अरविन्द तिवारी 

रायपुर (गंगा प्रकाश) – मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना देश में एक अनूठी योजना है , जिसमें वाणिज्यिक प्रजातियों का वृक्षारोपण कर निजी व्यक्ति , संस्था अथवा कंपनियों के माध्यम से अधिकाधिक लाभ कमा सकते हैं। यह केवल वृक्षारोपण की योजना ना होकर देश के जलवायु परिवर्तन की दिशा में भी हमारी सहभागिता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह योजना छत्तीसगढ़ में वनों के संरक्षण-संवर्धन तथा हरियाली के प्रसार के लिये एक और महत्वपूर्ण योजना साबित होगी।

                              उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विश्व वानिकी दिवस पर विधानसभा परिसर में स्थित कार्यालय कक्ष से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का 33 जिलों के 42 स्थानों पर वर्चुअल शुभारंभ करते हुये कही। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि ‘मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना’ वाणिज्यिक वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों के लिये आर्थिक दृष्टि से , पर्यावरण , सॉइल हेल्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण योजना साबित होगी। उन्होंने कहा यह प्रसन्नता का विषय है कि बस्तर और सरगुजा के लोगों ने जहां प्रदेश में सर्वाधिक वन हैं, वृक्षारोपण की इस योजना में गहरी रूचि दिखाई है। मैदानी इलाके के दुर्ग और रायपुर संभाग में हितग्राहियों ने कम रूचि दिखाई है , जबकि यहां वृक्षों की ज्यादा जरूरत है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुर्ग और रायपुर संभाग में इस योजना को व्यापक प्रचार-प्रसार कर योजना से होने वाले लाभों की जानकारी लोगों को दी जाये , ताकि इस क्षेत्र में भी वृक्षारोपण को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल और यहां की जैव विविधता छत्तीसगढ़ की पहचान है। हमारी कला , संस्कृति, परम्परायें , दर्शन ,  चिंतन , आध्यात्म , इतिहास सब कुछ हमारे जंगलों से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ के वन पूरे देश की धरोहर है , इन वनों से पूरे देश का पर्यावरण जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे जंगल बचे रहे , हमारा पर्यावरण बचा रहे , जंगल से जुड़ी हमारी गौरवशाली संस्कृति बची रहे और खूब फले-फूले इस दिशा में बीते चार वर्षों के दौरान हमारी सरकार ने लगातार काम किया है। सीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में सभी वर्ग के इच्छुक किसानों की पड़त भूमि में वाणिज्यिक वृक्षारोपण होगा। योजना के तहत 33 जिलों के 23 हजार 600 किसानों द्वारा 36 हजार 230 एकड़ में वृक्षारोपण किया जायेगा। योजना से किसानों को सालाना प्रति एकड़ 15 से 50 हजार रूपये तक की आय होगी। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी किसानों को अतिरिक्त आय होगी। मुख्यमंत्री  बघेल ने इस मौके पर वन संसाधन अधिकारों को लोगों तक सुगमता से पहुंचाने के लिये मोबाईल आधारित एफआरए टूल का लोकार्पण किया और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने तथा व्यापारियों की सुविधा के लिये छत्तीसगढ़ में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम का शुभारंभ किया। सीएम ने कवर्धा जिले के सकरी नदी को संरक्षित करने तथा नदी का बहाव अपने पूर्ण क्षमता पर लाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के माध्यम से सकरी नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम की शुरूआत की। साथ ही उन्होंने शहीद महेन्द्र कर्मा सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत 1458 हितग्राहियों के खाते में कुल 22 करोड़ रुपये की राशि का ऑनलाइन अंतरण किया। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना कार्यक्रम की अध्यक्षता वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने की। वहीं इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे , खाद्य मंत्री अमरजीत भगत , मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा , संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी , चन्द्रदेव प्रसाद राय , विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े , मुख्य सचिव अमिताभ जैन , वन एवं जलवायु विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ , प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला भी उपस्थित थे।

एक नज़र – योजना पर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में वृक्षों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने की अपार संभावनाओं को देखते हुये मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत कृषकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषकों की सहमति से उनकी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाना है। योजना के अंतर्गत किसान , इच्छुक भूमि स्वामी , शासकीय-अर्धशासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थान , निजी शिक्षण संस्थायें , निजी ट्रस्ट , पंचायत तथा भूमि अनुबंध धारक इस योजना का लाभ उठा सकते है। इस योजना के तहत राज्य शासन द्वारा पांच एकड़ तक वृक्षारोपण हेतु 100 प्रतिशत अनुदान तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण हेतु पचास प्रतिशत वित्तीय अनुदान देगी । चिन्हित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी हेतु न्यूनतम क्रय मूल्य का निर्धारण भी शासन द्वारा किया जायेगा , जिससे कृषकों को निश्चित आय प्राप्त हो सके। योजना अंतर्गत क्लोनल लगी , टिश्यू कल्चर बांस , मेलिया दुबिया , सामान्य बांस , सागौन , मालाबार , चंदन , आंवला , खमार , शीशम जैसे आर्थिक लाभ देने वाले बारह प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जायेगा।


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