अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 

काठमाण्डू(गंगा प्रकाश)। देश में लगातार राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानि सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष खड्ग प्रसाद (केपी) शर्मा ओली (72 वर्षीय) ने आज चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन शीतल निवास में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने उसे शपथग्रहण कराया। नेपाल में संविधान बनने  के बाद यह तीसरी बार है जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। संविधान जारी होने के बाद पहले कार्यकाल में दो बार और संविधान सभा के दौरान एक बार पहले भी ओली प्रधानमंत्री बन चुके हैं। इस बार वे नेपाली कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने हैं। ओली ने दो दिन पहले सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के समर्थन से बहुमत का दावा पेश किया था। ओली एक नई गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे जो नेपाल में राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने की कठिन चुनौती का सामना करेगी। ओली ने पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ की जगह ली जो शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हासिल नहीं कर पाये और इसकी वजह से ओली के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। ओली को अब 30 दिनों के भीतर संसद से विश्वास मत हासिल करना होगा , उसे 275 सीट वाली प्रतिनिधि सभा में कम से कम 138 मतों की आवश्यकता होगी। प्रधानमंत्री ओली सहित कुल 22 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली है , उनके साथ दो उप प्रधानमंत्रियों ने भी आज शपथ ली है। नेपाली कांग्रेस से प्रकाशमान सिंह ने शहरी विकास मंत्रालय के साथ उप प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो एमाले पार्टी से वित्त मंत्रालय के साथ विष्णु पौडेल ने उप प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इनके अतिरिक्त 19 कैबिनेट मंत्रियों को ओली मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। आज शपथ लेने वाले मंत्रियों में नेपाली कांग्रेस से 09 , नेकपा एमाले से 08 , जनता समाजवादी पार्टी से 02 और लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी से एक मंत्री ने शपथ ली है। इनमें कांग्रेस से आरजू राणा ने विदेश मंत्री , रमेश लेखक ने गृहमंत्री , दीपक खड्का ने ऊर्जा , अजय चौरसिया ने कानून , प्रदीप पौडेल ने स्वास्थ्य , बद्री पाण्डे ने पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन , तेजुलाल चौधरी ने युवा तथा खेलकूद , रामनाथ अधिकारी ने कृषि और ऐन बहादुर महर ने वन मंत्री के रूप में शपथ ली है। इसी तरह एमाले की तरफ से पृथ्वीसुब्बा गुरूंग ने सूचना तथा संचार , विद्या भट्टराई ने शिक्षा , दामोदर भण्डारी ने उद्योग , देवेन्द्र दाहाल भौतिक पूर्वाधार , राज कुमार गुप्ता संसदीय कार्य मंत्रालय , मानवीर राई , बलराम अधिकारी भूमि व्यवस्था मंत्रालय की शपथ ली है। छोटे दलों से शरत सिंह भण्डारी ने श्रम , पिरदीप यादव ने पेयजल , नवल किशोर साह ने महिला , बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। बताते चलें यह चौथी बार है जब ओली ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। सबसे पहले ओली ने 11 अक्टूबर 2015 से 03 अगस्त 2016 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया ,  इस दौरान नई दिल्ली के साथ काठमांडू के संबंध तनावपूर्ण रहे जिसका कारण उनका चीन के प्रति झुकाव था। इसके बाद वे 05 फरवरी 2018 से 13 मई 2021 तक फिर प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद वह तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी की वजह से 13 मई 2021 से 13 जुलाई 2021 तक पद पर बने रहे , उनका यह छोटा कार्यकाल विवादास्पद रहा था क्योंकि नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी द्वारा उनके पीएम के रूप में नियुक्ति को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा था कि ओली का प्रधानमंत्री पद पर बने रहना असंवैधानिक है।

पीएम मोदी ने दी बधाई – 

ओली को नेपाल के नये प्रधानमंत्री चुने जाने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनको बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा है कि नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में आपकी नियुक्ति पर के०पी०शर्मा ओली को बधाई।‌ हम दोनों देशों के बीच दोस्ती के गहरे बंधन को और मजबूत करने तथा हमारे लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिये हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को और बढ़ाने के लिये मिलकर काम करने के लिये तत्पर हैं।

कौन हैं केपी शर्मा ओली –

वर्ष 1952 में जन्मे ओली बारह साल की उम्र में ही राजनीति में आ गये , मार्क्स और लेनिन से प्रभावित थे तो कम्युनिस्ट राजनीति में  गये। चौदह वर्षों तक जेल में भी रहे , बाद में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया। ओली वर्ष 1991 में एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी के नेता बने और बाद में दोनों पार्टियों को मिलाकर (सीपीएन – यूएमएल) की स्थापना की गई थी। वर्ष 2006 से 2007 तक वे उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रहे। पहली बार वर्ष 2015 में वे नेपाल के पीएम बने , हालांकि वर्ष 2016 में ही वे सरकार से बाहर हो गये। वर्ष  2018 में वे फिर से एक बार पीएम बने लेकिन ये सरकार भी 2021 तक ही चली।


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