रायपुर । कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आम का नाम लेते ही आम की खुशबू हर एक की जहन में आ जाता है। वैसे आम का नाम भले ही आम हो, लेकिन फलों का राजा और हम सबके स्वास्थ्य के लिए खास हैं, उससे भी ज्यादा खास वह किसान है जिन्होंने इस आम का उत्पादन किया है। उन्होंने देश और प्रदेश के किसानों को बधाई और धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश के बेहतरी के लिए जिन किसानों ने जीवन का अमूल्य समय दिया है वह सम्मान के पात्र हैं। आम की फसल न सिर्फ सेहत के लिए बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। आम का फसल लेकर किसान समृद्ध और सुदृढ़ हो रहे हैं। मंत्री श्री नेताम कृषि महाविद्यालय रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के किसानों द्वारा लगभग 327 प्रकार के आम के किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसके साथ ही आम से बने हुए 56 प्रकार के व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस मौके पर मंत्री श्री नेताम ने उत्कृष्ट किसानों को आम का पौधा भेंटकर सम्मानित किया। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा तो कहा ही जाता है इसके बाद यहां की और भी विशेषता है कि छत्तीसगढ़ की धरती में फल-फूल, मसाले से लेकर तमाम औषधि पौधों के फसलों के लिए उपयुक्त उर्वरा शक्ति उपलब्ध है। यहां की मिट्टी में विदेशों के आम के किस्मों के भी उत्पादन करने की क्षमता है। उन्होंने जापान की सबसे कीमती आम मियासाकी और छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मीठे और रसीले आम हाथी छूल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह मिट्टी दोनों प्रकार के आम को उत्पादित करने की क्षमता रखता है। श्री नेताम ने कहा कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से पूरे परिवार के लिए पेड़ लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम जीतने प्रकृति के नजदीक जाएंगे सुखद अनुभव करेंगे। वहीं हम प्रकृति से जीतने दूर जाएंगे चुनौती हमारे सामने आती रहेगी। उन्होंने कहा कि हम ऐसा वातावरण तैयार करें, फिर से प्रकृति सुन्दर हो। आम महोत्सव के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए विधायक  मोतीलाल साहू ने कहा कि आम प्रकृति का अनुपम भेंट है। आम में पोषण आहार के साथ-साथ खनिज तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है, जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक है। विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि आम फलों का राजा है, कच्चे और पके आम, आम का नाम सुनते ही मुंह में पानी और मन में गुदगुदी आ जाती है। यह हमारे सेहत के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि देशभर के किसानों का यहां एकत्र होना और आम के अलग-अलग किस्मों की जानकारी से किसानों को लाभ मिलेगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने स्वागत भाषण दिया। गौरतलब है कि इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी तथा स्वयं सेवी संस्था प्रकृति की ओर संयुक्त तत्वाधान में 12 से 14 जून तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 327 से अधिक किस्मों एवं आम से बने 56 व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया है। इस महोत्सव में आम की विभिन्न किस्मों की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ एवं देश के विभिन्न राज्यों के आम उत्पादन किसान शामिल हैं। आम प्रदर्शनी – बैगनफल्ली, बंगनफल्ली, सिन्दूरी, कजली, गोपालभोग, चौसा, खजरी चौसा, शरबती, खुसनारा, एप्पल मैंगो, नाजूक बदन, मिठुआ, अल्फांसी, आम्रपाली, बंगाल (लंगड़ा), थाईलैण्ड का थाई बनाना, जापान का मियाजाकी, सांईसुगंध, मल्लिका, दशहरी, तोतापरी, बस्तर का हाथीछूल जैसे 327 प्रकार के आम के किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस मौके पर उद्यानिकी विभाग के संचालक श्री एस. जगदीशन, प्रकृति की ओर संस्था के संचालक सहित सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित थे।

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