अरविन्द तिवारी  

मनामा/बहरीन(गंगा प्रकाश) – पूरी दुनियां में मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में भारत की पहचान है। भारत समृद्ध बहुलतावादी संस्कृति और विशालतम संविधान वाला देश है। भारत में बंधुत्व , शांति , स्वतंत्रता ,सामाजिक-आर्थिक न्याय हमारे संविधान के आधार पर है। भारत अनेक धर्मों की जन्मस्थली है , यहां अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं साथ ही वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति हमारे अस्तित्व का आधार है। भारत का संविधान समता और न्याय को बढ़ावा देता है , हमें अपनी विविधता पूर्ण संस्कृति पर गर्व है। सभी सदस्यों को संसद में अपने बात और विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है। हम ‘सबका साथ , सबका विकास , सबका प्रयास’ की भावना से काम कर रहे हैं। 

                     उक्त बातें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत में मजबूत लोकतंत्र और जीवंत बहुदलीय प्रणाली का जिक्र करते हुये  बहरीन में अंतर-संसदीय संघ की 146वीं सभा में ‘शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और समावेशी समाज को बढ़ावा देना : असहिष्णुता के विरुद्ध लड़ाई’ विषय पर संबोधन में वैश्विक मुद्दों का बातचीत से समाधान निकालने पर बल देते हुये कही।उन्होंने शांति-सद्भाव और न्याय का प्रसार करने वाली वैश्विक संस्थाओं के मजबूत अस्तित्व को न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के लिये जरूरी बताया। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में त्वरित और व्यापक सुधार पर बल देते हुये कहा कि भारत ने दुनियां को शांति-सद्भाव का संदेश दिया है। भारत का यह विश्वास है कि समावेशी व सहिष्णु समाज का निर्माण केवल शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व , आपसी चर्चा और संवाद से ही संभव है ,  इसके लिये सांसदों को निर्णायक भूमिका निभानी है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से एक साथ आने का आह्वान किया जिससे मानवता के लिये बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सके। आगे उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को संसद में अपने बात और विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है। हम ‘सबका साथ , सबका विकास , सबका प्रयास’ की भावना से काम कर रहे हैं। भारत में मजबूत सहभागी लोकतंत्र और जीवंत बहुदलीय प्रणाली है , जहां नागरिकों की आशाओं और आकांक्षाओं को निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। उन्हाेंने सभी वैश्विक मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिये करने वाले भारत के दीर्घकालीन दृष्टिकोण को दोहराते हुये कहा कि भारतीय संसद ने हमेशा जलवायु परिवर्तन , लैंगिक समानता , सतत विकास और कोविड-19 महामारी जैसी समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक और सार्थक बहस एवं विचार-विमर्श किया है।उन्होंने जोर दिया कि शांति , सद्भाव एवं न्याय की वकालत करने वाले वैश्विक संस्थान शांति , समृद्धि , स्थिरता और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्हाेंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे वैश्विक संगठनों में तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था की सच्चाई को दर्शाने के लिये कई देशों के बीच सुधार लाने पर व्यापक सहमति बनी है और इस बात को ध्यान में रखते हुये कि इस महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस विषय को भविष्य के वैश्विक एजेंडे में शामिल किया जाये जिससे हम जलवायु परिवर्तन , सतत विकास , गरीबी, लैंगिक समानता और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने में ज्यादा से ज्यादा योगदान कर सकें। वैश्विक दायित्वों का निर्वहन करने के लिये भारत की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुये उन्हाेंने कहा कि हमने कोविड-19 से अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिये दुनियां का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम चलाया है और साथ ही साथ इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में अन्य देशों की सहायता की है।


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