जीवन मे छाई निराशा को दीजिये एक नई दिशा

जगदलपुर (गंगा प्रकाश):– जगदलपुर निवासी 50 वर्षीय अजीत (बदला हुआ नाम) ने बताया कि 18 वर्ष पहले उसे नींद नही आने की समस्या थी। इस बीमारी के इलाज के लिये रोजाना 10 से अधिक टेबलेट का सेवन करना पड़ता था। घर में आर्थिक स्थिति अच्छी थी लेकिन सगे सम्बन्धियों के सहयोग नही मिल पाने और बेरोजगार रहने के कारण वह हमेशा तनाव और मानसिक रूप से कमजोर रहने लगा था। इस बात से वह इतना परेशान हो चुका था कि मन में आत्महत्या करने जैसे विचार भी आने लगे थे। मुझे इस बात का एहसास था कि ऐसा करना गलत है, इसलिये अपने करीबी को इस बारे में बताया। उन्होंने मुझे स्पर्श क्लीनिक के माध्यम से अपना मानसिक इलाज करवाने की सलाह दी। समय रहते उचित परामर्श मिलने और नियमित योगाभ्यास करने से उसका मानसिक अवसाद खत्म हो चुका है, और वह अब पूर्ण रूप से स्वस्थ है।हर अस्थायी समस्या का एक स्थायी समाधान होता है। जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते है, वह मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं। दर्द का इलाज किया जा सकता है और जीवन मे छाई निराशा को एक नई दिशा दी जा सकती है। जन मानस में आत्महत्या जैसे गलत कदम लेने से रोकने और इसके प्रति जागरुकता उत्पन्न करने हेतु आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जा रहा है। हर वर्ष 10 सितम्बर को मनाए जाने वाले इस दिवस की थीम “गतिविधि के माध्यम से आशा का संचार करना है।इस सम्बंध में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ.ऋषभ साव ने जानकारी देते हुए बताया कि “आत्महत्या का प्रमुख  कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ रहना है। अक्सर लोग अपनी मानसिक बीमारियों को छिपाते हैं और खुलकर उस पर बात नहीं करना चाहते हैं। अत: किसी भी परिस्थिति में अकेले ना रहें। यदि किसी को कुछ समस्या है तो अपने परिवार वालों या करीबी से बात करे, उन्हें अपनी समस्या बताएं और समस्या का समाधान खोजें। हमेशा सकारात्मक विचार मन मे लाने का प्रयास करें। आपके करीब ऐसे कई लोग होंगे जिन्हें आपकी जरूरत है। मौत का सामना करने के बजाए अपनी हिम्मत और साहस का उपयोग जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए कीजिए।आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अपने दैनिक गतिविधियों में से कुछ समय निकालकर खुद के लिये समय दें,योगाभ्यास करें, खानपान में सुधार करें और पर्याप्त नींद लें। मानसिक अस्वस्थता की स्थिति हो तो घबराएं नही, जिला अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक के माध्यम से मानसिक रोगियों को निःशुल्क परामर्श व उपचार दिया जाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन नंबर (1-800-273-8255) में कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैंI”

यह हैं एन.सी.आर.बी. के आंकड़े

एन.सी.आर.बी. (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) 2021 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 1 लाख लोगों में 26.4 लोग आत्महत्या करते हैं जबकि पूरे भारत में 1 लाख की आबादी पर यह औसत 12 है। छत्तीसगढ़ की यह संख्या राष्ट्रीय औसत के दोगुने से भी ज्यादा है। इसको कम करने के लिए ही आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है और इस दिवस पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी आत्महत्या रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जा रहे हैं जिसके क्रम में सरकार द्वारा स्पर्श क्लिनिक की स्थापना की गयी है। इन क्लीनिकों के माध्यम से आत्महत्या का प्रयास करने वाले एवं अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों का उपचार किया जा रहा है और उनको एक बेहतर जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है।


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