कराया जबरन ‘बेप्टिस्मा’, पति को भी धर्म बदलने के लिए दिया 50 हजार और नौकरी का ऑफर!

 

बिलासपुर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के शांत समझे जाने वाले बिलासपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। एक इंजीनियर पति ने न सिर्फ अपनी पत्नी के जबरन धर्मांतरण का सनसनीखेज खुलासा किया, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक स्कूल की प्रिंसिपल के शामिल होने का आरोप भी लगाया है। आरोप है कि प्रिंसिपल ने शिक्षिका को नौकरी बचाने के लिए धर्म बदलने को मजबूर किया और अब उसके पति को भी 50,000 रुपये नकद और एक नौकरी का प्रलोभन देकर ईसाई बनने के लिए दबाव डाला जा रहा है।

शादी हिंदू रीति से, अब धर्म बदलने का दबाव!

पीड़ित मंयक पाण्डेय, जो कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है लेकिन फिलहाल बेरोजगार है, ने चकरभाठा थाने में अपनी पत्नी रंजना पाण्डेय और डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, कुम्हारी मरवाही की प्रिंसिपल केरोलाईन मैरी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। मंयक का कहना है कि उसकी शादी 10 फरवरी 2019 को मध्यप्रदेश के अनुपपुर जिले की रंजना से पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी, लेकिन कुछ वर्षों से उनके बीच पारिवारिक विवाद चल रहा है। मामला कोतमा न्यायालय में लंबित है।

10 मार्च 2025 को जब कोर्ट में पेशी के दौरान मंयक अपनी पत्नी से सुलह की बात करने गया, तो उसे जो पता चला, उससे उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। रंजना ने बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल केरोलाईन मैरी ने उसका जबरन “बेप्टिस्मा” कराया और अब मंयक को भी ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है।

नकद, नौकरी और धर्मांतरण – यह कैसा सौदा?

मंयक का दावा है कि केरोलाईन मैरी ने उसे धर्म बदलने पर 50,000 रुपये नकद और एक अच्छी नौकरी का लालच दिया। मंयक ने जब इस प्रस्ताव को ठुकराया, तो उस पर मानसिक दबाव डाला गया और उसे परिवार टूटने की धमकी भी मिली।

भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और धारा 3(5) (धर्मांतरण के लिए अनुचित दबाव या प्रलोभन देना) के तहत FIR दर्ज की है।

FIR क्रमांक 003/25 के तहत जांच शुरू हो चुकी है और इस बात की पुष्टि की जा रही है कि क्या मामला केवल एक पारिवारिक विवाद है या इसके पीछे कोई बड़ा और संगठित धर्मांतरण गिरोह काम कर रहा है।

शिक्षा संस्थान या धर्मांतरण का अड्डा?

इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या एक विद्यालय की प्रिंसिपल, जो बच्चों और अभिभावकों की आस्था और मूल्यों की संरक्षक मानी जाती है, ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकती है? यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह पूरे प्रदेश के शिक्षा तंत्र को झकझोर देने वाला मामला होगा।

सवाल जो अब पूरे समाज के सामने हैं:

क्या धर्मांतरण के पीछे एक संगठित तंत्र काम कर रहा है?*क्या स्कूलों में पढ़ाने वाली शिक्षिकाएं भी सुरक्षित नहीं हैं?*क्या धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन और दबाव का नया मॉडल खड़ा हो चुका है?*क्या शिक्षा विभाग और प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पाएगा?

यह मामला अब सिर्फ मंयक पाण्डेय या उसकी पत्नी तक सीमित नहीं है — यह राष्ट्र की धर्मनिरपेक्षता, शिक्षा व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रता के मूलभूत अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

धर्म का सौदा? या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला? आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि देश में कानून की पकड़ कितनी मजबूत है और धर्मांतरण के खेल पर कितनी सख्ती से लगाम लगाई जाती है।


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