मानव तस्करी या मजदूरों का शोषण…?

 

हैदराबाद में छत्तीसगढ़ के बंधक रहे मजदूरों की आपबीती, यह कोई कहानी नहीं हक़ीक़त है…!

 

हैदराबाद मे बंधक रहे मजदूरों को विधायक टी राजा, आई जी, राघव प्रसाद ताम्रकार व नागेन्द्र सनातनी के पहल से छुड़ाए गए मजदूर।

 

आदित्य गुप्ता

सरगुजा/सूरजपुर (गंगा प्रकाश)। भारत देश की आज़ादी के 77 साल बाद भी परिवार का पेट पालने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य मज़दूर काम व रोजगार की तलाश मे अभी पलायन कर रहे हैं। जहां आये दिन एक राज्य से दुसरे राज्य में मजदूरी करने गये मजदूरो का की प्रकार की यातनाएं, शोषण, बंधक बनाये जाने जैसी मामले प्रकाश मे आता रहा है।  बता दे कि अयसे ही एक मामला छत्तीसगढ़ राज्य के जिला कोरिया सरगुजा के सूरजपुर का एक बडा व गंभीर मामला सामने आया है। जिसमे सूरजपुर के 6 उन मजदूरो को  हैदराबाद मे बंधक बनाया जा चुका था। जो कमाने खाने व जिविकोपार्जन के लिए तेलांगाा राज्य की राजधानी हैदराबाद में गये थे। 

गौरतलब हो कि सूत्रो के मुताबिक जब उन्हें बंधक बना लिया गया था। उन्हे यातनाएं दी जारही थी। उनके साथ मारपीट किया जाता था। भय के वातावरण में रखा जारहा था। इतना ही नहीं उनको घर वापसी (आने)के सारे रास्ते बंद कर दिए जा रहे। इस बात की जानकारी किसी तरह सूरजपुर के हि नागेन्द्र सनातनी को पता चला। तो सूरजपुर के नागेन्द्र सनातनी के द्वारा राघव प्रसाद ताम्रकार से संपर्क किया गया। राघव प्रसाद ताम्रकार टी. राजा सिंह गोशामहल के हैदराबाद से विधायक हैं। जिनका छत्तीसगढ़ के विश्रामपुर में टी. राजा सिंह का धर्म महासभा हुआ था। जिनका मुख्य सूत्रधार विशाल राधव प्रसाद ताम्रकार जी ही थे।

ज्ञात हो कि इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए। सूरजपुर के नागेंद्र सनातनी ने अपने क्षेत्रवासियों के बंधक रहे मज़दूरों को तेलंगाना राज्य से बचाने के लिए  विशाल ताम्रकार से संपर्क किया। चूंकि मामला तेलंगाना राज्य का था। तब विशाल ताम्रकार ने विषय को टी राजा सिंह के सामने मामले की गंभीरता को अवगत कराये। जिस पर टी- राजा सिंह ने पुरी निष्ठा व विश्वास के साथ कहा कि सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से सकुशल मज़दूरों को बाहर निकाला जाएगा। और निकाला भी गया। कहते हैं न परमात्मा भी उन्हीं का साथ देते हैं। जो स्वयं की रक्षा करना जानते हैं। जो स्वयं की रक्षा के लिए तैयार होते हैं। यह कोई कहानी नहीं है। यह उन छह लोगों की आपबीती है। जो अपनी पेट की आग को बुझाने के लिए छत्तीसगढ़ से तेलंगाना (सिकंदराबाद) मज़दूरी का कार्य करने कमाने खाने के लिए गए थे।

आपको बता दें कि जीन मजदूरों को बंधक बनाकर रख गया था। उनमे आदित्य बघेल सूरजपुर, साहिल कुमार पटना बैकुंठपुर, विकेश कुमार देवांगन सूरजपुर, महेश राजवाड़े सूरजपुर , हिमांशु देवांगन , आदित्य देवांगन सूरजपुर आदि रहा है। इन्हीं  सभी लोगों को लुभावने सपने दिखाकर। सारी ग़रीबी दूर हो जाएगी, ख़ूब पैसा कमाओगे, ऐसा झाँसा देकर। इन्हें छत्तीसगढ़ से तेलंगाना ले गए थे।जहां रहने ख़ाने का किसी भी चीज़ का तुम्हें पैसा नहीं लगेगा। केवल तुम पैसा कमाओगे और घर पैसा भेजोगे। ये सारी लुभावनी बाते करके ले गये थे। पर वहाँ जाने के बाद पूरी स्थितियां विपरीत हो गई। केवल छह सात दिन कार्य करने के बाद खाने की सारी चीज़ों का पैसा जोड़ना चालू कर दिया। महज सात दिन ही कार्य करने के बाद से ही एक निश्चित मंज़दूरी मिलनी थी। वही हैरानी की बात रहा कि उनके उपर 25000,व  ,50,000 का कर्ज़ डाल दिए। दोष लगा दिया गया था। तब बेचारे बेबस मजदूर काम पसंद नहीं है। हम घर जाना चाहते हैं। ऐसा कहने पर ठेकेदार पच्चीस लोगों को भेज कर कमरे में बंद करके बोहुत मरवाते रहे। वही पीड़ितों का कहना है कि रोज़ रोज़ की मार खा के और 16,16 घंटे काम करके हम बहुत परेशान थे। हम सभी का हालात इतना बुरा था कि यदि एक दिन भी देर होता और नागेंद्र सनातनी , विशाल ताम्रकार जी , आयी जी सुशील द्विवेदी साहब जी, तेलंगाना के टाइगर राजा भैया जी का साथ नहीं मिलता। तो हम सभी फाँसी लगाकर आत्महत्या कर लेते। इन सभी में महत्वपूर्ण भूमिका विशाल ताम्रकार ज़ी का रहा। जिन्होंने बंधक बनाए हुए। लोगों से चर्चा कर उनका मनोबल तोडा।  हम सभी जो बंधक बने हुए थे। उनका मनोबल बढ़ाया। विशाल ताम्रकार जी के अविलंब हस्तक्षेप से प्रशासन ने अपनी भूमिका बनायी और तेलंगाना राज्य की पुलिस टीम से संपर्क साधकर। बताया कि  हम सबको उस दलदल से सुरक्षित निकाला गया।

वही इस मामले पर विशाल ताम्रकार जी ने बताया। जिसमे सभी मज़दूरों का प्राण बचाने में आयी जी, सुशील द्विवेदी साहब की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आइजी सुशील द्विवेदी जी के नेतृत्व में टाइगर राजा भैया के संज्ञान एवं सलाह से छत्तीसगढ़ पुलिस एवं तेलंगाना पुलिस ने साझा ऑपरेशन से सब छत्तीसगढ़ के बंधक मजदूर सकुशल अपने घर पर सुरक्षित पहुँच गये। बात यह भी है कि कारख़ाने में कार्यरत लोगो एवं सूत्रों के मुताबिक़ मिली जानकारी के आधार पर जिस मज़दूर की मृत्यु डर दहशत और बीमारी से होती है। कारख़ाने के ठेकेदार उनके परिवार वालों से तुम्हारी बेटे के ऊपर इतने लाख का कर्ज़ है। करके पैसा ऐंठ लिए जाते रहे है। अयसे बेगुनाहों के शव से भी पैसा कमा रहे हैं। जो सम्पूर्ण जाँच का विषय है। इस मामले मे केंद्र सरकार को ऐसे विषयों पर बहुत गंभीरता के साथ जाँच के आदेश देने चाहिए। और जो लोग बंधक बने हुए हैं। उसे मुक्त कराना चाहिए।

यह जाँच हर तीन माह में होना अनिवार्य कर देना चाहिए।

ताकि शोषणमुक्त अपराध मुक्त भारत हो। वही जितने भी कारख़ाने हैं। उन कारखानों में कार्य करने वालों का आधार कार्ड होना चाहिए। जो लोग मज़दूरों की संख्या छुपाते हैं। उनके ऊपर भी कार्यवाही होनी चाहिए। प्रशासनिक टीम जाँच करें और जाँच के दौरान सभी मज़दूरों से कार्य करने वाले कर्मचारियों से अलग अलग पूछताछ होनी चाहिए। कि कहीं इन्हें दबाव पूर्वक बंधक बनाकर बनाकर तो कार्य नहीं कराया जा रहा है।

इस संबंध में विशाल ताम्रकार ने कहा कि जीवन में केवल अपने ऊपर ही होने वाली घटनाओं से तो अनुभव लेना ही चाहिए। पर साथ ही किसी और के ऊपर घटने वाली घटनाओं से भी अनुभव लेकर। हमें जागरूक रहना चाहिए। सतर्क रहना चाहिए और लोगों को भी जागरूक करना चाहिए। ताकि ऐसी घटनाएँ उनके साथ उनके परिवार के साथ न हो। विपरीत परिस्थितियों में फँसने के पूर्व ही परिवार को सुरक्षित किया जा सके। सतर्कता और जागरूकता ही हम और आप को सुरक्षित करती है।


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