“स्वास्थ्य व्यवस्था या भ्रष्टाचार का सीरियल? गरियाबंद अस्पताल में ‘सुशासन तिहार’ का असली ड्रामा!…”

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)।छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में इन दिनों एक अद्भुत सरकारी नाटक चल रहा है नाम है “सुशासन तिहार 2025” और इसकी थीम है : “अगर शिकायत करो, तो जांच उन्हीं से करवाओ जिनपर आरोप हैं ताकि भ्रष्टाचार नहाए, पोंछे और फूलों की माला पहन कर वापस ड्यूटी पर लौटे!”

शिकायतकर्ता डॉ. राजेन्द्र बिनकर ने किया सिस्टम की लुंगी खींचने का पाप अब पूरे अस्पताल में पसीना :

 डॉ. बिनकर ने शिकायत की — कि गरियाबंद जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो अस्पताल को ‘Netflix’ की तरह समझते हैं कभी-कभी लॉग इन करो, सब्सक्रिप्शन चालू रहे बस!’ डॉ. महावीर अग्रवाल और डॉ. निशा नवरत्न का नाम आया जिनका शेड्यूल “हाजिरी दो, तनख्वाह लो, और फिर महीने भर दर्शन मत दो” जैसा बताया गया।

लेकिन असली मज़ा तो तब आया जब… जांच सौंप दी गई उसी सिस्टम को, जिसकी चुप्पी ने इन घोटालों को सरकारी गहना बना दिया था!

जांच ऐसे हो रही है जैसे चोरी की रिपोर्ट उसी चोर के मामा के पास दर्ज हो और मामा बोले, ‘बेटा शरीफ है, थोड़ा उधार लेता है बस!’…मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन जिनकी निगरानी में ये पूरा ‘हाजिरी तमाशा’ चल रहा था अब खुद ही जांच के प्रभारी हैं।

  • वाह रे व्यवस्था, तेरा न्याय भी तुझी से शर्मिंदा है!
  • यहाँ ‘साक्ष्य’ पसीने में बह रहे हैं और ‘जवाबदेही’ AC ऑफिस में छुट्टी पर गई है।

डॉ. निशा नवरत्न : अस्पताल में कम, किंवदंती में ज़्यादा हर महीने आती हैं जैसे “फुल मून” :

मरीजों को न इलाज मिलता है, न डॉक्टर का दर्शन। लेकिन सरकार को सिर्फ ये दिखता है कि “हाजिरी रजिस्टर में चिड़िया बैठी या नहीं!” शायद अगली बार मरीजों को भी ‘चिड़िया बैठाने का प्रशिक्षण’ देकर खुद ही इलाज करने को कह दिया जाएगा!

सुशासन का नया फार्मूला: “ताली बजाओ, शिकायत दबाओ, भ्रष्टाचार सजाओ!”

  • जिन डॉक्टरों को नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए, उन्हें अस्पताल में VIP ट्रीटमेंट मिल रहा है।
  • जिन्होंने शिकायत की, उनसे पूछा जा रहा है “आपको इतनी फुर्सत कैसे मिल गई?”
  • शायद अगली बार फरियादी को ही जेल भेज दिया जाएगा क्योंकि “सिस्टम को परेशान करना एक गंभीर अपराध है!”

विधायक आए, डॉक्टर गायब मिले, रिपोर्ट बनी और फिर सबने मिलकर चाय पी ली : नेताओं की औचक निरीक्षण वाली फोटो खिंचवाई गई। डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर को कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया। लेकिन उस आदेश की फाइल शायद अब ग्रीन टी पी रही है और सिस्टम कह रहा है, “Let it chill, bro!”

जनता के सवाल अब लाउडस्पीकर से चिल्ला रहे हैं :

  • क्या गरियाबंद अस्पताल इलाज के लिए है या सरकारी वेतन ‘स्नैच’ पॉइंट?
  • क्या सुशासन तिहार का मतलब है — सिर्फ बैनर, पर्चे, झूठे आंकड़े और ठंडी फाइलें?
  • क्या जांच का मतलब सिर्फ दिखावा और आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ का सरकारी तोहफा है?

गरियाबंद मॉडल: शासन में घोटाले, जाँच में हमजोली और जनता के नाम पर ताली :

 यहां सुशासन तिहार एक प्रहसन है जिसमें डॉक्टर अभिनय करते हैं, अफसर निर्देशन करते हैं और जनता हॉल में रोती है।

पर ध्यान रहे “यह फिल्म रीयलिटी पर आधारित है, कोई फिक्शन नहीं!”


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