राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं शारीरिक प्रकटोत्सव का हुआ भव्य आयोजन…!

 

संघ का वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं शारीरिक प्रकटोत्सव रहा ऐतिहासिक…!

आतिशबाजी के साथ वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं हिंदू नव वर्ष का किया गया स्वागत…!

नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा नगर स्थित गांधी स्टेडियम में किया गया “आद्य सरसंघचालक प्रणाम”…!

स्वयंसेवकों ने लहराया भगवा ध्वज और सामूहिक योग, समता व शारीरिक प्रकटोत्सव बना आकर्षक का केंद्र।

निश्छल , निष्कपट और निस्वार्थ देशभक्त बनने बनने की है ज़रूर – सह प्रांत प्रचारक

आदित्य गुप्ता

अंबिकापुर (गंगा प्रकाश)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के तत्वावधान में वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं शारीरिक प्रकटोत्सव का आयोजन किया गया । यह आयोजन संघ की कार्यपद्धति के तहत समाज, संगठन और व्यक्ति निर्माण के दीर्घकालिक लक्ष्य को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया गया। सर्वप्रथम भारत माता,डॉ.हेडगेवार के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए कार्यक्रम में गण गीत, एकल गीत और अमृत वचन के बाद संघ की प्रार्थना से हुई शुरुआत।

जिसमें अंबिकापुर नगर के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। पूरे गणवेश में आए स्वयंसेवकों ने आर्द्ध सर संघ संचालक को प्रणाम किया। ध्वज लहराया और सामूहिक योग भी किया।  इसी दिन संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती भी मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से उनका जन्म एक अप्रैल, 1889 को हुआ था। पर संघ भारतीय पंचांग के हिसाब से चलता है और उसके अनुसार डॉ. हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। वर्ष प्रतिपदा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पहला उत्सव है। काफी विचार के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरू माना है।

भारतीय नव वर्ष की शुरुआत चैत्र के महीने से होती है। हर वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर भारतीय नववर्ष मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि की रचना भी हुई थी. इसी दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी हुआ था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाता आया है। साल में एकमात्र ये ऐसा दिन होता है जब स्वयंसेवक संघ के संस्थापक को आद्य सरसंघचालक प्रणाम करते हैं। इस बार 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा का कार्यक्रम होना तय हुआ था जिसमें नगर के सभी स्वयं सेवक बंधुओ ने रविवार को सायं 06 बजे से गाँधी स्टेडियम ग्राउंड, अंबिकापुर में पूरी भव्यता के साथ कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर चुके थे। इस अवसर पर स्वयंसेवक अपने शारीरिक अभ्यासों का भी शानदार प्रदर्शन किए जो कि शहर वासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। कार्यक्रम के प्रारंभ में संघ के स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में राष्ट्रीय स्वयं संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को ‘आद्य सरसंघचालक प्रणाम किए।

सह प्रांत प्रचारक ने उत्सव के पौराणिक महत्व और हिंदु कालगणना पर डाला प्रकाश…

छत्तीसगढ़ के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव जी ने सभी का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि आद्य सरसंघचालक प्रणाम करने के लिए प्रत्येक स्वयंसेवक प्रतिवर्ष इंतजार करते हैं। राष्ट्रीय cस्वयंसेवक संघ भारतीय नववर्ष को वर्ष प्रतिपदा उत्सव के रूप में मनाता है। उन्होंने बताया कि, उत्सव किस प्रकार हमारे पौराणिक इतिहास जिसमें ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना, भगवान राम का राज्याभिषेक, भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव, महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक व युगाब्ध का प्रारम्भ, चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत की शुरुआत, नवरात्र का प्रारंभ करता है। साथ ही हिंदु कालगणना के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। अपने व्यक्तव्य में उन्होंने संघ द्वारा दिये गए पंच परिवर्तन को विजयादशमी तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आत्मसात करने को कहा गया। मंच पर उपस्थित अधिकारीगण ने सभी स्वयंसेवकों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद सभी स्वयंसेवक बंधुओ एवं नगरवासियों के लिए सामूहिक जलपान का आयोजन किया गया धूमधाम से सभी ने एक दूसरे को हिंदू नव वर्ष की बधाइयां देनी शुरू की ।

बौद्धिक उद्बोधन में सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव जी ने यह भी बताया कि पूरे वर्ष भर में केवल आज के दिन ही संघ के सभी स्वयंसेवक आद्य सरसंघचालक प्रणाम निवेदित करते हैं। यह प्रणाम किसी व्यक्ति विशेष को नहीं अपितु उस भाव के प्रति होता है जिसने हिंदू धर्म, हिंदू समाज, हिंदू राष्ट्र को संगठित करने के लिए संघ बीज का रोपण किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय नववर्ष को ‘वर्ष प्रतिपदा’ उत्सव के रूप में मनाता है। इसी दिन संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती भी मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से उनका जन्म 1 अप्रैल, 1889 को हुआ था पर संघ भारतीय पंचांग के हिसाब से चलता है और उसके अनुसार डॉ. हेडगेवार का जन्म वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। वर्ष प्रतिपदा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का का पहला उत्सव है। जब जब देश व संस्कृति पर आक्रमण हुआ तब तब महापुरुषों ने संगठन की रचना किया। धर्म की रक्षा करने से हमारी रक्षा होती है। आत्म विस्मृति को हमें छोड़ना चाहिए। काफी विचार के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरू माना है।

RSS के 6 उत्सव में शामिल वर्ष प्रतिपदा, इस दिन संघ के संस्थापक को करते हैं आद्य सरसंघचालक प्रणाम…!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 100 वां वर्ष यानी शताब्दी वर्ष आ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 6 प्रमुख उत्सव में प्रथम उत्सव और वर्ष प्रतिपदा उत्सव है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अधिकृत तौर पर 6 उत्सवों को मनाता है। इनमें वर्ष प्रतिपदा साल का पहला उत्सव है जो चैत्र शुक्ल एकम को मनाया जाता है. इसके अलावा हिंदू साम्राज्य दिवस, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, विजयदशमी और मकर सक्रांति संघ की ओर से मनाया जाने वाले उत्सव है। संघ विचारकों के अनुसार आदिकाल से हिंदू समाज इन त्योहारों को मनाता आ रहा है। संघ ने इन्हें मनाना इसलिए शुरू किया. ताकि इन त्योहारों के जरिए लोग अपने महापुरुषों और समाज के प्रति जागरूक होकर राष्ट्रीयता की भावना हो आत्मसात करें। वहीं, भारतीय हिंदू नव वर्ष पर संघ के स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश पहनकर संघ स्थान पर पहुंचते हैं और यहां शाखा लगने से पहले आद्य सरसंघचालक प्रणाम कर संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद करते हैं। ये प्रणाम वर्ष में केवल एक बार वर्ष प्रतिपदा के दिन ही शाखाओं पर होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के समय यह तय हो गया कि हर उत्सव के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। आज परम पूज्य डॉक्टर साहब के जन्मदिन के अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि जहां तक का कार्य हुआ है उसे आगे बढ़ाना चाहिए। संघ की स्थापना के समय दो बातों को ध्यान में रखते हुए हिंदू समाज के संगठन का उद्देश्य बनाया गया जिसमें प्रथम बात था तंत्र और दूसरा बात था मंत्र हमारा तंत्र प्रतिदिन 1 घंटे की नियमित शाखा हैं और हमारा मंत्र प्रतिदिन संघ स्थान पर होने वाली प्रार्थना है। इन दोनों बातों के सहारे हम दृढ़ निश्चय के साथ आज समाज के लिए स्वीकार्य हो गए। यही परिवर्तन है। सन 1926 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पहली शाखा लगी थी।

स्वयंसेवक संघ अपने 7 विषय को लेकर समाज में जाने की बात बताई है।

नियमित शाखा हैं और हमारा मंत्र प्रतिदिन संघ स्थान पर होने वाली प्रार्थना है। इन दोनों बातों के सहारे हम दृढ़ निश्चय के साथ आज समाज के लिए स्वीकार्य हो गए। यही परिवर्तन है। सन 1926 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली शाखा लगी। शताब्दी वर्ष पर विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 07 विषय को लेकर समाज में जाने की बात बताई है। विजयादशमी के दिन 100 वा वर्ष के साथ वर्ष भर यह कार्य होने वाला है। वर्ष प्रतिपदा संकल्प उत्सव है प्राण से प्रण तक संकल्पित होना पड़ेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीते 100 वर्षों से भारत माता को पुनः परम वैभव के शिखर पर स्थापित करने के लिए कार्यरत है। इसी पवित्र कार्य की प्रगति के स्व-आकलन हेतु संघ विभिन्न स्तरों पर प्रकटोत्सव आयोजित करता है। यह आयोजन समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रसेवा के प्रति प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। कार्यक्रम में मंचासीन छत्तीसगढ़ के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव जी, जिला संघ चालक भगवान दास अग्रवाल जी, नगर संघ चालक अशोक सिंह जी व नगर सह संघ चालक अभय पालोरकर जी सहित कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारी, स्वयंसेवक एवं समाज के प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति रही।


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