अरविन्द तिवारी 

न्यूयॉर्क/अमेरिका(गंगा प्रकाश) – फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने न्यूयॉर्क की संयुक्त राष्ट्र महासभा  में 2022 के ‘एसडीजी मोमेंट’ की एक बैठक में स्पीच दी। प्रियंका ने यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली को संबोधित किया और देश-दुनियां में सब ठीक ना होने की बात कही। इस संबोधन से जुड़े कुछ वीडियोज और फोटोज प्रियंका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किये हैं। उन्होंने अपने भाषण से दुनियां भर के लोगों को प्रभावित किया है। इस वीडियो में प्रियंका ने कहा हम एक महत्वपूर्ण समय में यह बैठक कर रहे हैं, ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर एकजुटता पहले से कहीं अधिक जरूरी है। देश कोविड-19 वैश्विक महामरी के भयावह प्रभावों से जूझ रहे हैं, जलवायु संकट जीवन और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, संघर्ष बढ़ रहा है, गरीबी, विस्थापन, भुखमरी और असमानतायें दुनियां की उस नींव को कमजोर कर रहे हैं, जिसके लिये हमने काफी लंबे समय तक संघर्ष किया है। उन्होंने आगे कहा हमारी दुनियां में सब सही नहीं है। संकट अचानक नहीं आते, लेकिन उन्हें एक योजना के जरिये ठीक जरूर किया जा सकता है। हमारे पास वो योजना है, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य…जिसे विश्व को हासिल करना है। इन लक्ष्यों को वर्ष 2015 में विश्व भर के लोगों ने मिलकर तय किया था। हम जिस दुनियां में रह रहे हैं, उसे बदलने का हमारे पास एक असाधारण मौका है। इसके अलावा प्रियंका ने अपने पोस्ट को साझा करते हुये कैप्शन में लिखा है यूएनजीए में दूसरी बार बोलने के लिये आज सुबह संयुक्त राष्ट्र के गेट के बीच से निकलना यूनिसेफ ​​के एक गर्वित प्रतिनिधि के रूप में मुझे वास्तविक संतुष्टि दी है। इस वर्ष के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं सतत विकास लक्ष्य। आज का दिन कार्रवाई, महत्वाकांक्षा और आशा के बारे में था। यह एसडीजी को एक वास्तविकता बनाने के लिये हमें एक साथ क्या करना चाहिये ? प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि दुनियां के पास खोने के लिये एक सेकंड भी नहीं है और यह सुनिश्चित करने के लिये तत्काल कदम उठाये जाने चाहिये कि यह सभी के लिये रहने योग्य जगह बनी रहे। लेकिन समय समाप्त हो रहा है और हम अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिये जिसके लिये हमने समय सीमा वर्ष 2030 निर्धारित की थी, उसका आधा समय निकाल चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि महासचिव के शब्दों में हमारे पास खोने के लिये एक क्षण भी नहीं है। इस कमरे में उन्हीं देशों के प्रतिनिधि हैं जिन्होंने वर्ष 2015 में उन लक्ष्यों पर हस्ताक्षर किये थे। वैश्विक नेता, जो हम सभी के साथ साझेदारी में उस योजना को साकार कर सकते हैं। तो अब काम करने का वक्त है, हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने के तरफ कदम बढ़ाने का वक्त है और हमें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है, क्योंकि एसडीजी एक वास्तविकता है। इस कार्यक्रम में प्रियंका चोपड़ा ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और अमेरिकी कवि और कार्यकर्ता अमांडा गोर्मन से भी मुलाकात की। प्रियंका चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर इन तस्वीरों को दुनियां के साथ साझा किया है। प्रियंका ने बच्चों के लिये शिक्षा के महत्व के बारे में भी बात की – कुछ ऐसा जो हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है। दूसरा जिसमें मुझे भाग लेने का सौभाग्य मिला, वह था ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन समिट। यह विश्वास करना कठिन है कि निम्न मध्यम और उच्च आय वाले देश के लगभग दो तिहाई बच्चे पढ़ और समझ नहीं सकते। व्यवस्था ने उन्हें विफल कर दिया है। जैसा कि अमेरिकी शिक्षा सचिव सेककाडोर्ना ने इसे बहुत स्पष्ट रूप से कहा है शिक्षा सबके लिये जरूरी है, लेकिन अगर हम वही करते रहे जो हमने किया है, तो हमें वही मिलेगा जो हमें मिला है। हम हर बच्चे को यह मूल जन्मसिद्ध अधिकार देते हैं, एक सीखने और अपनी पूरी क्षमता (एसआईसी) तक पहुंचने का समान मौका। प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि मैं भारत में पली-बढ़ी हूं, जहां शिक्षा तक पहुंच बहुत सारी लड़कियों के लिये एक चुनौती है। जैसा कि दुनियां के कई अन्य हिस्सों में है, जहां बच्चे सीखना चाहते हैं लेकिन ऐसा करने के लिये उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिये मेरा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय, सामाजिक परिवर्तन और लोकतंत्र की आधारशिला है। इसके अलावा प्रियंका ने आगे बच्चों की पढ़ाई और उनके अधिकारों पर बात की। प्रियंका को वर्ल्ड के इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर यूं सभी को मोटिवेट करता देख फैंस काफी खुश नजर आ रहे हैं और उनकी तरक्की को देख सराहना भी कर रहे हैं।

गुडविल एंबेसडर हैं प्रियंका चोपड़ा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा जोनस ने दुनियां में कई तरह की दिक्कतों को उठाया। बता दें कि प्रियंका चोपड़ा यूएन की गुडविल एम्बेसडर हैं जिन्होंने कई बराबरी, गरीबी, भूखमरी जैसे कई मुद्दों पर दुनियां का ध्यान आकर्षित किया। प्रियंका ने लड़कियों के लिये शिक्षा की आवश्यकता, दुनियां में बढ़ते रोष और कैसे हर कोई कोविड-19 महामारी के प्रभावों से उबरने के लिये कड़ी मेहनत कर रहा है, इस पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित व स्वच्छ दुनियां हर एक व्यक्ति का अधिकार है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक साथ काम करके ही हासिल किया जा सकता है। उन्होनें यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिये केवल आठ साल से कम का समय ही बचा है।


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