छुरा (गंगा प्रकाश)। आसपास के क्षेत्र के साथ-साथ मुड़ागांव में मनाया गया छेरछेरा त्यौहार। छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ का लोक पर्व किसानों, अन्न और दान की परंपरा से जुड़ा हुआ है। पौष मास की पूर्णिमा को मनाये जाने वाला यह त्यौहार नए धान से कोठार के भर जाने का उत्सव है, इस दिन बच्चे टोलियो में घर घर जाते हैं और आवाज देते हैं, छेरछेरा, कोठी के धान ला हेरहेरा, वहीं युवाओं की टोलिया भी घूम-घूम कर नित्य करते हुए दान मांगते हैं। इस दिन अन्नपूर्णा देवी की पूजा होती है। यह त्योहार जनवरी को स्थानीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्यौहार को दान लेने देने पर वह भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है, इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। जो भी द्वार पर दान मांगने को दस्तक दें उसे खाली हाथ वापस न जाने दे। इस पर्व पर पूर्व सरपंच गोदावरी दीवान ने अपने घर पर अन्न का दान किया व आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता रेखराम ध्रुव, अनिल, राकेश, ईशु, हनुमान, मेष, युग, लोमन, गोपाला, गुलशन, लोकसाय, बेदराम समस्त युवाओं ने एक दूसरे को बधाई दी।
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